NEW DELHI नई दिल्ली: दिल्ली सरकार कार्यस्थल पर महिलाओं के यौन उत्पीड़न अधिनियम, 2013 के समुचित कार्यान्वयन को सुनिश्चित करने के लिए आंतरिक शिकायत समितियों (आईसीसी) के गठन पर आँकड़े एकत्र करने हेतु सभी सार्वजनिक और निजी संगठनों का सर्वेक्षण कर रही है। यह कदम सर्वोच्च न्यायालय के हाल ही में दिए गए उस आदेश के बाद उठाया गया है जिसमें सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को अधिनियम के प्रावधानों का कड़ाई से पालन करने का निर्देश दिया गया है। अधिनियम के प्रावधानों का उद्देश्य कार्यस्थल पर यौन उत्पीड़न की शिकार महिलाओं के लिए एक सुरक्षित कार्यस्थल सुनिश्चित करना और निवारण तंत्र तक आसान पहुँच प्रदान करना है। अधिनियम की धारा 4 में प्रावधान है कि 10 या अधिक कर्मचारियों को नियुक्त करने वाले प्रत्येक नियोक्ता को अनिवार्य रूप से एक आंतरिक शिकायत समिति (आईसीसी) का गठन करना होगा।
सर्वोच्च न्यायालय ने इस वर्ष अगस्त में एक मामले की सुनवाई करते हुए कुछ निर्देश पारित किए थे, जिनमें संबंधित जिला अधिकारियों द्वारा आईसीसी वाले ऐसे संगठनों या प्रतिष्ठानों का सर्वेक्षण और श्रम आयुक्तों की सहायता शामिल है। दिल्ली सरकार के एक अधिकारी ने बताया कि दिल्ली सरकार के महिला एवं बाल विकास विभाग ने एक पत्र में कहा है कि सभी जिलों के श्रम विभाग कार्यालयों और औद्योगिक सुरक्षा एवं स्वास्थ्य निदेशालय द्वारा संबंधित जिलाधिकारियों के साथ संगठनों का डेटा साझा किया जाएगा। सर्वोच्च न्यायालय के आदेश का तत्काल अनुपालन करने का निर्देश दिया गया है।
जिलाधिकारियों को उक्त अधिनियम की धारा 5 के तहत जिला अधिकारी के रूप में नियुक्त किया गया है और अधिनियम के विभिन्न प्रावधानों के प्रभावी कार्यान्वयन की समग्र जिम्मेदारी उनकी है। अधिकारी ने बताया कि न्यायालय ने कई निर्देश जारी किए हैं, जिनमें प्रत्येक जिले में सार्वजनिक और निजी दोनों क्षेत्रों के उन संगठनों की संख्या पूछी गई है, जिन्होंने पहले ही आंतरिक शिकायत समितियों का गठन कर लिया है। न्यायालय ने प्रत्येक राज्य के मुख्य श्रम आयुक्त को यह सुनिश्चित करने का निर्देश दिया है कि प्रत्येक जिले में श्रम आयुक्त द्वारा प्रासंगिक डेटा एकत्र किया जाए, ताकि जिला अधिकारी इसे मुख्य सचिवों को भेज सकें, जो फिर डेटा को न्यायालय के समक्ष प्रस्तुत कर सकें।