नई दिल्ली। दिल्ली पुलिस की क्राइम ब्रांच ने लंबे समय से फरार चल रहे पटना निवासी गैंगस्टर छोटू उर्फ प्रिंस को गिरफ्तार किया है। आरोपी को दिल्ली पुलिस के स्पेशल सेल में दर्ज आर्म्स एक्ट के एक मामले में पकड़ा गया है। पुलिस के अनुसार दिल्ली की एक अदालत ने वर्ष 2018 में उसे इस मामले में घोषित अपराधी यानी प्रोक्लेम्ड ऑफेंडर (PO) करार दिया था। इसके बाद से पुलिस लगातार उसकी तलाश कर रही थी।दिल्ली पुलिस के अधिकारियों के मुताबिक क्राइम ब्रांच की वेस्टर्न रेंज-II (WR-II) टीम ने 22 सितंबर को संयुक्त अभियान चलाकर छोटू को झारखंड की राजधानी रांची से गिरफ्तार किया। पुलिस को उसके रांची में मौजूद होने की सूचना मिली थी। इसके बाद टीम ने जानकारी की पुष्टि की और स्थानीय स्तर पर उसकी गतिविधियों पर नजर रखी। आरोपी की पहचान सुनिश्चित होने के बाद उसे पकड़ लिया गया।
पुलिस का दावा है कि आरोपी मूल रूप से बिहार के पटना का रहने वाला है और वह कथित तौर पर पिंकू चौधरी गैंग से जुड़ा रहा है। उसके खिलाफ बिहार में हत्या, डकैती और लूटपाट समेत 16 से अधिक आपराधिक मामले दर्ज होने की बात कही गई है। पुलिस अब उसके पुराने मामलों और अन्य आपराधिक गतिविधियों से जुड़े रिकॉर्ड की भी जांच कर रही है।मामले की शुरुआत दिल्ली पुलिस के स्पेशल सेल में दर्ज आर्म्स एक्ट के एक केस से जुड़ी है। इस मामले में आरोपी के अदालत की प्रक्रिया में शामिल नहीं होने के बाद उसे 2018 में घोषित अपराधी करार दिया गया था। किसी आरोपी को घोषित अपराधी घोषित किए जाने के बाद पुलिस उसकी गिरफ्तारी के लिए लगातार कार्रवाई कर सकती है और उसके संभावित ठिकानों की तलाश की जाती है।
पुलिस के अनुसार छोटू लंबे समय से अपनी पहचान और ठिकाने बदलकर गिरफ्तारी से बच रहा था। उसकी तलाश में दिल्ली पुलिस की विभिन्न टीमें जानकारी जुटा रही थीं। इस बीच क्राइम ब्रांच की WR-II टीम को आरोपी के झारखंड में छिपे होने से संबंधित जानकारी मिली। सूचना को विकसित करने के बाद रांची में ऑपरेशन की योजना तैयार की गई।22 सितंबर को संयुक्त कार्रवाई के दौरान टीम ने आरोपी को पकड़ लिया। गिरफ्तारी के बाद उसकी पहचान से संबंधित दस्तावेज और पुराने रिकॉर्ड का मिलान किया गया। इसके बाद दिल्ली में दर्ज मामले में आगे की कानूनी प्रक्रिया शुरू की गई।
पुलिस का कहना है कि छोटू का आपराधिक रिकॉर्ड बिहार में भी रहा है। उसके खिलाफ हत्या, लूट और डकैती जैसे गंभीर अपराधों से जुड़े मामलों में कथित संलिप्तता सामने आई है। हालांकि अलग-अलग मामलों में आरोपों की स्थिति और न्यायिक प्रक्रिया संबंधित अदालतों के रिकॉर्ड के आधार पर तय होगी।दिल्ली पुलिस अब यह भी पता लगाने का प्रयास कर रही है कि फरारी के दौरान आरोपी किन-किन शहरों में रहा और उसे किन लोगों ने शरण या दूसरी मदद उपलब्ध कराई। लंबे समय तक पुलिस से बचने के लिए उसने किन पहचान या ठिकानों का इस्तेमाल किया, इसकी जानकारी भी जुटाई जा रही है।
