New Delhi नई दिल्ली: दिल्ली के पूर्व उपमुख्यमंत्री मनीष सिसोदिया ने उन खबरों का जोरदार खंडन किया है, जिसमें दावा किया गया है कि उपराज्यपाल (एलजी) वीके सक्सेना ने कथित शराब नीति घोटाले के सिलसिले में आप के राष्ट्रीय संयोजक और पूर्व मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल के खिलाफ मुकदमा चलाने की मंजूरी दी है। संडे शनिवार को एक पोस्ट में सिसोदिया ने लिखा, "अगर एलजी सक्सेना ने अरविंद केजरीवाल के खिलाफ मुकदमा चलाने की अनुमति दी है, तो ईडी उस अनुमति की कॉपी क्यों नहीं दिखा रहा है? यह स्पष्ट है कि यह खबर झूठी और भ्रामक है। बाबासाहेब अंबेडकर के अपमान के मुद्दे से ध्यान हटाने के लिए खोखले दावे करना बंद करें। दिखाएं कि मुकदमा चलाने की मंजूरी कहां है।" इससे पहले, सूत्रों ने बताया कि एलजी सक्सेना ने शराब नीति मामले के सिलसिले में धन शोधन निवारण अधिनियम (पीएमएलए) के तहत केजरीवाल पर मुकदमा चलाने के प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) के अनुरोध को मंजूरी दे दी है।
कथित शराब नीति घोटाला केजरीवाल के नेतृत्व वाली आप सरकार के खिलाफ विपक्षी भाजपा द्वारा लगाए गए सबसे बड़े आरोपों में से एक है। जबकि केजरीवाल के खिलाफ पीएमएलए का मामला पहले ही दर्ज किया जा चुका है, लेकिन अभी तक मुकदमा शुरू नहीं हुआ है। ऐसे मामलों में सरकारी अधिकारियों पर मुकदमा चलाने के लिए एलजी की मंजूरी अनिवार्य करने के सुप्रीम कोर्ट के निर्देश के बाद, ईडी ने कथित तौर पर मुख्य सचिव के माध्यम से अनुमति मांगी। मार्च में, ईडी ने घोटाले से संबंधित कथित मनी लॉन्ड्रिंग के मामले में केजरीवाल को गिरफ्तार किया था। महीनों हिरासत में रहने के बाद सितंबर में उन्हें जमानत पर रिहा किया गया था। अपनी रिहाई के बाद, केजरीवाल ने दिल्ली के मुख्यमंत्री पद से इस्तीफा दे दिया और 2025 के विधानसभा चुनाव जीतने के बाद ही पद पर लौटने की कसम खाई।
सिसोदिया, जिन्हें शराब नीति मामले में कानूनी परेशानियों का भी सामना करना पड़ा है, को 18 महीने की कैद के बाद अगस्त में जमानत दी गई थी। अदालत ने अपने फैसले में उनके त्वरित सुनवाई के अधिकार का हवाला दिया। ईडी ने आरोप लगाया था कि केजरीवाल और सिसोदिया ने 100 करोड़ रुपये की रिश्वत के बदले में ‘दक्षिण लॉबी’ की मदद करने के लिए आबकारी नीति 2021-22 में बदलाव किए। ईडी के सूत्रों ने दावा किया कि इसमें से AAP ने गोवा चुनाव में प्रचार के लिए 45 करोड़ रुपये का इस्तेमाल किया। इस बीच केजरीवाल ने दिल्ली उच्च न्यायालय में आरोपपत्र रद्द करने की अपील की, जिसके बाद शुक्रवार को ईडी को नोटिस जारी किया गया।
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