'उन्होंने मेरा हाथ थामकर राजनीति सिखाई', आडवाणी के लिए पीएम मोदी का भावुक संदेश
गुरु-शिष्य के रिश्ते
नई दिल्ली : भारतीय जनता पार्टी के वरिष्ठ नेता और पूर्व उप प्रधानमंत्री लालकृष्ण आडवाणी के 99वें जन्मदिन पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने उनके साथ अपने दशकों पुराने संबंधों और राजनीतिक जीवन की यादों को साझा किया है। आडवाणी आज अपने जीवन के सौवें वर्ष में प्रवेश कर रहे हैं। इस विशेष अवसर पर प्रधानमंत्री मोदी ने एक भावनात्मक लेख लिखकर बताया कि किस तरह आडवाणी उनके लिए केवल वरिष्ठ नेता नहीं, बल्कि एक अभिभावक और मार्गदर्शक बन गए थे। प्रधानमंत्री ने उनके राजनीतिक संघर्ष, जनसंघ और भाजपा के निर्माण में योगदान, राम मंदिर आंदोलन तथा सोमनाथ से अयोध्या तक की रथयात्रा से जुड़ी कई स्मृतियों का उल्लेख किया।
प्रधानमंत्री मोदी ने लिखा कि इस वर्ष आडवाणी का जन्मदिन दीपावली के पावन पर्व के साथ आया है। उन्होंने इस संयोग को विशेष बताते हुए कहा कि प्रभु श्रीराम और दीपों के उत्सव के साथ आडवाणी के जीवन का महत्वपूर्ण पड़ाव जुड़ना इस अवसर को और यादगार बनाता है। उन्होंने जनसंघ की स्थापना के 75 वर्ष, राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के 100 वर्ष और डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी की 125वीं जयंती का भी उल्लेख किया।
'मेरे लिए अभिभावक की तरह बन गए थे आडवाणी'
प्रधानमंत्री मोदी ने अपने लेख में आडवाणी के साथ व्यक्तिगत संबंधों का उल्लेख करते हुए बताया कि सार्वजनिक जीवन में काम करते हुए कई दशक पहले उन्हें उनके संपर्क में आने का अवसर मिला था। समय के साथ यह संबंध इतना आत्मीय हो गया कि आडवाणी उनके लिए अभिभावक की तरह बन गए। मोदी ने बताया कि आडवाणी ने उन्हें राजनीति की बारीकियां सिखाईं और कदम-कदम पर मार्गदर्शन किया। जीवन में जब भी कठिन परिस्थितियां आईं, उनका अनुभव और सीख सहारा बने। प्रधानमंत्री ने आडवाणी की वैचारिक स्पष्टता, आत्मविश्वास और सिद्धांतों के प्रति निष्ठा को अपने लिए प्रेरणा बताया।
विभाजन में छूटा घर, फिर शून्य से शुरू किया जीवन
प्रधानमंत्री ने आडवाणी के शुरुआती जीवन और भारत विभाजन के दौरान उनके संघर्ष को भी याद किया। लालकृष्ण आडवाणी का जन्म 8 नवंबर 1927 को हुआ था। वर्ष 1947 में देश के विभाजन के समय उन्हें सिंध में अपना घर और परिचित परिवेश छोड़ना पड़ा। प्रधानमंत्री के अनुसार, सब कुछ पीछे छूट जाने के बावजूद आडवाणी ने नए सिरे से जीवन शुरू किया। कठिन परिस्थितियों में फिर से खड़े होने का उनका संकल्प जीवनभर उनके साथ रहा। मोदी ने लिखा कि यही संकल्प जनसंघ को मजबूत बनाने और बाद में भारतीय जनता पार्टी के निर्माण में भी दिखाई दिया।
भाजपा को राष्ट्रीय राजनीति में मजबूत बनाने में योगदान
