नई दिल्ली: इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीन (EVM) में दर्ज वोटों की गिनती के तरीके को लेकर दायर याचिकाओं पर सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार से जवाब मांगा है। मंगलवार को शीर्ष अदालत ने केंद्र से पूछा कि EVM वोटों की गिनती के लिए ‘टोटलाइजर’ (Totaliser) मशीन लागू करने में क्या-क्या अड़चनें आ रही हैं।
चीफ जस्टिस सूर्य कांत और जस्टिस जॉयमाल्य बागची तथा वी. मोहना की पीठ ने केंद्र सरकार से इस मामले में जानकारी मांगी। अदालत ने कहा कि सरकार यह बताए कि टोटलाइजर व्यवस्था लागू करने में किन चुनौतियों का सामना करना पड़ रहा है।
टोटलाइजर मशीन की मांग पर सुनवाई
सुप्रीम कोर्ट में दाखिल याचिकाओं में मांग की गई है कि EVM में दर्ज वोटों की गिनती के लिए टोटलाइजर तकनीक का इस्तेमाल शुरू किया जाए।
याचिकाकर्ताओं का तर्क है कि टोटलाइजर के इस्तेमाल से मतदान की गोपनीयता और मजबूत हो सकती है।
उनका कहना है कि मौजूदा व्यवस्था में कई बार यह पता चल सकता है कि किसी खास मतदान केंद्र पर किस पार्टी या उम्मीदवार को कितने वोट मिले, जिससे मतदाताओं की गोपनीयता प्रभावित होने की आशंका रहती है।
क्या है टोटलाइजर मशीन
टोटलाइजर एक ऐसी तकनीक है, जो कई मतदान केंद्रों की EVM में दर्ज वोटों को एक साथ जोड़कर परिणाम तैयार करती है।
इस व्यवस्था में करीब 14 पोलिंग बूथों के वोटों को एक साथ मिलाकर गिनती की जा सकती है।
इससे किसी एक बूथ के मतदान पैटर्न की पहचान करना मुश्किल हो जाता है और वोटों की गोपनीयता बनी रहती है।
केंद्र से मांगी गई जानकारी
सुप्रीम कोर्ट की पीठ ने केंद्र सरकार से यह बताने को कहा है कि टोटलाइजर व्यवस्था लागू करने में कौन-कौन सी बाधाएं हैं।
अदालत यह जानना चाहती है कि तकनीकी, प्रशासनिक या अन्य कारणों से इस व्यवस्था को लागू करने में क्या समस्याएं सामने आ रही हैं।
केंद्र सरकार को अब इस मामले में अपना पक्ष रखना होगा।
मतदान की गोपनीयता का मुद्दा
टोटलाइजर मशीन को लेकर सबसे बड़ा तर्क मतदान की गोपनीयता से जुड़ा है।
याचिकाकर्ताओं का कहना है कि लोकतांत्रिक व्यवस्था में मतदाता को यह भरोसा होना चाहिए कि उसके वोट की पहचान किसी भी स्तर पर उजागर नहीं होगी।
यदि बूथ स्तर पर वोटों का आंकड़ा सामने आता है तो स्थानीय स्तर पर मतदाताओं पर दबाव या भेदभाव की आशंका पैदा हो सकती है।
चुनाव प्रक्रिया में पारदर्शिता पर बहस
EVM और चुनाव प्रक्रिया को लेकर समय-समय पर पारदर्शिता और सुरक्षा से जुड़े सवाल उठते रहे हैं।
निर्वाचन आयोग लगातार कहता रहा है कि EVM सुरक्षित हैं और चुनाव प्रक्रिया में पूरी पारदर्शिता बरती जाती है।
वहीं, कुछ लोग चुनाव प्रणाली को और मजबूत बनाने के लिए नई तकनीकों के इस्तेमाल की मांग करते रहे हैं।
पहले भी हुई है टोटलाइजर पर चर्चा
टोटलाइजर तकनीक का मुद्दा पहले भी चुनाव सुधारों के संदर्भ में चर्चा में रहा है।
इसका उद्देश्य बूथ स्तर पर वोटों के आंकड़े को गोपनीय रखना और मतदाताओं के हितों की सुरक्षा करना है।
हालांकि, इसे लागू करने को लेकर तकनीकी और प्रशासनिक पहलुओं पर लगातार चर्चा होती रही है।
सुप्रीम कोर्ट के रुख पर नजर
अब इस मामले में केंद्र सरकार के जवाब के बाद आगे की सुनवाई होगी।
केंद्र की ओर से दी जाने वाली जानकारी के आधार पर अदालत यह तय करेगी कि टोटलाइजर व्यवस्था को लेकर आगे क्या कदम उठाए जा सकते हैं।
सुप्रीम कोर्ट की इस पहल के बाद एक बार फिर चुनाव सुधार और मतदान गोपनीयता का मुद्दा चर्चा में आ गया है।
चुनाव व्यवस्था में सुधार की दिशा में कदम
विशेषज्ञों का मानना है कि चुनाव प्रक्रिया में नई तकनीकों का इस्तेमाल तभी प्रभावी होगा, जब उससे सुरक्षा, पारदर्शिता और मतदाता विश्वास तीनों मजबूत हों।
टोटलाइजर को लेकर अंतिम फैसला आने वाले समय में चुनाव प्रक्रिया के लिए महत्वपूर्ण साबित हो सकता है।