नई दिल्ली : तृणमूल कांग्रेस (TMC) से अलग होकर नेशनलिस्ट सिटिजन्स पार्टी ऑफ इंडिया (NCPI) में शामिल हुए 20 लोकसभा सांसदों ने मंगलवार को पहली बार राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (NDA) संसदीय दल की बैठक में भाग लिया। इस बैठक के साथ ही इन सांसदों ने औपचारिक रूप से NDA की संसदीय गतिविधियों में हिस्सा लेना शुरू कर दिया है।
संसद भवन परिसर में आयोजित NDA संसदीय दल की बैठक में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, केंद्रीय मंत्रियों और गठबंधन में शामिल विभिन्न दलों के सांसद मौजूद रहे। बैठक में शामिल होकर NCPI के सांसदों ने NDA खेमे के साथ अपनी राजनीतिक भागीदारी का संकेत दिया।
ये सभी सांसद पहले तृणमूल कांग्रेस के सदस्य थे, लेकिन बाद में उन्होंने पार्टी से अलग होकर नई राजनीतिक पार्टी NCPI का गठन किया और NDA के साथ जुड़ने का फैसला किया। हालांकि, लोकसभा में उनकी स्थिति को लेकर अभी औपचारिक प्रक्रिया पूरी नहीं हुई है।
लोकसभा में NCPI को अलग राजनीतिक दल के रूप में मान्यता देने का फैसला अभी तक नहीं लिया गया है। बताया जा रहा है कि लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला इस मामले पर अंतिम निर्णय लेंगे। फिलहाल ये सांसद सदन में अलग-अलग बेंचों पर बैठ रहे हैं।
राजनीतिक जानकारों के अनुसार, NDA संसदीय दल की बैठक में इन सांसदों की मौजूदगी गठबंधन के लिए महत्वपूर्ण घटनाक्रम माना जा रहा है। इससे संसद में NDA की संख्या और राजनीतिक ताकत को लेकर नए समीकरण बन सकते हैं।
इस समूह के प्रमुख चेहरों में वरिष्ठ नेता सुदीप बंद्योपाध्याय का नाम शामिल है। उन्होंने हाल ही में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से मुलाकात की थी। इस मुलाकात के बाद ही राजनीतिक गलियारों में इन सांसदों के NDA के करीब आने की चर्चाएं तेज हो गई थीं।
NDA संसदीय दल की बैठकों में आमतौर पर गठबंधन की रणनीति, संसद की कार्यवाही और सरकार के एजेंडे से जुड़े मुद्दों पर चर्चा की जाती है। ऐसे में NCPI सांसदों का पहली बार शामिल होना राजनीतिक दृष्टि से काफी अहम माना जा रहा है।
TMC से अलग हुए इन सांसदों के फैसले ने पश्चिम बंगाल की राजनीति में भी हलचल पैदा की है। तृणमूल कांग्रेस लंबे समय से राज्य की प्रमुख राजनीतिक ताकत रही है और पार्टी से सांसदों का अलग होना एक बड़ा घटनाक्रम माना जा रहा है।
हालांकि, NCPI के गठन और NDA से जुड़ने की प्रक्रिया को लेकर अभी कई संवैधानिक और संसदीय औपचारिकताएं बाकी हैं। लोकसभा में किसी नए दल को मान्यता देने, सीटों की व्यवस्था और संसदीय पहचान से जुड़े फैसले स्पीकर के अधिकार क्षेत्र में आते हैं।
NDA के लिए इन सांसदों का समर्थन संसद में महत्वपूर्ण हो सकता है। केंद्र सरकार कई विधायी कार्यों और नीतिगत मुद्दों पर गठबंधन सहयोगियों के समर्थन पर निर्भर रहती है। ऐसे में नए सहयोगियों का जुड़ना सरकार के लिए राजनीतिक रूप से फायदेमंद माना जा रहा है।
वहीं, विपक्षी दल इस घटनाक्रम को अलग नजरिए से देख रहे हैं। उनका कहना है कि राजनीतिक दलों में बदलाव लोकतांत्रिक प्रक्रिया का हिस्सा है, लेकिन सांसदों की स्थिति और दल बदल से जुड़े नियमों का पालन होना चाहिए।
दल बदल कानून के तहत सांसदों के पार्टी बदलने और उनकी सदस्यता से जुड़े मामलों में कई नियम लागू होते हैं। ऐसे मामलों में स्पीकर की भूमिका महत्वपूर्ण होती है और अंतिम निर्णय संसदीय प्रक्रिया के अनुसार लिया जाता है।
फिलहाल NCPI में शामिल हुए 20 सांसद NDA संसदीय दल की बैठकों में हिस्सा लेना शुरू कर चुके हैं, लेकिन लोकसभा में उनकी आधिकारिक स्थिति को लेकर फैसला बाकी है। आने वाले दिनों में स्पीकर के निर्णय और संसदीय प्रक्रिया पर सभी की नजरें रहेंगी।
इस घटनाक्रम से राष्ट्रीय राजनीति में नए समीकरण बनने की संभावना जताई जा रही है। NDA में इन सांसदों की भागीदारी से जहां गठबंधन की संख्या मजबूत हो सकती है, वहीं TMC के लिए यह राजनीतिक चुनौती के रूप में देखा जा रहा है।