नई दिल्ली। भारतीय वायुसेना के बहुराष्ट्रीय अभ्यास 'तरंग शक्ति 2026' के दूसरे संस्करण के दौरान ऑपरेशन सिंदूर अंतरराष्ट्रीय चर्चा का प्रमुख विषय बना। अभ्यास में हिस्सा लेने वाले विभिन्न देशों के प्रतिनिधियों ने भारतीय वायुसेना के इस अभियान और उससे जुड़े अनुभवों के बारे में जानने में गहरी दिलचस्पी दिखाई। यह जानकारी अभ्यास के निदेशक एयर वाइस मार्शल राज ठाकुर ने शनिवार को आयोजित एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में दी। उन्होंने बताया कि अभ्यास के दौरान विशेषज्ञों के बीच हुई बातचीत में ऑपरेशन सिंदूर पर विस्तार से चर्चा की गई और भारतीय वायुसेना ने इसमें अपनी भूमिका के बारे में जानकारी साझा की।एयर वाइस मार्शल राज ठाकुर ने कहा कि ऑपरेशन सिंदूर भारतीय वायुसेना के महत्वपूर्ण अभियानों में से एक रहा है। इस अभियान को लेकर विदेशी भागीदार देशों की उत्सुकता को देखते हुए विशेषज्ञों के साथ हुई बातचीत में भारत के अनुभव साझा किए गए। उन्होंने बताया कि इस जानकारी को भागीदार देशों के प्रतिनिधियों ने सकारात्मक रूप से लिया और इसकी सराहना की।
जोधपुर में आयोजित हो रहा बहुराष्ट्रीय हवाई अभ्यास
तरंग शक्ति 2026 का आयोजन राजस्थान के जोधपुर एयरफोर्स स्टेशन पर किया जा रहा है। यह अभ्यास 26 सितंबर से 12 अक्टूबर 2026 तक निर्धारित है।भारतीय वायुसेना की मेजबानी में आयोजित इस अभ्यास में सात मित्र देशों की वायुसेनाएं हिस्सा ले रही हैं। इनमें अमेरिका, ऑस्ट्रेलिया, फ्रांस, जर्मनी, संयुक्त अरब अमीरात, श्रीलंका और बांग्लादेश शामिल हैं। इसके अलावा 32 देशों के प्रतिनिधि पर्यवेक्षक के रूप में शामिल हुए हैं।इस अभ्यास का उद्देश्य विभिन्न देशों की वायुसेनाओं के बीच सहयोग बढ़ाना, संयुक्त अभियानों की तैयारी करना और एक-दूसरे के परिचालन अनुभवों से सीखना है।
ऑपरेशन सिंदूर को लेकर विदेशी देशों में उत्सुकता
प्रेस कॉन्फ्रेंस में एयर वाइस मार्शल राज ठाकुर से पूछा गया कि क्या अभ्यास के दौरान ऑपरेशन सिंदूर से मिले अनुभवों को विदेशी प्रतिनिधियों के साथ साझा किया गया।इस सवाल के जवाब में उन्होंने बताया कि भागीदार देशों के प्रतिनिधियों ने ऑपरेशन सिंदूर के बारे में जानने में काफी रुचि दिखाई।ठाकुर के अनुसार, विशेषज्ञों के बीच हुई बातचीत में भारतीय वायुसेना ने अभियान के दौरान अपनी भूमिका और परिचालन अनुभवों की जानकारी दी।उन्होंने कहा कि इस बातचीत को विदेशी प्रतिनिधियों ने सराहा।हालांकि, उन्होंने सार्वजनिक रूप से अभियान से जुड़ी किसी गोपनीय सैन्य रणनीति या तकनीकी जानकारी का विस्तृत विवरण नहीं दिया।
राज ठाकुर ने बताया भारतीय वायुसेना का अनुभव
एयर वाइस मार्शल राज ठाकुर ने ऑपरेशन सिंदूर को भारतीय वायुसेना के महत्वपूर्ण अभियानों में से एक बताया।उन्होंने कहा कि इस अभियान के प्रति भागीदार देशों में काफी दिलचस्पी थी।इसी वजह से विशेषज्ञों की बातचीत के दौरान भारतीय वायुसेना ने बताया कि ऑपरेशन सिंदूर में क्या हुआ था और उसमें उसकी क्या भूमिका रही।ठाकुर ने कहा कि भारतीय वायुसेना की ओर से साझा की गई जानकारी को अच्छी प्रतिक्रिया मिली।उनके बयान से स्पष्ट होता है कि तरंग शक्ति अभ्यास केवल लड़ाकू विमानों के संयुक्त प्रशिक्षण तक सीमित नहीं है, बल्कि वास्तविक अभियानों से प्राप्त अनुभवों को समझने का भी मंच है।
आधुनिक हवाई युद्ध की रणनीतियों पर चर्चा
तरंग शक्ति 2026 में आधुनिक हवाई युद्ध की चुनौतियों को ध्यान में रखते हुए विभिन्न प्रकार के प्रशिक्षण आयोजित किए जा रहे हैं।इसमें संयुक्त मिशन की योजना, हवाई सुरक्षा, लड़ाकू अभियानों, परिवहन और हवा में ईंधन भरने जैसी क्षमताओं पर ध्यान दिया जा रहा है।भारतीय वायुसेना के अनुसार, अभ्यास का उद्देश्य अलग-अलग देशों की वायुसेनाओं के बीच परिचालन तालमेल को बेहतर बनाना है।इस दौरान पायलटों, मिशन योजनाकारों और तकनीकी कर्मचारियों को एक-दूसरे की कार्यप्रणाली समझने का अवसर मिल रहा है।
