नई दिल्ली: राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली में सर्दियों के दौरान बढ़ने वाले प्रदूषण को नियंत्रित करने के लिए सरकार ने कई बड़े कदमों की घोषणा की है। वायु गुणवत्ता में गिरावट को रोकने के लिए निर्माण गतिविधियों, वाहनों, निजी परिवहन और प्रदूषण फैलाने वाले अन्य स्रोतों पर निगरानी बढ़ाई जाएगी।
दिल्ली के पर्यावरण मंत्री मंजिंदर सिंह सिरसा ने सोमवार को प्रदूषण नियंत्रण के लिए उठाए जाने वाले उपायों की जानकारी दी। उन्होंने बताया कि सर्दियों में प्रदूषण की समस्या को देखते हुए पहले से ही तैयारियां शुरू कर दी गई हैं।
1 नवंबर से निर्माण गतिविधियों पर रोक
पर्यावरण मंत्री के अनुसार, राजधानी में धूल प्रदूषण को कम करने के लिए 1 नवंबर से 31 जनवरी तक धूल उड़ाने वाली तोड़-फोड़ और बाहरी सिविल कंस्ट्रक्शन गतिविधियों पर रोक लगाई जाएगी।
सर्दियों के दौरान निर्माण कार्यों से निकलने वाली धूल हवा की गुणवत्ता को प्रभावित करती है। इसे देखते हुए प्रशासन ने निर्माण और डिमोलिशन गतिविधियों पर सख्ती बढ़ाने का फैसला किया है।
उन्होंने कहा कि प्रदूषण नियंत्रण के लिए नियमों का पालन सुनिश्चित कराया जाएगा और उल्लंघन करने वालों पर कार्रवाई की जाएगी।
निर्माण स्थलों पर होगी निगरानी
दिल्ली में निर्माण स्थलों पर धूल नियंत्रण के उपायों को लेकर भी सख्ती बरती जाएगी।
निर्माण कंपनियों और एजेंसियों को धूल रोकने के लिए निर्धारित नियमों का पालन करना होगा। पानी का छिड़काव, निर्माण सामग्री को ढककर रखना और अन्य प्रदूषण नियंत्रण उपायों को लागू करना जरूरी होगा।
वाहनों से होने वाले प्रदूषण पर भी फोकस
प्रदूषण नियंत्रण अभियान के तहत वाहनों से निकलने वाले धुएं पर भी नजर रखी जाएगी।
सरकार ने वाहनों के प्रदूषण प्रमाणपत्र (PUC) को लेकर नियमों को और सख्त करने की तैयारी की है। बिना वैध PUC प्रमाणपत्र वाले वाहनों पर कार्रवाई की जाएगी।
फ्यूल स्टेशन पर भी PUC से जुड़े नियमों का पालन सुनिश्चित करने पर जोर दिया जाएगा।
निजी परिवहन पर भी बढ़ेगी सख्ती
सर्दियों में प्रदूषण का स्तर बढ़ने पर निजी वाहनों की संख्या और यातायात दबाव भी एक बड़ी चुनौती बन जाता है।
इसी को देखते हुए निजी परिवहन को लेकर भी कुछ नियंत्रणात्मक कदम उठाने की योजना बनाई गई है।
सरकार का उद्देश्य है कि सड़कों पर प्रदूषण फैलाने वाले वाहनों की संख्या कम की जा सके और सार्वजनिक परिवहन को बढ़ावा मिले।
ऑफिस समय में बदलाव की तैयारी
प्रदूषण और यातायात दबाव को कम करने के लिए कार्यालयों के समय में बदलाव जैसे उपायों पर भी विचार किया जा रहा है।
अलग-अलग समय पर कार्यालय खुलने और बंद होने से सड़क पर वाहनों का दबाव कम करने में मदद मिल सकती है।
सर्दियों में बढ़ जाती है प्रदूषण की समस्या
दिल्ली में हर साल सर्दियों के महीनों में वायु प्रदूषण गंभीर स्तर तक पहुंच जाता है।
कम तापमान, हवा की धीमी गति, पराली का धुआं, वाहनों से निकलने वाला उत्सर्जन और निर्माण गतिविधियां प्रदूषण बढ़ाने वाले प्रमुख कारणों में शामिल हैं।
इसी वजह से सरकार सर्दियों से पहले प्रदूषण नियंत्रण योजना तैयार करती है।
प्रदूषण नियंत्रण के लिए संयुक्त प्रयास
पर्यावरण मंत्री ने कहा कि प्रदूषण की समस्या से निपटने के लिए सभी विभागों को मिलकर काम करना होगा।
नगर निगम, परिवहन विभाग, ट्रैफिक पुलिस और अन्य संबंधित एजेंसियों को नियमों के पालन की जिम्मेदारी दी जाएगी।
लोगों से सहयोग की अपील
सरकार ने आम लोगों से भी प्रदूषण नियंत्रण अभियान में सहयोग करने की अपील की है।
लोगों से अपील की गई है कि वे निजी वाहनों का कम इस्तेमाल करें, सार्वजनिक परिवहन को प्राथमिकता दें और प्रदूषण फैलाने वाली गतिविधियों से बचें।
नियम तोड़ने वालों पर होगी कार्रवाई
प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि प्रदूषण नियंत्रण से जुड़े नियमों का उल्लंघन करने वालों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी।
निर्माण स्थलों, वाहनों और अन्य प्रदूषण स्रोतों की निगरानी बढ़ाई जाएगी।
दिल्ली सरकार का कहना है कि सर्दियों में प्रदूषण की स्थिति को नियंत्रित करने के लिए समय रहते कदम उठाए जा रहे हैं। निर्माण कार्यों पर रोक, वाहनों की जांच और अन्य उपायों के जरिए राजधानी की हवा को बेहतर बनाने का प्रयास किया जाएगा।