नई दिल्ली : 27 अक्टूबर 2026। दिल्ली हाई कोर्ट ने मंगलवार को राजधानी के रेस कोर्स इलाके में स्थित ऐतिहासिक मस्जिद को संभावित ध्वस्तीकरण से बचाने की मांग वाली याचिका पर केंद्र सरकार और दिल्ली वक्फ बोर्ड से जवाब मांगा है। न्यायमूर्ति अनीश दयाल की पीठ ने मामले में नोटिस जारी करते हुए संबंधित अधिकारियों को अपना पक्ष स्पष्ट करने का निर्देश दिया। सुनवाई के दौरान केंद्र सरकार की ओर से अदालत को बताया गया कि फिलहाल मस्जिद को गिराने की कोई योजना नहीं है। सरकारी वकील ने मौखिक रूप से आश्वासन दिया कि अगली सुनवाई तक मस्जिद के खिलाफ ध्वस्तीकरण की कार्रवाई नहीं की जाएगी। अदालत ने मामले की अगली सुनवाई 29 अक्टूबर को निर्धारित की है।
मस्जिद को बचाने के लिए हाई कोर्ट पहुंचे नमाजी
रेस कोर्स मस्जिद को संभावित ध्वस्तीकरण से बचाने के लिए सैयद अहमद सऊद नामक व्यक्ति ने दिल्ली हाई कोर्ट में याचिका दायर की है।याचिकाकर्ता की ओर से अधिवक्ता एम. सुफियान सिद्दीकी अदालत में पेश हुए। उन्होंने कहा कि मस्जिद के अस्तित्व पर खतरा मंडरा रहा है और नमाजियों को वहां प्रवेश करने से रोका जा रहा है।याचिका में दावा किया गया है कि मस्जिद में प्रवेश और निकास के रास्तों पर प्रतिबंध लगाकर लोगों के धार्मिक अधिकार प्रभावित किए जा रहे हैं।याचिकाकर्ता ने संविधान के अनुच्छेद 25 के तहत धार्मिक स्वतंत्रता के अधिकार का हवाला देते हुए अदालत से हस्तक्षेप की मांग की।
150 साल से अधिक पुरानी बताई जा रही मस्जिद
याचिका के अनुसार, रेस कोर्स मस्जिद 150 साल से अधिक पुरानी धार्मिक संरचना है। यह प्रधानमंत्री आवास के नजदीक रेस कोर्स क्लब परिसर में स्थित है।याचिकाकर्ता के वकील ने अदालत को बताया कि मस्जिद को वर्ष 1977 में सरकारी राजपत्र के माध्यम से वक्फ संपत्ति के रूप में अधिसूचित किया गया था।इसके अतिरिक्त 1 अक्टूबर 2009 की अधिसूचना के तहत इसे ग्रेड-II विरासत संरचना के रूप में मान्यता मिलने का दावा किया गया है।याचिकाकर्ता ने दलील दी कि ऐतिहासिक विरासत का दर्जा होने के कारण मस्जिद में बड़े बदलाव या ध्वस्तीकरण के लिए संबंधित विरासत संरक्षण प्राधिकरण की अनुमति आवश्यक होगी।
बिजली और पानी के कनेक्शन काटने पर विवाद
इस मामले में विवाद उस समय बढ़ गया, जब 7 अक्टूबर को मस्जिद की बिजली और पानी की आपूर्ति बंद कर दी गई।याचिकाकर्ता का कहना है कि आसपास की झुग्गियों और अन्य संरचनाओं को हटाने के अभियान के दौरान मस्जिद की आवश्यक सुविधाएं भी बंद कर दी गईं।वहीं केंद्र सरकार के स्थायी अधिवक्ता आशीष दीक्षित ने अदालत को बताया कि आसपास ध्वस्तीकरण का काम चल रहा है। भारी मशीनों और अन्य गतिविधियों के कारण लोगों की सुरक्षा को खतरा हो सकता है।सरकारी पक्ष के अनुसार, इन्हीं सुरक्षा कारणों से बिजली और पानी की आपूर्ति बंद की गई थी।
केंद्र सरकार ने कहा- फिलहाल मस्जिद गिराने की योजना नहीं
सुनवाई के दौरान केंद्र सरकार के वकील ने स्पष्ट किया कि वर्तमान में मस्जिद को गिराने की कोई तत्काल योजना नहीं है।अदालत ने जब पूछा कि क्या अगले कुछ दिनों तक मस्जिद के खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं होगी, तो सरकारी अधिवक्ता ने मौखिक रूप से ऐसा आश्वासन दिया।हालांकि, उन्होंने इस बयान को औपचारिक रूप से दर्ज नहीं करने का अनुरोध किया और मामले में संबंधित विभागों से निर्देश प्राप्त करने के लिए समय मांगा।न्यायमूर्ति अनीश दयाल ने केंद्र सरकार और दिल्ली वक्फ बोर्ड को अगली सुनवाई तक आवश्यक जानकारी जुटाने को कहा।
दिल्ली वक्फ बोर्ड की भूमिका पर भी उठे सवाल
याचिकाकर्ता ने दिल्ली वक्फ बोर्ड पर मस्जिद की सुरक्षा के लिए पर्याप्त कदम नहीं उठाने का आरोप लगाया है।हालांकि, वक्फ बोर्ड के वकील ने अदालत को बताया कि बोर्ड ने 19 अक्टूबर को भूमि एवं विकास कार्यालय तथा अन्य संबंधित अधिकारियों के समक्ष अपना प्रतिवेदन प्रस्तुत किया था।बोर्ड ने मस्जिद की बिजली और पानी की आपूर्ति बहाल करने तथा धार्मिक गतिविधियों को जारी रखने के लिए आवश्यक व्यवस्था करने की मांग की है।इससे पहले मस्जिद के इमाम मोहम्मद हारून की ओर से आवश्यक सुविधाओं की बहाली के लिए दायर याचिका 15 अक्टूबर को खारिज कर दी गई थी।
29 अक्टूबर को होगी अगली सुनवाई
दिल्ली हाई कोर्ट अब 29 अक्टूबर को मामले की दोबारा सुनवाई करेगा।अगली सुनवाई में केंद्र सरकार, भूमि एवं विकास कार्यालय और दिल्ली वक्फ बोर्ड की ओर से प्रस्तुत जानकारी महत्वपूर्ण होगी।अदालत को यह भी स्पष्ट करना होगा कि मस्जिद तक नमाजियों की पहुंच और उसकी ऐतिहासिक स्थिति को लेकर संबंधित विभागों का क्या रुख है।फिलहाल मस्जिद को गिराने का कोई अंतिम न्यायिक आदेश सामने नहीं आया है। केंद्र सरकार के मौखिक आश्वासन के बाद अब सभी की नजरें अगली सुनवाई पर टिकी हैं।
Tags: