Delhi दिल्ली हाई कोर्ट ने बुधवार को दिल्ली यूनिवर्सिटी से उस कथित उल्लंघन पर जवाब मांगा, जिसमें DUSU (दिल्ली यूनिवर्सिटी स्टूडेंट्स यूनियन) के नतीजे घोषित होने के बाद जीत का जुलूस निकालने पर रोक लगाने वाले कोर्ट के आदेश को नहीं माना गया। चीफ जस्टिस देवेंद्र कुमार उपाध्याय और जस्टिस तेजस करिया की बेंच ने यूनिवर्सिटी को नोटिस जारी किया। यह नोटिस DU और उन उम्मीदवारों के खिलाफ कोर्ट की अवमानना ​​की कार्रवाई की मांग वाली अर्जी पर जारी किया गया, जिसमें आरोप लगाया गया था कि हालिया DUSU चुनाव जीतने वाले उम्मीदवारों ने कोर्ट के आदेश के बावजूद जीत का जुलूस निकाला।
बेंच ने कहा कि वह इस मामले में बहुत सख्त रुख अपनाएगी और कहा, "ऐसा नहीं होना चाहिए। यह बिल्कुल भी ठीक नहीं है।" 18 सितंबर को वोटिंग के दिन, हाई कोर्ट ने निर्देश दिया था कि नतीजे घोषित होने के बाद उम्मीदवार, छात्र, समर्थक या कोई भी अन्य व्यक्ति जीत का जुलूस न निकाले।
बुधवार को सुनवाई के दौरान, बेंच ने गौर किया कि चुनाव लड़ने वाले सभी उम्मीदवारों को, जिनमें जीतने वाले भी शामिल हैं, पिछले आदेश के अनुसार पहले ही कारण बताओ नोटिस जारी किए जा चुके हैं। बेंच ने याचिकाकर्ता, वकील प्रशांत मनचंदा को निर्देश दिया कि वे उस डॉसियर में सभी सामग्री शामिल करें जिसे तैयार किया जाना है और उसे कोर्ट के सामने दाखिल करें। हालांकि, नोटिस जारी करते हुए बेंच ने कहा कि "इस साल कुछ कामयाबी मिली है क्योंकि DUSU चुनावों के दौरान संपत्ति को कोई नुकसान नहीं पहुंचाया गया, लेकिन अभी भी बहुत कुछ किया जाना बाकी है।"
एक उम्मीदवार के वकील ने कहा कि चुनाव जीतने पर कुछ भावनाएं बेकाबू हो जाती हैं और इस साल तो 'ढोल' भी नहीं आए थे। इस पर बेंच ने कहा, "ढोल तो फिर भी ठीक थे और उनसे कोई दिक्कत नहीं होती।" बेंच ने कहा, "दिक्कत कुछ और है। दिक्कत ताकत और पैसे के दिखावे की है। चिंता की बात यही है।" कोर्ट ने यह आदेश 18 सितंबर को DUSU चुनावों के दौरान लिंगदोह समिति की सिफारिशों के कथित उल्लंघन से जुड़ी एक याचिका पर सुनवाई करते हुए दिया था। बेंच ने छात्र संगठनों और उम्मीदवारों से यह भी पूछा था कि सिफारिशों का उल्लंघन करने के लिए उन पर चुनावी जुर्माना क्यों न लगाया जाए। उसने चेतावनी दी थी कि अगर अधिकारी "अनियंत्रित व्यवहार" के लिए संतोषजनक कार्रवाई नहीं करते हैं तो वोटों की गिनती और नतीजों की घोषणा पर रोक लगा दी जाएगी। यह अर्जी मनचंदा ने DUSU चुनावों से जुड़ी अपनी लंबित याचिका में दाखिल की थी।
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