प्रधानमंत्री मोदी ने भाजपा के विस्तार में आडवाणी की भूमिका का उल्लेख करते हुए कहा कि उनके राष्ट्रीय अध्यक्ष रहते देश की राजनीति में बड़े बदलाव हुए। उन्होंने 1989 के लोकसभा चुनाव का जिक्र किया, जब कांग्रेस की सीटों की संख्या 400 से घटकर 200 से नीचे आ गई थी। इसके बाद 1996 में भाजपा पहली बार लोकसभा में सबसे बड़ी पार्टी बनकर उभरी। प्रधानमंत्री के अनुसार, आडवाणी ने पार्टी कार्यकर्ताओं की अनेक पीढ़ियों को तैयार किया और राष्ट्र प्रथम के सिद्धांत पर संगठन की मजबूत नींव रखी।
अटल बिहारी वाजपेयी के साथ दशकों तक किया काम
प्रधानमंत्री ने आडवाणी और पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी के लंबे राजनीतिक संबंधों को भी याद किया। आडवाणी ने राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के प्रचारक के रूप में राजस्थान के विभिन्न क्षेत्रों में काम किया था। इसके बाद वे दिल्ली पहुंचे, जहां उन्हें अटल बिहारी वाजपेयी के साथ काम करने का अवसर मिला। दोनों नेताओं ने दशकों तक साथ काम किया और भारतीय राजनीति में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। प्रधानमंत्री मोदी ने बताया कि आडवाणी हमेशा अटल बिहारी वाजपेयी को अपना नेता और मार्गदर्शक मानते रहे।
1991 के चुनाव और गांधीनगर की यादें
प्रधानमंत्री मोदी ने वर्ष 1991 के लोकसभा चुनाव से जुड़ी स्मृतियों को भी साझा किया। उन्होंने बताया कि उस समय आडवाणी के दो लोकसभा सीटों से चुनाव लड़ने का निर्णय लिया गया था। इनमें एक सीट गांधीनगर की थी। आडवाणी का गुजरात से पुराना संबंध रहा है। विभाजन के बाद उनके पिता कच्छ में आकर बसे थे। इसके अलावा वर्ष 1976 में आपातकाल के दौरान आडवाणी गुजरात से राज्यसभा सांसद भी बने थे। प्रधानमंत्री ने गांधीनगर से चुनाव लड़ने को आडवाणी के लिए एक तरह की घर वापसी बताया।
रथयात्रा की यादों में खोए प्रधानमंत्री मोदी
प्रधानमंत्री मोदी ने सोमनाथ से अयोध्या तक निकाली गई आडवाणी की रथयात्रा को उनके राजनीतिक जीवन का ऐतिहासिक अध्याय बताया। उन्होंने लिखा कि उन्हें इस यात्रा की परिकल्पना, तैयारियों और आयोजन से जुड़ने का अवसर मिला था। रथयात्रा के शुभारंभ के समय सोमनाथ में उपस्थित रहने को उन्होंने अपने जीवन की अविस्मरणीय स्मृतियों में शामिल किया। प्रधानमंत्री ने बताया कि बिहार में आडवाणी की गिरफ्तारी उनके और पार्टी के अन्य कार्यकर्ताओं के लिए दुखद क्षण था। उन्होंने उस दौर को याद करते हुए लिखा कि आडवाणी की गिरफ्तारी के बाद गुजरात में भाजपा ने चिमनभाई पटेल की सरकार से समर्थन वापस ले लिया था। प्रधानमंत्री के अनुसार, उस समय पार्टी का संदेश था कि राम मंदिर निर्माण के संकल्प और अपनी विचारधारा पर कोई समझौता नहीं किया जाएगा।
राम मंदिर निर्माण का सपना साकार होने का जिक्र
प्रधानमंत्री मोदी ने अपने लेख में अयोध्या के राम मंदिर निर्माण का भी उल्लेख किया। उन्होंने बताया कि राम मंदिर आंदोलन के दौरान अनेक वरिष्ठ नेताओं और कार्यकर्ताओं ने मंदिर निर्माण के संकल्प को पूरा करने की शपथ ली थी। वर्षों के संघर्ष के बाद अयोध्या में भव्य राम मंदिर निर्माण के सपने के साकार होने को प्रधानमंत्री ने ऐतिहासिक उपलब्धि के रूप में याद किया। उन्होंने इस आंदोलन में आडवाणी की भूमिका को विशेष महत्व दिया।
आपातकाल के दौरान लोकतंत्र के लिए संघर्ष
प्रधानमंत्री ने वर्ष 1975 के आपातकाल को आडवाणी के जीवन का महत्वपूर्ण मोड़ बताया। उन्होंने कहा कि उस समय आडवाणी लोकतंत्र और संविधान की रक्षा के संघर्ष में अग्रिम पंक्ति में खड़े थे। प्रधानमंत्री ने उनकी पुस्तक 'ए प्रिजनर्स स्क्रैपबुक' का भी उल्लेख किया। इसमें आडवाणी ने आपातकाल के दौरान के अनुभवों को दर्ज किया है। मोदी ने पुस्तक के एक हिस्से 'ए टेल ऑफ टू इमरजेंसीज' का जिक्र करते हुए बताया कि इसमें भारत के आपातकाल और जर्मनी में हिटलर के शासनकाल की घटनाओं की तुलना की गई है।
गृह मंत्री और उप प्रधानमंत्री के रूप में योगदान
प्रधानमंत्री मोदी ने आडवाणी के प्रशासनिक जीवन की भी सराहना की। उन्होंने वर्ष 1977 में जनता पार्टी सरकार के दौरान सूचना एवं प्रसारण मंत्री के रूप में उनकी जिम्मेदारी का उल्लेख किया। इसके बाद गृह मंत्री और उप प्रधानमंत्री के रूप में आडवाणी की भूमिका को भी महत्वपूर्ण बताया। प्रधानमंत्री के अनुसार, देश की सुरक्षा व्यवस्था को मजबूत बनाने और सुरक्षा बलों के जीवन को बेहतर बनाने के लिए आडवाणी ने महत्वपूर्ण प्रयास किए। उन्होंने आतंकवाद के खिलाफ आडवाणी के दृढ़ रुख का भी उल्लेख किया।
किताबों, सिनेमा और इतिहास से रहा विशेष लगाव
प्रधानमंत्री ने आडवाणी के व्यक्तित्व के उन पहलुओं को भी सामने रखा, जो राजनीति से अलग हैं। उन्होंने बताया कि आडवाणी को पढ़ने का बहुत शौक रहा है। वे अखबारों को भी बेहद ध्यान और बारीकी से पढ़ते थे। सिनेमा और रंगमंच में उनकी विशेष रुचि रही है। लंबे समय तक वे फिल्मों की समीक्षा भी करते रहे। इतिहास को समझने और उसे सहेजने की उनकी रुचि का उल्लेख करते हुए प्रधानमंत्री ने उनकी पुस्तक 'माई कंट्री माई लाइफ' का जिक्र किया। प्रधानमंत्री ने आडवाणी की जीवन यात्रा में उनकी पत्नी कमला आडवाणी के योगदान को भी याद किया। उन्होंने कहा कि कमला आडवाणी लंबे सार्वजनिक जीवन में उनके लिए शक्ति और संबल बनी रहीं।
भारत रत्न से सम्मानित हो चुके हैं आडवाणी
प्रधानमंत्री मोदी ने आडवाणी की असाधारण जीवन यात्रा को याद करते हुए कहा कि कराची में पले-बढ़े इस नेता ने शायद ही कभी कल्पना की होगी कि उनका जीवन इतनी लंबी राजनीतिक यात्रा तय करेगा। देश के प्रति योगदान के लिए वर्ष 2024 में लालकृष्ण आडवाणी को भारत रत्न से सम्मानित किया गया था। प्रधानमंत्री ने इस सम्मान को उनके लंबे सार्वजनिक जीवन और योगदान से जोड़कर याद किया।
प्रधानमंत्री ने की उत्तम स्वास्थ्य की कामना
अपने लेख के अंत में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने आडवाणी के उत्तम स्वास्थ्य की कामना की। उन्होंने कहा कि आडवाणी का स्नेह, सानिध्य और मार्गदर्शन उनके जीवन में हमेशा महत्वपूर्ण रहा है। प्रधानमंत्री ने कामना की कि आडवाणी आगे भी सभी को प्रेरणा और मार्गदर्शन देते रहें। दीपावली के दिन आडवाणी के 99वें जन्मदिन पर प्रधानमंत्री का यह लेख उनके व्यक्तिगत संबंधों के साथ भारतीय राजनीति के कई महत्वपूर्ण अध्यायों को भी याद करता है।
(लेखक भारत के प्रधानमंत्री )