नई दिल्ली। मुख्य चुनाव आयुक्त (CEC) ज्ञानेश कुमार के खिलाफ चल रहे विरोध प्रदर्शनों के बीच राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली में सुरक्षा व्यवस्था कड़ी कर दी गई है। गुरुवार, 8 अक्टूबर 2026 को कनॉट प्लेस, जंतर-मंतर, अशोक रोड और चुनाव आयोग मुख्यालय के आसपास बड़ी संख्या में पुलिस तथा अर्धसैनिक बलों के जवान तैनात किए गए हैं। मतदाता सूचियों के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) में कथित अनियमितताओं को लेकर कांग्रेस और अन्य विपक्षी दल लगातार प्रदर्शन कर रहे हैं। विरोध प्रदर्शनों के दौरान कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए दिल्ली पुलिस को अतिरिक्त सुरक्षा बल उपलब्ध कराए गए हैं। संवेदनशील स्थानों पर बैरिकेडिंग की गई है और प्रदर्शनकारियों की आवाजाही पर निगरानी रखी जा रही है। विपक्षी दल मुख्य चुनाव आयुक्त के इस्तीफे की मांग कर रहे हैं, जबकि चुनाव आयोग राजनीतिक पक्षपात के आरोपों को खारिज कर चुका है।
कनॉट प्लेस में बदला सुरक्षा का नजारा
राजधानी के प्रमुख व्यावसायिक क्षेत्र कनॉट प्लेस में गुरुवार को सुरक्षा व्यवस्था सामान्य दिनों से अलग दिखाई दी।
विपक्षी दलों के प्रस्तावित कार्यक्रम को देखते हुए दिल्ली पुलिस ने यहां अतिरिक्त जवानों की तैनाती की।
सड़कों और महत्वपूर्ण मार्गों पर बैरिकेडिंग की व्यवस्था की गई। पुलिसकर्मियों को प्रदर्शनकारियों की गतिविधियों पर नजर रखने के निर्देश दिए गए।
कांग्रेस और INDIA गठबंधन के नेताओं का कनॉट प्लेस में एकत्र होने का कार्यक्रम था। इसके बाद उनके दोबारा विरोध प्रदर्शन करने की संभावना को देखते हुए सुरक्षा बढ़ाई गई।
सुरक्षा एजेंसियों की प्राथमिकता संवेदनशील स्थानों पर किसी अप्रिय घटना को रोकना और सार्वजनिक व्यवस्था बनाए रखना है।
अर्धसैनिक बलों की अतिरिक्त कंपनियां बुलाई गईं
दिल्ली में जारी प्रदर्शनों के बीच केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बलों की अतिरिक्त कंपनियां तैनात की जा रही हैं।
सुरक्षा संबंधी रिपोर्टों के अनुसार, गृह मंत्रालय ने 8 से 12 अक्टूबर के बीच दिल्ली पुलिस की सहायता के लिए 221 कंपनियों की व्यवस्था की थी।
इसके बाद अतिरिक्त बल बुलाए जाने की जानकारी भी सामने आई है। आठ अक्टूबर की एक रिपोर्ट में राजधानी में केंद्रीय सुरक्षा बलों की कुल तैनाती बढ़ाकर लगभग 26 हजार जवान करने की बात कही गई है।
इन जवानों का इस्तेमाल संवेदनशील क्षेत्रों, सरकारी इमारतों और प्रमुख सार्वजनिक स्थानों की सुरक्षा के लिए किया जाएगा।
हालांकि, उपलब्ध विश्वसनीय रिपोर्टों में 300 कंपनियों की तैनाती का स्वतंत्र सत्यापन नहीं हुआ है।
चुनाव आयोग मुख्यालय के आसपास कड़ी निगरानी
मुख्य चुनाव आयुक्त के खिलाफ विरोध प्रदर्शनों को देखते हुए अशोक रोड स्थित निर्वाचन सदन की सुरक्षा व्यवस्था भी मजबूत की गई है।
निर्वाचन सदन में भारत निर्वाचन आयोग का मुख्यालय है।
विपक्षी दलों के नेताओं और कार्यकर्ताओं ने चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाते हुए प्रदर्शन करने की घोषणा की है।
इसे देखते हुए पुलिस ने कार्यालय के आसपास सुरक्षा घेरा बढ़ाया है।
अधिकारियों का उद्देश्य है कि विरोध प्रदर्शनों के दौरान सरकारी कार्यालयों का कामकाज प्रभावित न हो और कानून-व्यवस्था बनी रहे।
राहुल गांधी समेत कई नेताओं को लिया गया था हिरासत में
बुधवार, 7 अक्टूबर को कांग्रेस और INDIA गठबंधन के नेताओं ने दिल्ली में विरोध प्रदर्शन किया था।
लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी, प्रियंका गांधी वाड्रा और कई अन्य विपक्षी नेता जंतर-मंतर की ओर बढ़ रहे थे।
इस दौरान पुलिस ने उन्हें रोक दिया। इसके बाद कई नेताओं और कार्यकर्ताओं को हिरासत में लिया गया।
विपक्षी नेताओं ने पुलिस कार्रवाई की आलोचना करते हुए प्रदर्शन जारी रखने की बात कही।
कांग्रेस का कहना है कि चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली को लेकर सवाल उठाना और शांतिपूर्ण प्रदर्शन करना लोकतांत्रिक अधिकार है।
मतदाता सूची में गड़बड़ी के आरोपों पर विवाद
विरोध प्रदर्शनों के केंद्र में मतदाता सूची का विशेष गहन पुनरीक्षण है।
कांग्रेस और अन्य विपक्षी दलों का आरोप है कि एसआईआर प्रक्रिया के दौरान बड़ी संख्या में पात्र मतदाताओं के नाम हटाए गए हैं।
विपक्षी नेताओं ने दावा किया है कि इससे नागरिकों के मतदान अधिकार प्रभावित हो रहे हैं।
उन्होंने पुनरीक्षण प्रक्रिया में पारदर्शिता सुनिश्चित करने और कथित गड़बड़ियों की जांच कराने की मांग की है।
दूसरी ओर चुनाव आयोग ने राजनीतिक पक्षपात के आरोपों को खारिज किया है।
आयोग का कहना है कि मतदाता सूची को अद्यतन करने और अपात्र तथा दोहराई गई प्रविष्टियों को हटाने के लिए पुनरीक्षण किया जाता है।
हालांकि, किसी विशेष मतदाता का नाम गलत तरीके से हटाए जाने की शिकायत का निर्णय संबंधित दस्तावेजों और निर्वाचन प्रक्रिया के आधार पर होना चाहिए।
मुख्य चुनाव आयुक्त की सुरक्षा भी बढ़ाई गई
विरोध प्रदर्शनों के बीच मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार की व्यक्तिगत सुरक्षा भी मजबूत की गई है।
ज्ञानेश कुमार को पहले से जेड प्लस श्रेणी की सुरक्षा प्राप्त है।
हालिया घटनाक्रम और सुरक्षा संबंधी सूचनाओं के बाद उनके आवास के बाहर अतिरिक्त सुरक्षाकर्मियों की तैनाती की गई है।
इसके अलावा उनकी सुरक्षा में तैनात एजेंसियों के बीच समन्वय बढ़ाया गया है।
सुरक्षा एजेंसियों का कहना है कि संवैधानिक पदों पर कार्यरत अधिकारियों की सुरक्षा सुनिश्चित करना उनकी जिम्मेदारी है।
बाहरी राज्यों से भी बुलाए गए जवान
राजधानी में सुरक्षा बढ़ाने के लिए दूसरे राज्यों में तैनात केंद्रीय बलों की कंपनियों को भी दिल्ली बुलाया गया है।
रिपोर्टों के अनुसार, जम्मू-कश्मीर, छत्तीसगढ़ और पश्चिम बंगाल से अतिरिक्त सुरक्षा बलों की व्यवस्था की गई है।
इन जवानों को आवश्यकता के अनुसार विभिन्न संवेदनशील क्षेत्रों में तैनात किया जाना है।
दिल्ली पुलिस और केंद्रीय सुरक्षा बलों को आपसी संपर्क बनाए रखने के निर्देश दिए गए हैं।
प्रदर्शनों के दौरान अतिरिक्त जवानों की तैनाती का उद्देश्य भीड़ प्रबंधन, यातायात व्यवस्था और महत्वपूर्ण सरकारी प्रतिष्ठानों की सुरक्षा सुनिश्चित करना है।
प्रदर्शनकारियों को हिरासत में रखने की व्यवस्था
दिल्ली में विरोध प्रदर्शन के दौरान पुलिस पहले भी बड़ी संख्या में प्रदर्शनकारियों को हिरासत में ले चुकी है।
दो अक्टूबर को जंतर-मंतर और आसपास के क्षेत्रों में प्रदर्शन के दौरान सैकड़ों लोगों को हिरासत में लिया गया था।
पुलिस ने कुछ प्रदर्शनकारियों को बसों के माध्यम से दूसरे थाना क्षेत्रों में पहुंचाया था।
मौजूदा सुरक्षा तैयारियों के बीच अस्थायी हिरासत केंद्र बनाए जाने की जानकारी भी सामने आई है।
हालांकि, दिल्ली के प्रत्येक बाहरी जिले में चार-चार अस्थायी हिरासत केंद्र बनाए जाने की संख्या की स्वतंत्र आधिकारिक पुष्टि उपलब्ध नहीं है।
