दिल्ली :जनगणना कार्य में लगाए गए शिक्षकों को लेकर हाईकोर्ट ने एक महत्वपूर्ण फैसला सुनाया है। अदालत ने स्पष्ट किया है कि यदि किसी शिक्षक की ड्यूटी जनगणना कार्य के लिए लगाई जाती है तो वह इसे करने से इनकार नहीं कर सकता। कोर्ट ने कहा कि जनगणना जैसे राष्ट्रीय महत्व के कार्य में नियुक्त किए गए शिक्षक अपनी जिम्मेदारी से पीछे नहीं हट सकते।
कलकत्ता हाईकोर्ट ने इस मामले की सुनवाई करते हुए कहा कि जनगणना ड्यूटी पर भेजे गए शिक्षक को स्कूल की ड्यूटी पर ही माना जाएगा। यानी जनगणना कार्य को उनकी नियमित सरकारी जिम्मेदारी का हिस्सा माना जाएगा। अदालत ने यह भी साफ किया कि इस दौरान शिक्षक की सेवा स्थिति, नौकरी या प्रमोशन के अधिकारों पर कोई नकारात्मक प्रभाव नहीं पड़ना चाहिए।
जनगणना ड्यूटी को लेकर क्यों उठा था विवाद?
दरअसल, कई शिक्षकों ने जनगणना कार्य को लेकर आपत्ति जताई थी। उनका कहना था कि स्कूल में पढ़ाई की जिम्मेदारी के साथ अतिरिक्त जनगणना ड्यूटी निभाना मुश्किल हो रहा है। कई शिक्षकों ने यह भी कहा कि स्कूल समय के बाद और छुट्टी के दिनों में काम करने से उन पर अतिरिक्त दबाव बढ़ रहा है।
मामला तब हाईकोर्ट पहुंचा जब शिक्षकों ने जनगणना कार्य की समय-सारणी और जिम्मेदारियों को लेकर सवाल उठाए। शिक्षकों की दलील थी कि छात्रों की पढ़ाई प्रभावित नहीं होनी चाहिए और प्रशासन को ड्यूटी लगाने से पहले व्यावहारिक परिस्थितियों को ध्यान में रखना चाहिए।
कोर्ट ने क्या कहा?
हाईकोर्ट ने कहा कि जनगणना देश के लिए बेहद महत्वपूर्ण कार्य है और इसमें सरकारी कर्मचारियों का सहयोग जरूरी है। अगर किसी शिक्षक को आधिकारिक रूप से जनगणना कार्य के लिए नियुक्त किया जाता है तो उसे इस जिम्मेदारी को निभाना होगा।
अदालत ने यह भी निर्देश दिया कि जनगणना अधिकारियों को शिक्षकों की ड्यूटी लगाते समय समय, स्थान और काम की जानकारी संबंधित स्कूल प्रमुख को देनी होगी। स्कूल प्रमुख को भी व्यवस्था बनानी होगी ताकि छात्रों की पढ़ाई प्रभावित न हो।
शिक्षकों को मिलेगी सुरक्षा
कोर्ट ने जनगणना अधिनियम के प्रावधानों का हवाला देते हुए कहा कि जनगणना ड्यूटी करने वाले कर्मचारियों के हितों की रक्षा की जानी चाहिए। इस कार्य के कारण उनके करियर, वेतन या प्रमोशन पर कोई प्रतिकूल असर नहीं पड़ना चाहिए।
इस फैसले से यह स्पष्ट हो गया है कि जनगणना कार्य केवल अतिरिक्त काम नहीं बल्कि सरकारी जिम्मेदारी का हिस्सा माना जाएगा।
पढ़ाई और जनगणना के बीच संतुलन जरूरी
हालांकि, अदालत ने यह भी माना कि शिक्षकों की मुख्य जिम्मेदारी छात्रों को पढ़ाना है। इसलिए प्रशासन को ऐसी व्यवस्था करनी चाहिए जिससे जनगणना का काम भी पूरा हो और स्कूलों की पढ़ाई भी प्रभावित न हो।
हाईकोर्ट ने कहा कि शिक्षकों की उपलब्धता, स्कूल की दूरी और काम के समय जैसी बातों को ध्यान में रखकर ड्यूटी तय की जानी चाहिए।
निजी स्कूल शिक्षकों को लेकर अलग स्थिति
जनगणना ड्यूटी में निजी स्कूलों के शिक्षकों को शामिल करने को लेकर अलग-अलग राज्यों में अदालतों के सामने मामले आए हैं। कुछ मामलों में हाईकोर्ट ने निजी, गैर-सहायता प्राप्त या अल्पसंख्यक स्कूलों के शिक्षकों की तैनाती पर सवाल उठाए हैं।
इससे साफ है कि सरकारी और निजी संस्थानों के शिक्षकों की जनगणना ड्यूटी को लेकर कानूनी स्थिति अलग-अलग हो सकती है।
राष्ट्रीय कार्यों में कर्मचारियों की भूमिका
जनगणना देश की नीतियां बनाने के लिए बेहद अहम प्रक्रिया है। इससे सरकार को जनसंख्या, सामाजिक स्थिति, आर्थिक आंकड़ों और विकास योजनाओं के लिए जरूरी जानकारी मिलती है। इसलिए इसमें बड़ी संख्या में सरकारी कर्मचारियों की सेवाएं ली जाती हैं।
शिक्षक लंबे समय से चुनाव, जनगणना और अन्य सरकारी कार्यों में अपनी सेवाएं देते रहे हैं। हालांकि, समय-समय पर इन अतिरिक्त जिम्मेदारियों को लेकर बहस भी होती रही है।
अब शिक्षकों को करना होगा सहयोग
हाईकोर्ट के फैसले के बाद जनगणना ड्यूटी से जुड़े शिक्षकों की स्थिति स्पष्ट हो गई है। अब अगर किसी शिक्षक की आधिकारिक नियुक्ति जनगणना कार्य के लिए होती है तो वह केवल इस आधार पर मना नहीं कर सकता कि वह शिक्षक है।
हालांकि, प्रशासन की जिम्मेदारी भी तय की गई है कि शिक्षकों पर अनावश्यक दबाव न डाला जाए और स्कूलों में पढ़ाई की व्यवस्था प्रभावित न हो।
कुल मिलाकर, हाईकोर्ट के इस फैसले ने जनगणना कार्य और शिक्षकों की जिम्मेदारी को लेकर स्थिति साफ कर दी है। जनगणना जैसी राष्ट्रीय प्रक्रिया को पूरा करने में शिक्षकों को सहयोग करना होगा, लेकिन साथ ही शिक्षा व्यवस्था को सुचारू रखना भी प्रशासन की जिम्मेदारी होगी।