Delhi दिल्ली: भारतीय वायुसेना (IAF) के प्रमुख ने नयोमा, पूर्वी लद्दाख में दुनिया की सबसे ऊंची एयरबेस का उद्घाटन किया। यह एयरबेस लद्दाख के उस क्षेत्र में स्थित है जो केवल 30 किलोमीटर की दूरी पर चीनी सीमा (LAC) से सटा है। नयोमा एयरबेस 13,700 फीट की ऊँचाई पर स्थित है और इसमें 3 किलोमीटर लंबी रनवे तथा हार्डनड शेल्टर्स बनाए गए हैं, जो चरम ठंड -40°C के तापमान में भी संचालन के लिए पूरी तरह सक्षम हैं।
यह एयरबेस आधुनिक भारतीय इंजीनियरिंग का एक अद्भुत उदाहरण है। इस उच्च-स्तरीय सुविधाओं वाली एयरबेस में राफेल, सु-30एमकेआई, मिग-29 और सी-17 जैसे आधुनिक लड़ाकू और परिवहन विमान उतारना, टेक-ऑफ और हवाई संचालन करना संभव है। नयोमा एयरबेस की स्थापना से भारतीय वायुसेना की रणनीतिक क्षमताओं में भारी वृद्धि हुई है और इसे चीन के संभावित सैन्य गतिविधियों के मद्देनजर सुरक्षा बढ़ाने के लिए बनाया गया है।
आईएएफ प्रमुख ने उद्घाटन समारोह के दौरान कहा कि नयोमा एयरबेस न केवल भारत की सीमाओं की सुरक्षा को मजबूत करेगा, बल्कि सीमावर्ती क्षेत्रों में त्वरित और प्रभावी हवाई प्रतिक्रिया सुनिश्चित करेगा। उन्होंने कहा कि यह एयरबेस अत्याधुनिक तकनीक और भौगोलिक परिस्थितियों के अनुरूप डिज़ाइन किया गया है ताकि भारी विमानों का संचालन और सैन्य तैयारी बिना किसी बाधा के की जा सके।
विशेषज्ञों के अनुसार, नयोमा एयरबेस का संचालन भारतीय सेना की पूर्वी लद्दाख में सैन्य स्थिरता और रणनीतिक प्रभुत्व को सुनिश्चित करेगा। यहाँ पर बनाए गए हार्डनड शेल्टर्स के कारण विमान कठोर मौसम और हमलों से सुरक्षित रहेंगे। इस एयरबेस का निर्माण अत्यधिक कठिन भौगोलिक और जलवायु परिस्थितियों में किया गया, जिसमें बर्फ, ऊँचाई और ऑक्सीजन की कमी जैसी चुनौतियाँ शामिल थीं। इस नई एयरबेस के उद्घाटन के साथ ही भारतीय वायुसेना की सामरिक तैयारियों में नई ऊँचाई पर पहुँच गई है। नयोमा एयरबेस अब पूरी तरह से ऑपरेशनल है और यह भारत की सीमाओं की सुरक्षा और क्षेत्रीय हवाई श्रेष्ठता सुनिश्चित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा।