वन भूमि पर अवैध निर्माण हटेंगे, NGT ने दिल्ली सरकार को दिए आदेश

Update: 2026-07-29 13:43 GMT

नई दिल्ली :  राजधानी दिल्ली में वन भूमि पर अतिक्रमण को लेकर बड़ा प्रशासनिक कदम उठने जा रहा है। राष्ट्रीय हरित अधिकरण (एनजीटी) ने दिल्ली सरकार को सख्त निर्देश देते हुए कहा है कि दक्षिण दिल्ली के साकेत स्थित सैदुलाजाब वन क्षेत्र से चार महीने के भीतर सभी अवैध अतिक्रमण हटाए जाएं। एनजीटी ने स्पष्ट किया कि यह पूरी कार्रवाई कानून के प्रावधानों के अनुसार की जाए और वन भूमि को उसके मूल स्वरूप में सुरक्षित रखने के लिए आवश्यक कदम उठाए जाएं। इस आदेश के बाद क्षेत्र में बड़े स्तर पर बुलडोजर कार्रवाई की संभावना तेज हो गई है।

यह आदेश जस्टिस प्रकाश श्रीवास्तव की अध्यक्षता वाली पीठ ने भ्रष्टाचार हटाओ सोसाइटी की ओर से दायर याचिका पर सुनवाई के दौरान दिया। याचिका में आरोप लगाया गया था कि सैदुलाजाब की वन भूमि पर लंबे समय से भू-माफियाओं और अन्य लोगों द्वारा अवैध कब्जे किए गए हैं। इन कब्जों के कारण वन क्षेत्र का बड़ा हिस्सा प्रभावित हुआ है और पर्यावरण को भी गंभीर नुकसान पहुंचा है।

सुनवाई के दौरान एनजीटी ने मई 2024 में गठित संयुक्त समिति की रिपोर्ट का भी उल्लेख किया। इस समिति में विभिन्न सरकारी विभागों के अधिकारियों को शामिल किया गया था, जिन्होंने मौके का निरीक्षण कर विस्तृत रिपोर्ट तैयार की थी। रिपोर्ट में बताया गया कि राजस्व रिकॉर्ड में दर्ज वन भूमि की तुलना में मौके पर उपलब्ध भूमि काफी कम पाई गई। इसका कारण अवैध निर्माण और अतिक्रमण बताया गया।

संयुक्त समिति की रिपोर्ट के अनुसार वन क्षेत्र में बड़ी संख्या में पेड़ समाप्त हो चुके हैं और उनकी जगह स्थायी निर्माण खड़े कर दिए गए हैं। कई स्थानों पर भवनों का विस्तार वन भूमि तक कर लिया गया है। निरीक्षण के दौरान टूटी हुई बाउंड्री वॉल, अवैध पक्के ढांचे और बड़े पैमाने पर कचरे के ढेर भी मिले। रिपोर्ट में यह भी कहा गया कि इन गतिविधियों से क्षेत्र की जैव विविधता प्रभावित हुई है और पक्षियों के प्राकृतिक आवास पर भी प्रतिकूल असर पड़ा है।

दिल्ली सरकार की ओर से सुनवाई के दौरान बताया गया कि पहले जारी किए गए तोड़फोड़ नोटिस को कुछ प्रभावित पक्षों ने दिल्ली हाईकोर्ट में चुनौती दी थी। हाईकोर्ट ने संबंधित लोगों को भारतीय वन अधिनियम के तहत वन व्यवस्था अधिकारी के समक्ष अपनी बात रखने का अवसर देने का निर्देश दिया था। इसके बाद सभी संबंधित पक्षों की आपत्तियों और दावों पर सुनवाई की गई।

सरकार ने एनजीटी को यह भी जानकारी दी कि सात मई 2026 को वन व्यवस्था अधिकारी ने सभी लंबित आवेदनों और दावों को खारिज कर दिया। इसके बाद अब कानूनी प्रक्रिया पूरी हो चुकी है और अतिक्रमण हटाने में कोई बाधा नहीं बची है। सरकार के इस पक्ष को रिकॉर्ड पर लेते हुए एनजीटी ने चार महीने के भीतर कार्रवाई पूरी करने का निर्देश दिया और मामले का निस्तारण कर दिया।

विशेषज्ञों का मानना है कि दिल्ली में तेजी से बढ़ते शहरीकरण के बीच वन क्षेत्रों पर अतिक्रमण एक गंभीर चुनौती बन चुका है। हरित क्षेत्र कम होने से प्रदूषण बढ़ने, तापमान में वृद्धि और जैव विविधता को नुकसान जैसी समस्याएं सामने आ रही हैं। ऐसे में न्यायिक हस्तक्षेप पर्यावरण संरक्षण के लिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

एनजीटी के आदेश के बाद अब दिल्ली सरकार, वन विभाग और स्थानीय प्रशासन पर समयबद्ध कार्रवाई की जिम्मेदारी होगी। प्रशासन को यह सुनिश्चित करना होगा कि वन भूमि से सभी अवैध कब्जे हटाए जाएं और भविष्य में दोबारा अतिक्रमण न हो। पर्यावरण संरक्षण से जुड़े संगठनों ने इस फैसले का स्वागत करते हुए उम्मीद जताई है कि इससे राजधानी के वन क्षेत्रों की सुरक्षा मजबूत होगी और प्राकृतिक संसाधनों के संरक्षण की दिशा में सकारात्मक संदेश जाएगा। वहीं प्रभावित पक्षों की नजर अब प्रशासन की आगामी कार्रवाई पर टिकी हुई है, क्योंकि आने वाले महीनों में साकेत के सैदुलाजाब क्षेत्र में बड़े पैमाने पर अतिक्रमण हटाने की प्रक्रिया शुरू होने की संभावना है।

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