नई दिल्ली। भारत के घरेलू रक्षा निर्माण क्षेत्र की बढ़ती ताकत के बीच रक्षा सचिव राजेश कुमार सिंह ने स्वदेशी ‘आकाश’ सरफेस-टू-एयर मिसाइल सिस्टम की तारीफ की है। उन्होंने इसे भारत की रक्षा तकनीक और सैन्य उत्पादन में आत्मनिर्भरता की दिशा में हासिल की गई प्रमुख सफलताओं में से एक बताया। रक्षा सचिव के मुताबिक आकाश मिसाइल सिस्टम अब स्थिर उत्पादन के चरण में पहुंच चुका है और इसे भारतीय सशस्त्र बलों के मजबूत ऑर्डर के साथ अंतरराष्ट्रीय रक्षा बाजार में भी पहचान मिल रही है।
भारत के रक्षा निर्यात और स्वदेशी हथियार निर्माण की प्रगति पर बात करते हुए राजेश कुमार सिंह ने कहा कि आकाश देश की सफल स्वदेशी रक्षा परियोजनाओं का महत्वपूर्ण उदाहरण है। उन्होंने कहा, “मैं कहूंगा कि आकाश हमारी सफलता की कहानियों में से एक है। यह हमारे स्वदेशी मिसाइल डिजाइन और उत्पादन सिस्टम की परिपक्वता को दर्शाता है।”
रक्षा सचिव ने कहा कि आकाश मिसाइल सिस्टम तेज गति से आने वाले हवाई लक्ष्यों से निपटने में प्रभावी है। यह सिस्टम भारतीय रक्षा अनुसंधान, विकास और उत्पादन क्षमताओं के उस बदलाव को दिखाता है, जिसमें देश अब जटिल रक्षा प्रणालियों को घरेलू स्तर पर डिजाइन करने से लेकर बड़े पैमाने पर तैयार करने तक की क्षमता विकसित कर चुका है।
आकाश एक स्वदेशी सरफेस-टू-एयर मिसाइल एयर डिफेंस सिस्टम है। इसे रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन यानी DRDO ने विकसित किया है। इसके उत्पादन में भारत डायनेमिक्स लिमिटेड, भारत इलेक्ट्रॉनिक्स लिमिटेड और दूसरे भारतीय औद्योगिक साझेदार महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। भारतीय सेना और भारतीय वायुसेना में इस मिसाइल सिस्टम को पहले ही शामिल किया जा चुका है। रक्षा मंत्रालय ने फरवरी 2026 में भारतीय सेना के तीसरे और चौथे आकाश रेजिमेंट के कॉम्बैट सिस्टम को भी रवाना किया था।
आकाश प्रणाली का उद्देश्य लड़ाकू विमानों, ड्रोन और दूसरे हवाई खतरों के खिलाफ सुरक्षा प्रदान करना है। इसके अलग-अलग संस्करणों पर लगातार काम किया गया है। स्वदेशी मिसाइल विकास में मिले अनुभव का इस्तेमाल आकाश प्राइम और नई पीढ़ी के आकाश-NG जैसी प्रणालियों को विकसित करने में भी किया गया है।
सरकार लगातार देश में मिसाइल सिस्टम के उत्पादन का दायरा बढ़ाने पर जोर दे रही है। अगस्त 2026 में रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने DRDO द्वारा विकसित पारंपरिक मिसाइल प्रणालियों की तकनीक भारतीय रक्षा उद्योग को ट्रांसफर करने की मंजूरी दी थी। इसका उद्देश्य घरेलू कंपनियों को रक्षा उत्पादन में ज्यादा भागीदारी देना, आयात पर निर्भरता कम करना और भारत में विकसित तकनीक को बड़े पैमाने पर उत्पादन तक पहुंचाना है।
आकाश सिस्टम में भी स्वदेशीकरण का स्तर लगातार बढ़ाया गया है। रक्षा मंत्रालय के अनुसार भारतीय सेना के लिए बेहतर आकाश वेपन सिस्टम की खरीद को लेकर भारत डायनेमिक्स लिमिटेड के साथ 8,160 करोड़ रुपये से अधिक का अनुबंध किया गया था। इस सिस्टम में मिसाइल, लॉन्चर, ग्राउंड सपोर्ट उपकरण, वाहन और संबंधित इंफ्रास्ट्रक्चर शामिल हैं।
