नई दिल्ली। देश की वायु रक्षा व्यवस्था की कमान संभालने वाले नए वायुसेना प्रमुख एयर चीफ मार्शल आशुतोष दीक्षित से सोमवार को रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने मुलाकात की। इस दौरान उन्होंने नवनियुक्त वायुसेना प्रमुख को नई जिम्मेदारी संभालने पर शुभकामनाएं दीं और उनके सफल कार्यकाल की कामना की। रक्षा मंत्री ने एयर चीफ मार्शल दीक्षित को बेहतरीन नेतृत्व क्षमता वाला विशिष्ट वायु योद्धा बताया। उन्होंने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर मुलाकात की जानकारी साझा करते हुए उनके अनुभव और नेतृत्व क्षमता की सराहना की।

राजनाथ सिंह ने अपनी पोस्ट में लिखा, "नवनियुक्त चीफ ऑफ एयर स्टाफ, एयर चीफ मार्शल आशुतोष दीक्षित से मुलाकात की। वे बेहतरीन नेतृत्व के लिए जाने जाने वाले एक विशिष्ट वायु योद्धा हैं। मैं उनके शानदार कार्यकाल की कामना करता हूं।"

रक्षा मंत्री की इस मुलाकात को भारतीय वायुसेना में नए नेतृत्व की शुरुआत के बीच महत्वपूर्ण माना जा रहा है। एयर चीफ मार्शल आशुतोष दीक्षित ने 31 अक्टूबर 2026 को भारतीय वायुसेना के 29वें प्रमुख के रूप में कार्यभार संभाला था। उन्होंने एयर चीफ मार्शल अमर प्रीत सिंह का स्थान लिया, जो 42 वर्षों की विशिष्ट सेवा के बाद सेवानिवृत्त हुए।

चार दशक का सैन्य अनुभव रखने वाले अधिकारी हैं दीक्षित

एयर चीफ मार्शल आशुतोष दीक्षित भारतीय वायुसेना के अनुभवी लड़ाकू पायलट हैं। उनका जन्म 9 दिसंबर 1966 को हुआ था। उन्होंने 6 दिसंबर 1986 को भारतीय वायुसेना की फाइटर स्ट्रीम में कमीशन प्राप्त किया था। उनका सैन्य करियर लगभग चार दशकों का है। इस दौरान उन्होंने ऑपरेशनल गतिविधियों, विमान परीक्षण, सैन्य क्षमता विकास और संयुक्त रक्षा रणनीतियों से जुड़े कई महत्वपूर्ण पदों पर काम किया है।

राष्ट्रीय रक्षा अकादमी (NDA) से प्रशिक्षण प्राप्त करने के अलावा वह बांग्लादेश के डिफेंस सर्विसेज कमांड एंड स्टाफ कॉलेज और नई दिल्ली के नेशनल डिफेंस कॉलेज के पूर्व छात्र भी हैं।

वायुसेना में अपने लंबे कार्यकाल के दौरान उन्होंने मिराज-2000, मिग के विभिन्न संस्करण, जगुआर, किरण और तेजस जैसे विमानों पर उड़ान भरी है। उनके पास 3,500 घंटे से अधिक उड़ान का अनुभव है। वह एक अनुभवी एक्सपेरिमेंटल टेस्ट पायलट और क्वालिफाइड फ्लाइंग इंस्ट्रक्टर भी हैं।

ऑपरेशन और रणनीतिक जिम्मेदारियों में निभाई अहम भूमिका

एयर चीफ मार्शल दीक्षित ने अपने सैन्य करियर में कई महत्वपूर्ण ऑपरेशनल और रणनीतिक जिम्मेदारियां निभाई हैं। उन्होंने मिराज-2000 स्क्वाड्रन की कमान संभाली और पश्चिमी क्षेत्र में एक अग्रिम लड़ाकू एयरबेस का नेतृत्व भी किया। इसके अलावा दक्षिणी क्षेत्र में स्थित एयर फोर्स स्टेशन बिदर की कमान उनके पास रही, जो वायुसेना के प्रमुख प्रशिक्षण केंद्रों में शामिल है।

उन्होंने दक्षिणी वायु कमान में एयर डिफेंस कमांडर और दक्षिण-पश्चिमी वायु कमान में सीनियर एयर स्टाफ ऑफिसर के रूप में भी काम किया। इसके बाद उन्हें डिप्टी चीफ ऑफ एयर स्टाफ की जिम्मेदारी सौंपी गई। वह सेंट्रल एयर कमांड के एयर ऑफिसर कमांडिंग-इन-चीफ भी रहे।