आधुनिक लड़ाकू विमानों की भागीदारी
तरंग शक्ति 2026 में विभिन्न देशों के अत्याधुनिक लड़ाकू और सहायक विमान हिस्सा ले रहे हैंइनमें अमेरिका का एफ-35 लाइटनिंग-2, फ्रांस का राफेल और एफ-16 जैसे लड़ाकू विमान शामिल हैं।इसके अलावा ए400एम, सी-130, सी-130जे और हवा में ईंधन भरने वाले विमान भी अभ्यास का हिस्सा हैं।भारतीय वायुसेना की ओर से स्वदेशी तेजस लड़ाकू विमान और प्रचंड हल्के लड़ाकू हेलीकॉप्टर की क्षमताओं को भी प्रदर्शित किया जा रहा है।इन विमानों की भागीदारी से विभिन्न देशों को एक-दूसरे की हवाई क्षमताओं और परिचालन प्रक्रियाओं को समझने का अवसर मिल रहा है।
रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने भी किया संबोधित
शनिवार को रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने जोधपुर एयरफोर्स स्टेशन पर तरंग शक्ति 2026 में शामिल प्रतिनिधियों को संबोधित किया।उन्होंने रक्षा क्षेत्र में आत्मनिर्भरता, आधुनिक तकनीक और अंतरराष्ट्रीय सहयोग के महत्व पर जोर दिया।राजनाथ सिंह ने कहा कि भविष्य की सैन्य क्षमता केवल हथियारों और प्लेटफॉर्म पर निर्भर नहीं होगी, बल्कि सूचना प्राप्त करने, उसे समझने और तेजी से निर्णय लेने की क्षमता भी महत्वपूर्ण होगी।उन्होंने भागीदार देशों के बीच विश्वास और तकनीकी सहयोग को भविष्य के रक्षा संबंधों का महत्वपूर्ण आधार बताया।
ऑपरेशन सिंदूर से मिले अनुभवों का महत्व
रक्षा मंत्रालय ने भी तरंग शक्ति 2026 के संदर्भ में ऑपरेशन सिंदूर से मिले परिचालन अनुभवों के महत्व को रेखांकित किया है।मंत्रालय के अनुसार, इस अभियान ने हवाई शक्ति के प्रभावी इस्तेमाल, समन्वित योजना और परिचालन तैयारियों की अहमियत को सामने रखा।ऐसे अनुभव बहुराष्ट्रीय अभ्यासों में पेशेवर समझ बढ़ाने और आधुनिक युद्ध की चुनौतियों के लिए तैयार होने में उपयोगी हो सकते हैं।तरंग शक्ति जैसे अभ्यास में विभिन्न देशों की वायुसेनाएं अपनी प्रक्रियाओं की तुलना कर सकती हैं और संयुक्त अभियानों के दौरान बेहतर तालमेल विकसित कर सकती हैं।
अंतरराष्ट्रीय रक्षा सहयोग को मिलेगा बढ़ावा
तरंग शक्ति 2026 के दूसरे संस्करण का प्रमुख उद्देश्य भागीदार देशों के बीच रक्षा सहयोग को मजबूत करना है।इस अभ्यास के माध्यम से भारतीय वायुसेना अपनी परिचालन क्षमताओं और प्रशिक्षण प्रक्रियाओं को अंतरराष्ट्रीय भागीदारों के साथ साझा कर रही है।साथ ही विदेशी वायुसेनाओं के अनुभवों से सीखने का अवसर भी मिल रहा हैअभ्यास में पेशेवर चर्चाओं के अलावा औद्योगिक दौरे और सांस्कृतिक कार्यक्रम भी शामिल किए गए हैं।इन गतिविधियों का उद्देश्य भागीदार देशों के प्रतिनिधियों के बीच आपसी समझ और सहयोग बढ़ाना है।
भारतीय वायुसेना की क्षमताओं पर दुनिया की नजर
तरंग शक्ति 2026 में ऑपरेशन सिंदूर को लेकर विदेशी देशों की दिलचस्पी इस अभ्यास के महत्वपूर्ण पहलुओं में शामिल रही।एयर वाइस मार्शल राज ठाकुर के अनुसार, भारतीय वायुसेना ने विशेषज्ञों की बातचीत में अपने परिचालन अनुभव साझा किए, जिन्हें भागीदार देशों ने सराहा।अभ्यास के जरिए भारतीय वायुसेना को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अपनी क्षमताएं प्रदर्शित करने और अन्य देशों के अनुभवों से सीखने का अवसर मिला है।जोधपुर में आयोजित यह बहुराष्ट्रीय अभ्यास आधुनिक हवाई युद्ध, संयुक्त प्रशिक्षण और अंतरराष्ट्रीय रक्षा सहयोग की दिशा में महत्वपूर्ण पहल के रूप में सामने आया है।
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