जंतर-मंतर के आसपास भी सुरक्षा कड़ी
जंतर-मंतर राजधानी में विरोध प्रदर्शनों का प्रमुख निर्धारित स्थल है।
हाल के दिनों में बड़ी संख्या में विपक्षी नेताओं और कार्यकर्ताओं ने यहां पहुंचने का प्रयास किया।
पुलिस ने बिना अनुमति प्रदर्शन और प्रतिबंधित क्षेत्रों में एकत्र होने को लेकर कार्रवाई की है।
नई दिल्ली के कुछ क्षेत्रों में भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता की धारा 163 के तहत निषेधात्मक आदेश लागू किए गए हैं।
पुलिस का कहना है कि इन प्रतिबंधों का उद्देश्य कानून-व्यवस्था बनाए रखना है।
वहीं विपक्षी नेताओं ने प्रतिबंधों और हिरासत में लिए जाने की कार्रवाई का विरोध किया है।
ड्रोन और अन्य माध्यमों से निगरानी की तैयारी
राजधानी में बड़े विरोध प्रदर्शनों के दौरान पुलिस को भीड़ की गतिविधियों तथा संवेदनशील मार्गों पर नजर रखनी पड़ती है।
प्रदर्शन स्थलों की निगरानी के लिए अतिरिक्त पुलिसकर्मियों और अन्य सुरक्षा संसाधनों की व्यवस्था की गई है।
ड्रोन से निगरानी किए जाने की जानकारी भी सामने आई है, हालांकि गुरुवार को किन-किन स्थानों पर ड्रोन तैनात किए गए, इसकी विस्तृत आधिकारिक पुष्टि उपलब्ध नहीं है।
सुरक्षा व्यवस्था के तहत प्रमुख मार्गों पर आवाजाही को नियंत्रित किए जाने से आम यात्रियों को परेशानी हो सकती है।
ऐसे में नागरिकों के लिए यातायात पुलिस की आधिकारिक सलाह का पालन करना उपयोगी होगा।
कनॉट प्लेस में विपक्षी नेताओं का कार्यक्रम
गुरुवार को कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे की ओर से INDIA गठबंधन के नेताओं के लिए कनॉट प्लेस में दोपहर के भोजन का कार्यक्रम रखा गया।
विपक्षी नेताओं के इस कार्यक्रम के बाद एक और प्रदर्शन की संभावना जताई गई।
इसे देखते हुए दिल्ली पुलिस ने आसपास के मार्गों पर सुरक्षा बढ़ाई।
पुलिस ने संभावित मार्च को देखते हुए अतिरिक्त बलों की व्यवस्था भी की।
हालांकि, शाम तक पूरे कनॉट प्लेस में कर्फ्यू लगने जैसी किसी आधिकारिक घोषणा की पुष्टि नहीं हुई है।
सुरक्षा और प्रदर्शन के अधिकार के बीच चुनौती
दिल्ली में जारी राजनीतिक प्रदर्शनों ने प्रशासन के सामने कानून-व्यवस्था बनाए रखने की चुनौती बढ़ा दी है।
एक ओर विपक्षी दल मतदाता सूची के पुनरीक्षण और चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली पर सवाल उठा रहे हैं, वहीं दूसरी ओर पुलिस संवेदनशील स्थानों पर सुरक्षा सुनिश्चित करने में जुटी है।
लोकतांत्रिक व्यवस्था में शांतिपूर्ण विरोध का अधिकार महत्वपूर्ण है। साथ ही सार्वजनिक सुरक्षा, यातायात और सरकारी कामकाज को सुरक्षित रखना भी प्रशासन की जिम्मेदारी है।
इस स्थिति में सुरक्षा व्यवस्था और प्रदर्शन के अधिकार के बीच संतुलन बनाए रखना आवश्यक है।
अगले प्रदर्शनों को लेकर पुलिस सतर्क
राजधानी में विरोध प्रदर्शनों का सिलसिला जारी रहने की संभावना को देखते हुए सुरक्षा बलों को सतर्क रखा गया है।
विपक्षी दलों ने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग दोहराई है।
वहीं पुलिस ने राजधानी के महत्वपूर्ण क्षेत्रों में सुरक्षा व्यवस्था मजबूत की है।
कनॉट प्लेस, जंतर-मंतर और चुनाव आयोग मुख्यालय के आसपास अतिरिक्त जवान तैनात किए गए हैं।
फिलहाल दिल्ली में राजनीतिक विरोध प्रदर्शनों और सुरक्षा व्यवस्था पर विशेष नजर रखी जा रही है। आगामी कार्यक्रमों तथा कानून-व्यवस्था की स्थिति के आधार पर सुरक्षा बलों की तैनाती में आगे बदलाव किए जा सकते हैं।