दिल्ली के मंगोलपुरी में आग का कहर जूता फैक्ट्री में चार की मौत
मंगोलपुरी की जूता फैक्ट्री में भीषण आग
नई दिल्ली: राजधानी दिल्ली के मंगोलपुरी औद्योगिक क्षेत्र में शुक्रवार रात जूते बनाने वाली एक फैक्ट्री में भीषण आग लगने से चार लोगों की मौत हो गई। हादसे में दो अन्य लोग घायल हुए हैं, जिनकी हालत गंभीर बताई गई है। बचाव दल ने फैक्ट्री के भीतर से छह लोगों को बेहोशी की हालत में बाहर निकाला और संजय गांधी मेमोरियल अस्पताल पहुंचाया। अस्पताल में चिकित्सकों ने चार लोगों को मृत घोषित कर दिया, जबकि दो अन्य का उपचार जारी है। घटना ने औद्योगिक इकाइयों में काम करने वाले लोगों की सुरक्षा को लेकर एक बार फिर चिंता बढ़ा दी है।
हादसा 30 अक्टूबर की रात करीब साढ़े नौ बजे मंगोलपुरी औद्योगिक क्षेत्र फेज-एक के बी-293/294 स्थित परिसर में हुआ। दिल्ली अग्निशमन सेवा को रात लगभग 9 बजकर 32 मिनट पर आग लगने की सूचना मिली। इसके बाद दमकल की 20 गाड़ियों को मौके पर भेजा गया। पुलिस और अग्निशमन विभाग की टीमों ने मिलकर आग बुझाने तथा भीतर मौजूद लोगों को बाहर निकालने का अभियान शुरू किया।
आग लगने के बाद फैक्ट्री में बड़ी मात्रा में धुआं भर गया था। दमकल अधिकारी एडीओ पारस कुमार के मुताबिक, आग की शुरुआत बेसमेंट से हुई थी। अग्निशमन कर्मियों ने आग को बेसमेंट तक सीमित रखा, लेकिन इमारत के भीतर फैला धुआं बचाव कार्य के दौरान बड़ी चुनौती बना। इस घटना में ऊपरी मंजिलों पर मौजूद लोगों को भी बाहर निकालना पड़ा।
अधिकारी ने बताया कि बचाव अभियान के दौरान एक व्यक्ति तीसरी मंजिल की सीढ़ियों के पास मिला, जबकि पांच अन्य लोगों को चौथी मंजिल से निकाला गया। सभी छह लोग बेहोशी की हालत में थे। उन्हें तुरंत अस्पताल भेजा गया। यह जानकारी हादसे की गंभीरता को सामने लाती है कि आग बेसमेंट में होने के बावजूद ऊपर मौजूद लोगों को भी बचाव दल की सहायता की जरूरत पड़ी। हालांकि, प्रत्येक व्यक्ति की मौत का चिकित्सकीय कारण अभी स्पष्ट नहीं है।
संजय गांधी मेमोरियल अस्पताल पहुंचाए गए छह लोगों में से चार की मौत की पुष्टि हुई। अन्य दो लोगों का इलाज चल रहा है। शुरुआती समाचार रिपोर्टों में दोनों की हालत गंभीर बताई गई है। घायलों की स्वास्थ्य स्थिति को लेकर विस्तृत चिकित्सकीय जानकारी सामने नहीं आई है, इसलिए उनकी चोटों की प्रकृति अथवा आगे के उपचार के बारे में फिलहाल कोई निश्चित निष्कर्ष नहीं निकाला जा सकता। बाहरी जिले के पुलिस उपायुक्त विक्रम सिंह के अनुसार, सूचना मिलने के बाद पुलिस टीम मौके पर पहुंची और दमकल विभाग के साथ समन्वय बनाकर बचाव कार्य किया गया। पुलिस ने घटनास्थल के आसपास बैरिकेडिंग भी की, ताकि आम लोग जोखिम वाले हिस्से में न पहुंचें और आपातकालीन सेवाओं की आवाजाही प्रभावित न हो। बचावकर्मियों को काम करने के लिए रास्ता उपलब्ध कराना अभियान का महत्वपूर्ण हिस्सा रहा। अग्निशमन अधिकारी के हवाले से सामने आई बाद की जानकारी के मुताबिक, आग पर पूरी तरह काबू पा लिया गया था और परिसर में कूलिंग की प्रक्रिया चल रही थी। इससे पहले की रिपोर्टों में तलाशी तथा बचाव अभियान जारी होने की जानकारी दी गई थी। अलग-अलग समय पर आए इन अपडेट के बीच चार लोगों की मौत और दो लोगों के अस्पताल में भर्ती होने की पुष्टि हुई है। पुलिस हादसे के समय फैक्ट्री में मौजूद लोगों की संख्या का भी पता लगा रही है। रिपोर्ट के अनुसार, फैक्ट्री मालिक को पूछताछ के लिए बुलाया गया है। ठेकेदार और कर्मचारियों से भी जानकारी जुटाई जा रही है। इसका उद्देश्य यह स्पष्ट करना है कि घटना के समय परिसर में कितने लोग थे और उनकी मौजूदगी किस हिस्से में थी। पूछताछ के आधार पर घटनाक्रम की तस्वीर अधिक स्पष्ट हो सकेगी।
आग लगने की वास्तविक वजह अभी सामने नहीं आई है। उपलब्ध जानकारी के आधार पर शॉर्ट सर्किट, किसी मशीन की खराबी अथवा अन्य कारण को जिम्मेदार ठहराना जल्दबाजी होगी। पुलिस ने मामले में कानून के मुताबिक कार्रवाई किए जाने की बात कही है। आग की शुरुआत कैसे हुई और वह किन परिस्थितियों में जानलेवा बनी, इन सवालों का जवाब जांच के बाद ही मिल सकेगा।
फैक्ट्री में अग्निशमन के पर्याप्त इंतजाम थे या नहीं, इसे लेकर भी स्थिति स्पष्ट होनी बाकी है। अभी किसी अधिकारी की ओर से ऐसा अंतिम निष्कर्ष सामने नहीं आया है कि परिसर में कौन-सा सुरक्षा नियम टूटा था। इसलिए किसी व्यक्ति या विभाग की लापरवाही को स्थापित तथ्य के रूप में प्रस्तुत नहीं किया जा सकता। इस संबंध में जांच के निष्कर्ष महत्वपूर्ण होंगे। चार लोगों की मौत वाला यह हादसा औद्योगिक इमारतों में सुरक्षित निकासी और धुएं से बचाव की व्यवस्था की अहमियत सामने लाता है। फिलहाल प्राथमिक तथ्य यही हैं कि बेसमेंट में लगी आग के बाद इमारत से छह लोग बेहोश निकाले गए और उनमें चार को बचाया नहीं जा सका। मृतकों की पहचान, हादसे की वजह और सुरक्षा इंतजामों पर विस्तृत आधिकारिक जानकारी आने के बाद ही जिम्मेदारी की स्थिति स्पष्ट होगी।