Delhi दिल्ली। सुप्रीम कोर्ट में लद्दाख के सामाजिक कार्यकर्ता सोनम वांगचुक की राष्ट्रीय सुरक्षा अधिनियम (एनएसए) के तहत नजरबंदी को चुनौती देने वाली याचिका पर सोमवार को फिर से सुनवाई टल गई है। अब अगली सुनवाई 8 दिसंबर को होगी। वांगचुक की पत्नी गीतांजलि जे अंगमो की ओर से दायर इस याचिका में उनकी नजरबंदी की वैधता और अधिकारियों की ओर से अपनाई गई प्रक्रिया पर सवाल उठाए गए थे। केन्द्र सरकार की तरफ से सॉलिसिटर जनरल ने कोर्ट को बताया कि केन्द्र के जवाब पर याचिकाकर्ता की तरफ से जवाब दाखिल हो चुका है। कल ही जवाब दाखिल हुआ है। गीतांजलि अंगमो ने अर्जी दाखिल कर एनएसए के तहत सोनम वांगचुक की हिरासत को अवैध बताते हुए रिहाई की मांग की है। 

पिछली सुनवाई के बाद लेह के जिलाधिकारी ने सुप्रीम कोर्ट में हलफनामा दाखिल कर बताया है कि सोनम वांगचुक ऐसी गतिविधियों में शामिल रहे हैं जो देश की सुरक्षा, पब्लिक ऑर्डर और समाज की रूढ़ि सेवाओं के लिए नुकसानदायक हैं। गीतांजलि अंगमो ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर लिखा कि भारत के सॉलिसिटर जनरल ने सोनम वांगचुक के मामले में कल हमारे द्वारा दायर किए गए प्रत्युत्तर को पढ़ने और उस पर प्रतिक्रिया देने के लिए 2 सप्ताह का समय मांगा है। अगली सुनवाई 8 दिसंबर को होगी। 

उन्होंने कहा कि 29 अक्टूबर को सर्वोच्च न्यायालय ने बंदी प्रत्यक्षीकरण याचिका में संशोधन के हमारे अनुरोध को स्वीकार कर लिया ताकि एक सप्ताह के भीतर नजरबंदी के आधार को चुनौती देने की बात शामिल की जा सके। 3 नवंबर को हमने 5 दिनों के भीतर संशोधन दायर किया। 17 नवंबर को भारत संघ ने 3 नवंबर से दिए गए 10 दिनों के बजाय प्रतिवाद दायर करने में 14 दिन का समय लिया। 23 नवंबर को हमने 6 दिनों के भीतर प्रत्युत्तर दायर किया, जिसके लिए हमें 7 दिन का समय दिया गया था। सोनम वांगचुक को राष्ट्रीय सुरक्षा कानून (एनएसए) के तहत हिरासत में लिया गया था। इसके बाद देशव्यापी विरोध प्रदर्शन हुए और नागरिक अधिकार समूहों ने भी इसकी आलोचना की। उन्होंने वांगचुक की हिरासत को मनमाना और अनुचित बताया।
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