जांच एजेंसियों के लिए ऐसे घोषित अपराधियों को पकड़ना चुनौतीपूर्ण होता है जो लगातार एक राज्य से दूसरे राज्य में ठिकाने बदलते रहते हैं। ऐसे मामलों में स्थानीय पुलिस और दूसरी एजेंसियों के साथ समन्वय के अलावा तकनीकी निगरानी और स्थानीय सूचना तंत्र की मदद ली जाती है। छोटू की गिरफ्तारी के मामले में भी दिल्ली पुलिस ने संयुक्त अभियान के बाद उसे रांची से पकड़ा।पुलिस उसके कथित गैंग नेटवर्क के बारे में भी जानकारी जुटा रही है। अधिकारियों के अनुसार वह पिंकू चौधरी गैंग का सदस्य रहा है। ऐसे में यह जांच की जा सकती है कि गैंग के अन्य सदस्यों के साथ उसका हाल के वर्षों में संपर्क था या नहीं और फरारी के दौरान वह किसी आपराधिक गतिविधि में शामिल रहा या नहीं।
आरोपी के खिलाफ बिहार में बताए गए 16 से ज्यादा मामलों का विवरण भी संबंधित पुलिस इकाइयों से जुटाया जा सकता है। इससे यह पता चलेगा कि इनमें कितने मामले अदालत में लंबित हैं, किन मामलों में उसकी गिरफ्तारी या पेशी की जरूरत है और किन मामलों में पहले से कोई न्यायिक आदेश जारी है।दिल्ली में दर्ज आर्म्स एक्ट के मामले में उसकी गिरफ्तारी के बाद पुलिस उसे संबंधित अदालत के समक्ष पेश कर आगे की कानूनी प्रक्रिया पूरी करेगी। यदि बिहार या किसी अन्य राज्य की पुलिस को भी आरोपी की जरूरत है तो नियमानुसार संबंधित अदालत से अनुमति लेकर आगे की कार्रवाई की जा सकती है।
इस गिरफ्तारी को अंतरराज्यीय अपराधियों के खिलाफ दिल्ली पुलिस की कार्रवाई के तौर पर देखा जा रहा है। दिल्ली में मामला दर्ज होने के बावजूद आरोपी का संबंध बिहार से था और उसे झारखंड से गिरफ्तार किया गया। ऐसे मामलों में विभिन्न राज्यों की पुलिस के बीच सूचना साझा करना महत्वपूर्ण होता है।पुलिस यह भी जांच कर सकती है कि आरोपी रांची में कब से रह रहा था और वहां उसकी गतिविधियां क्या थीं। उसके संपर्क में रहने वाले लोगों के बारे में जानकारी मिलने पर उनसे भी पूछताछ की जा सकती है। हालांकि किसी अन्य व्यक्ति की भूमिका तभी तय होगी जब उसके खिलाफ ठोस साक्ष्य सामने आएंगे।
पुलिस रिकॉर्ड के अनुसार आर्म्स एक्ट के मामले में अदालत द्वारा 2018 में घोषित अपराधी करार दिए जाने के बाद छोटू की तलाश जारी थी। आखिरकार 22 सितंबर को क्राइम ब्रांच की वेस्टर्न रेंज-II टीम ने संयुक्त ऑपरेशन में उसे रांची से गिरफ्तार कर लिया।फिलहाल पुलिस आरोपी से जुड़े पुराने मामलों, उसके कथित गैंग नेटवर्क और फरारी के दौरान की गतिविधियों की जानकारी जुटा रही है। पटना निवासी छोटू उर्फ प्रिंस की गिरफ्तारी के बाद दिल्ली पुलिस अब उसके खिलाफ लंबित कानूनी प्रक्रियाओं को आगे बढ़ाने की तैयारी में है। पुलिस के मुताबिक आरोपी के खिलाफ सामने आए अन्य मामलों की जानकारी भी संबंधित राज्यों की पुलिस के साथ साझा की जाएगी।