Delhi दिल्ली चिड़ियाघर के एंट्री गेट पर बड़ा बदलाव होने वाला है। केंद्रीय पर्यावरण मंत्रालय ने विज़िटर एंट्री एरिया को फिर से बनाने के लिए लगभग 58 करोड़ रुपये का टेंडर निकाला है। इस प्रोजेक्ट में गाड़ियों के लिए नया ड्रॉप-ऑफ ज़ोन, सरफेस पार्किंग, एंट्री गेट, पैदल चलने वालों के लिए रास्ते, विज़िटर सेंटर और ओपन-एयर कैफेटेरिया बनाना शामिल है। एंट्री एरिया के बाहरी हिस्से में हरियाली और नए रास्ते भी बनाए जाएंगे।
टेंडर 20 अगस्त को जारी किया गया था। हालांकि, मीटिंग की कार्यवाही के अनुसार, प्री-टेंडर मीटिंग में कोई एजेंसी शामिल नहीं हुई और ईमेल के ज़रिए भी कोई सवाल नहीं पूछा गया। इसलिए, टेंडर की शर्तें वैसी ही रहेंगी। चुनी गई एजेंसी को काम पूरा करने के लिए 15 महीने का समय मिलेगा। एंट्री एरिया का यह प्रोजेक्ट लगभग 400 करोड़ रुपये के बड़े आधुनिकीकरण कार्यक्रम का हिस्सा है। चिड़ियाघर को चार साल में अलग-अलग चरणों में फिर से विकसित करने की योजना है, जिसमें जानवरों के रहने की जगहों को बेहतर बनाने और लोगों के लिए घूमना आसान बनाने पर ध्यान दिया जाएगा।
चिड़ियाघर के अंदर आधुनिकीकरण के काम के लिए पहले ही एक एजेंसी चुनी जा चुकी है। जानवरों के बाड़े फिर से बनाए जाएंगे और जहां ज़रूरत होगी, मौजूदा बाड़ों को बेहतर बनाया जाएगा। योजनाओं में जानवरों का खाना तैयार करने की जगहों के अलावा एक आधुनिक अस्पताल, दाह-संस्कार की नई सुविधा और पोस्टमार्टम सेंटर भी शामिल हैं। एक सेंट्रल प्लाज़ा, एक आधुनिक इंटरप्रिटेशन सेंटर और भैरों मंदिर की तरफ से एक और एंट्री गेट बनाने की भी योजना है। जहां भी संभव होगा, नए जलाशय बनाए जाएंगे और मौजूदा जलाशयों को ठीक किया जाएगा। ज़्यादा रास्ते और हरियाली वाले इलाके भी इस योजना का हिस्सा हैं।
1959 में बने इस चिड़ियाघर में अभी लगभग 95 प्रजातियां हैं। इसके आधुनिकीकरण का मकसद जानवरों के रहने की जगहों को प्राकृतिक माहौल के करीब लाना है, साथ ही विज़िटर्स को वाइल्डलाइफ़ को करीब से दिखाने के लिए सुरक्षित देखने की व्यवस्था (जैसे ग्लास वाले बाड़े) बनाने की योजना है। छात्रों के लिए शैक्षिक सुविधाएं और इंटरप्रिटेशन सेंटर भी इस बड़े पुनर्विकास का हिस्सा होंगे।