रक्षा सचिव की टिप्पणी ऐसे समय सामने आई है जब भारत का कुल रक्षा उत्पादन और निर्यात तेजी से बढ़ रहा है। सरकारी आंकड़ों के अनुसार वित्त वर्ष 2025-26 में देश का रक्षा उत्पादन करीब 1.78 लाख करोड़ रुपये तक पहुंच गया। इसी अवधि में रक्षा निर्यात रिकॉर्ड 38,424 करोड़ रुपये रहा। भारत के रक्षा उत्पाद अब 80 से अधिक देशों तक पहुंच रहे हैं।
रक्षा सचिव पहले भी आत्मनिर्भरता को भारत की रणनीतिक जरूरत बता चुके हैं। जनवरी 2026 में उन्होंने कहा था कि भारत का रक्षा क्षेत्र आयात पर निर्भर व्यवस्था से आगे बढ़कर रक्षा सार्वजनिक उपक्रमों, निजी कंपनियों, MSME और स्टार्टअप से बने व्यापक घरेलू इकोसिस्टम में बदल रहा है। उन्होंने मिसाइल, ड्रोन, सेंसर, तोप और बख्तरबंद प्रणालियों जैसे जटिल रक्षा उत्पादों के स्वदेशी डिजाइन और निर्माण को इस बदलाव का महत्वपूर्ण हिस्सा बताया था।
आकाश की सफलता का एक बड़ा पहलू इसका उत्पादन नेटवर्क भी है। मिसाइल प्रणाली को तैयार करने में केवल एक कंपनी की भूमिका नहीं होती, बल्कि विभिन्न रडार, इलेक्ट्रॉनिक्स, लॉन्चर, कमांड सिस्टम और दूसरे उपकरणों के निर्माण में कई भारतीय कंपनियों और आपूर्तिकर्ताओं की भागीदारी होती है। इससे घरेलू रक्षा उद्योग में तकनीकी क्षमता विकसित करने के साथ रोजगार और सप्लाई चेन को भी बढ़ावा मिलता है।
भारत अब घरेलू जरूरतों को पूरा करने के साथ रक्षा निर्यात को भी तेजी से बढ़ाने की रणनीति पर काम कर रहा है। अगस्त में रक्षा उत्पादन विभाग ने रक्षा निर्यात की प्रक्रिया को सरल बनाने के लिए स्टैंडर्ड ऑपरेटिंग प्रोसीजर और ओपन जनरल एक्सपोर्ट लाइसेंस से जुड़े नियमों में बदलाव किए थे। इसका उद्देश्य भारतीय कंपनियों को वैश्विक बाजार तक तेजी से पहुंच उपलब्ध कराना है।
रक्षा क्षेत्र में तकनीकी ट्रांसफर का दायरा भी लगातार बढ़ रहा है। रक्षा मंत्रालय के मुताबिक DRDO अब तक 2,300 से अधिक टेक्नोलॉजी ट्रांसफर 1,100 से ज्यादा उद्योगों को दे चुका है। करीब 50 मिसाइलों से जुड़ी तकनीक भी उद्योग को उपलब्ध कराई गई है, जिससे घरेलू उत्पादन क्षमता को बढ़ाया जा सके।
आकाश मिसाइल सिस्टम को रक्षा सचिव ने इसी व्यापक बदलाव के उदाहरण के रूप में पेश किया है। उनके मुताबिक इस परियोजना ने दिखाया है कि भारत स्वदेशी स्तर पर आधुनिक मिसाइल सिस्टम को डिजाइन, विकसित और उत्पादन करने की क्षमता हासिल कर चुका है।
सरकार का लक्ष्य अब ऐसी प्रणालियों की घरेलू जरूरत पूरी करने के साथ उन्हें वैश्विक रक्षा बाजार में भी प्रतिस्पर्धी बनाना है। भारत ने 2029 तक वार्षिक रक्षा निर्यात को 50,000 करोड़ रुपये तक पहुंचाने का लक्ष्य रखा है।
रक्षा सचिव राजेश कुमार सिंह के मुताबिक आकाश सिस्टम की मौजूदा स्थिति भारत के स्वदेशी रक्षा उद्योग की परिपक्वता को दर्शाती है। घरेलू ऑर्डर, स्थिर उत्पादन और निर्यात बाजार में बढ़ती रुचि के बीच यह मिसाइल प्रणाली भारत की ‘आत्मनिर्भर भारत’ रक्षा रणनीति के प्रमुख उदाहरणों में शामिल हो गई है।