नई दिल्ली। कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के संस्थापक अभिजीत दीपके ने विपक्षी दलों की चुनावी रणनीति पर सवाल उठाए हैं। सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर किए गए एक पोस्ट में उन्होंने कहा कि अगर विपक्षी दल वास्तव में मानते हैं कि देश में चुनाव ‘रिग्ड’ यानी धांधली वाले हैं, तो उन्हें ऐसे चुनावों में लगातार हिस्सा लेकर चुनावी प्रक्रिया को वैधता नहीं देनी चाहिए। उनका यह बयान ऐसे समय सामने आया है, जब मतदाता सूची और चुनाव प्रक्रिया को लेकर सरकार, विपक्ष तथा निर्वाचन आयोग के बीच राजनीतिक बयानबाजी जारी है।

दीपके की टिप्पणी विपक्षी दलों द्वारा चुनाव प्रक्रिया को लेकर उठाए जा रहे सवालों पर केंद्रित है। उनका तर्क है कि चुनावों की निष्पक्षता पर गंभीर संदेह जताने और साथ ही उन्हीं चुनावों में लगातार भाग लेने के बीच विपक्ष को अपनी स्थिति स्पष्ट करनी चाहिए। हालांकि चुनावी धांधली के संबंध में विपक्षी नेताओं द्वारा लगाए गए आरोप राजनीतिक दावे हैं और अलग-अलग मामलों में निर्वाचन आयोग ने ऐसे आरोपों पर अपनी प्रतिक्रियाएं भी दी हैं।

कॉकरोच जनता पार्टी हाल के महीनों में सोशल मीडिया और युवाओं से जुड़े मुद्दों के कारण चर्चा में रही है। इसकी शुरुआत एक व्यंग्यात्मक ऑनलाइन अभियान के रूप में हुई थी और बाद में यह युवाओं, बेरोजगारी, परीक्षा प्रणाली तथा सार्वजनिक जवाबदेही जैसे मुद्दों को उठाने वाला मंच बन गया। दीपके राजनीतिक संचार रणनीतिकार रहे हैं और CJP के प्रमुख चेहरों में शामिल हैं।

CJP की आधिकारिक वेबसाइट पर भी चुनाव और मताधिकार से जुड़ा मुद्दा उसके घोषित एजेंडे में शामिल है। संगठन ने मतदाता सूची से वैध मत हटाए जाने को गंभीर मुद्दा बताते हुए इसके लिए कड़े जवाबदेही प्रावधान की मांग की है। वेबसाइट पर शिक्षा, रोजगार, राजनीतिक दलबदल, महिलाओं के प्रतिनिधित्व और मीडिया से जुड़े मुद्दे भी उसके घोषित एजेंडे का हिस्सा हैं।

दीपके इससे पहले भी चुनावी व्यवस्था और चुनाव में धन के प्रभाव पर सवाल उठा चुके हैं। हाल में दिल्ली विश्वविद्यालय छात्र संघ चुनाव के परिणामों पर प्रतिक्रिया देते हुए उन्होंने दावा किया था कि छात्र राजनीति में भी धनबल की भूमिका बढ़ी है। उन्होंने चुनाव प्रचार में महंगी गाड़ियों के इस्तेमाल का उल्लेख करते हुए इसे चुनावी राजनीति में पैसे के प्रभाव से जोड़ा था। यह उनका राजनीतिक आकलन था।

वहीं CJP के मुख्य प्रवक्ता सौरव दास ने हालिया दिल्ली विश्वविद्यालय छात्र संघ चुनाव के बाद विपक्षी छात्र संगठनों के बीच एकजुटता की कमी पर सवाल उठाए थे। उनका दावा था कि विपक्षी मतों के बंटवारे का फायदा अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद को मिला। इस बयान के जरिए CJP ने विपक्ष की रणनीति और एकता को लेकर भी सवाल उठाए थे।

दीपके की नई टिप्पणी राष्ट्रीय स्तर पर विपक्षी दलों के चुनाव संबंधी आरोपों को लेकर है। विभिन्न विपक्षी नेताओं ने पिछले कुछ समय में मतदाता सूची, मतदाताओं के नाम हटाए जाने और चुनावी प्रक्रिया के अलग-अलग पहलुओं पर सवाल उठाए हैं। दूसरी ओर निर्वाचन आयोग अपनी प्रक्रियाओं को संवैधानिक और कानूनी प्रावधानों के अनुरूप बताता रहा है। ऐसे में चुनावी प्रक्रिया पर चल रही बहस में CJP संस्थापक ने विपक्ष से उसकी आगे की रणनीति स्पष्ट करने की मांग की है।

CJP खुद भी अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म को लेकर विवादों में रही है। मई 2026 में संगठन का एक्स अकाउंट भारत में कानूनी मांग के बाद रोक दिया गया था। इंडियन एक्सप्रेस ने एक वरिष्ठ सरकारी अधिकारी के हवाले से रिपोर्ट किया था कि इंटेलिजेंस ब्यूरो की ओर से राष्ट्रीय सुरक्षा संबंधी चिंताएं जताए जाने के बाद केंद्र ने यह निर्देश दिया था। दीपके ने इसके बाद नया एक्स हैंडल शुरू किया और कानूनी रास्ता अपनाने की बात कही थी।

दीपके ने बाद में आरोप लगाया था कि CJP के सोशल मीडिया खातों पर व्यापक कार्रवाई हुई और उनके तथा संगठन के इंस्टाग्राम अकाउंट हैक किए गए। उन्होंने एक्स पर लिखा था कि पार्टी का मूल अकाउंट रोका गया और बैकअप अकाउंट भी प्रभावित हुआ। ये हैकिंग संबंधी दावे दीपके के आरोप थे।

मामला दिल्ली हाई कोर्ट तक भी पहुंचा था। दीपके ने CJP के एक्स अकाउंट को बहाल करने की मांग को लेकर अदालत का रुख किया। मई के अंत में दिल्ली हाई कोर्ट ने तत्काल राहत नहीं दी और इलेक्ट्रॉनिक्स एवं सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय की समीक्षा समिति को उनकी शिकायत पर विचार करने को कहा था।

CJP की राजनीति का बड़ा हिस्सा युवाओं और उनकी समस्याओं के इर्द-गिर्द केंद्रित रहा है। रोजगार, परीक्षाओं में कथित अनियमितताएं, पेपर लीक और शिक्षा व्यवस्था जैसे मुद्दों को संगठन लगातार उठा रहा है। दीपके ने सार्वजनिक रूप से कहा है कि उनका उद्देश्य राजनीतिक विमर्श में शिक्षा, बेरोजगारी और युवाओं से जुड़े मुद्दों को प्रमुखता दिलाना है।

अब चुनावी निष्पक्षता के सवाल पर विपक्ष को निशाने पर लेकर दीपके ने बहस का एक अलग पहलू सामने रखा है। उनका मूल सवाल यह है कि यदि कोई राजनीतिक दल चुनावी प्रक्रिया को धांधली वाला मानता है तो उसे यह भी स्पष्ट करना चाहिए कि वह उसी प्रक्रिया में भागीदारी को किस तरह देखता है। फिलहाल यह दीपके का राजनीतिक तर्क है। चुनावों की निष्पक्षता, कथित अनियमितताओं और विपक्ष की भागीदारी से जुड़े दावों का आकलन संबंधित मामलों के साक्ष्य, निर्वाचन आयोग की प्रतिक्रिया और कानूनी प्रक्रिया के आधार पर ही किया जा सकता है।

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