बाद में उन्होंने चीफ ऑफ इंटीग्रेटेड डिफेंस स्टाफ टू द चेयरमैन, चीफ्स ऑफ स्टाफ कमेटी (CISC) के रूप में भी सेवाएं दीं। वायुसेना प्रमुख बनने से पहले वह उप वायुसेना प्रमुख यानी वाइस चीफ ऑफ एयर स्टाफ के पद पर कार्यरत थे।

उनके योगदान के लिए उन्हें वर्ष 2006 में वायु सेना मेडल, 2011 में विशिष्ट सेवा मेडल, 2023 में अति विशिष्ट सेवा मेडल और 2026 में परम विशिष्ट सेवा मेडल से सम्मानित किया गया।

तेजस और स्वदेशी लड़ाकू विमान परियोजनाओं में योगदान

एयर चीफ मार्शल दीक्षित ने भारतीय वायुसेना के आधुनिकीकरण से जुड़ी कई महत्वपूर्ण परियोजनाओं में भूमिका निभाई है। उन्होंने जगुआर और मिग-27 विमानों के अपग्रेड कार्यक्रमों को अंतिम रूप देने में योगदान दिया। इसके अलावा स्वदेशी हल्के लड़ाकू विमान तेजस के प्रारंभिक परिचालन मंजूरी (IOC) और अंतिम परिचालन मंजूरी (FOC) से जुड़े कार्यों में भी उनकी भूमिका रही।

उनके अनुभव को देखते हुए भारतीय वायुसेना के आधुनिकीकरण, स्वदेशी रक्षा उत्पादन और परिचालन क्षमता को मजबूत करने के लिहाज से उनकी नियुक्ति महत्वपूर्ण मानी जा रही है।

वायुसेना की नई प्राथमिकताएं होंगी महत्वपूर्ण

नए वायुसेना प्रमुख ने कार्यभार संभालने के बाद भारतीय वायुसेना की भविष्य की प्राथमिकताओं को लेकर 'VAYU' विजन प्रस्तुत किया है। इसके तहत सतर्कता और युद्ध के लिए तैयारी, आत्मनिर्भरता, तकनीकी नवाचार तथा तीनों सेनाओं के बीच बेहतर तालमेल पर जोर दिया गया है।

उन्होंने स्पष्ट किया है कि भारतीय वायुसेना की स्वीकृत लड़ाकू स्क्वाड्रन क्षमता को बहाल करना उनकी प्रमुख प्राथमिकताओं में शामिल रहेगा। इसके साथ ही स्वदेशी विमानों, आधुनिक तकनीक और रक्षा क्षेत्र में आत्मनिर्भरता को बढ़ावा देने पर भी ध्यान दिया जाएगा।

वायुसेना के सामने कई महत्वपूर्ण चुनौतियां

वर्तमान समय में भारतीय वायुसेना के सामने आधुनिकीकरण, लड़ाकू विमानों की संख्या बढ़ाने और नई तकनीकों को अपनाने जैसी महत्वपूर्ण चुनौतियां हैं। तेजस और भविष्य के एडवांस्ड मीडियम कॉम्बैट एयरक्राफ्ट (AMCA) जैसे स्वदेशी लड़ाकू विमान कार्यक्रमों को आगे बढ़ाना भी महत्वपूर्ण होगा।

इसके अलावा बदलते क्षेत्रीय सुरक्षा वातावरण में हवाई सुरक्षा, निगरानी प्रणाली, रडार नेटवर्क और वायु रक्षा इकाइयों की तत्परता बनाए रखना आवश्यक है। चीन और पाकिस्तान से जुड़ी सुरक्षा चुनौतियों के बीच भारतीय वायुसेना की परिचालन क्षमता मजबूत करना भी अहम जिम्मेदारी होगी।

रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह और नए वायुसेना प्रमुख की मुलाकात ऐसे समय में हुई है, जब वायुसेना में नेतृत्व परिवर्तन के बाद नई रणनीतिक प्राथमिकताओं पर काम शुरू हो रहा है। रक्षा मंत्री की शुभकामनाओं के साथ अब एयर चीफ मार्शल आशुतोष दीक्षित के सामने भारतीय वायुसेना को भविष्य की सुरक्षा चुनौतियों के अनुरूप तैयार करने की जिम्मेदारी है।

फिलहाल नए वायुसेना प्रमुख के नेतृत्व में भारतीय वायुसेना की आगे की रणनीति, स्वदेशी रक्षा तकनीक और परिचालन क्षमता को लेकर लिए जाने वाले फैसलों पर सभी की नजर रहेगी।

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