नई दिल्ली। राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली में प्रधानमंत्री आवास के पास स्थित वर्षों पुरानी रेस कोर्स मस्जिद को खाली कराने और संभावित ध्वस्तीकरण की कार्रवाई को लेकर विवाद लगातार बढ़ता जा रहा है। असदुद्दीन ओवैसी की पार्टी ऑल इंडिया मजलिस-ए-इत्तेहादुल मुस्लिमीन (एआईएमआईएम) के एक प्रतिनिधिमंडल ने गुरुवार, 22 अक्टूबर को दिल्ली वक्फ बोर्ड के अधिकारियों से मुलाकात कर इस मामले में तत्काल हस्तक्षेप की मांग की। प्रतिनिधिमंडल ने बोर्ड के मुख्य कार्यकारी अधिकारी को ज्ञापन सौंपते हुए कहा कि मस्जिद और उससे सटे कब्रिस्तान को किसी भी संभावित कार्रवाई से बचाने के लिए कानूनी कदम उठाए जाने चाहिए। संगठन ने मांग की कि जब तक संबंधित संपत्ति के सरकारी रिकॉर्ड और कानूनी दावों की जांच पूरी नहीं हो जाती, तब तक किसी भी तरह की ध्वस्तीकरण कार्रवाई पर रोक लगाई जाए।
वक्फ बोर्ड के अधिकारियों से मिला AIMIM का प्रतिनिधिमंडल
एआईएमआईएम की दिल्ली इकाई के अध्यक्ष शोएब जामेई के नेतृत्व में पार्टी के प्रतिनिधिमंडल ने दिल्ली वक्फ बोर्ड के अधिकारियों से मुलाकात की।
इस दौरान प्रतिनिधिमंडल ने रेस कोर्स रोड स्थित मस्जिद और उसके साथ मौजूद कब्रिस्तान की कानूनी स्थिति को लेकर अपनी चिंता व्यक्त की।
पार्टी नेताओं का कहना है कि यह धार्मिक स्थल लंबे समय से अस्तित्व में है और इससे संबंधित दस्तावेज सरकारी रिकॉर्ड में भी उपलब्ध हैं।
प्रतिनिधिमंडल ने बोर्ड से आग्रह किया कि वह संबंधित अधिकारियों के समक्ष मस्जिद की स्थिति स्पष्ट करे और आवश्यक होने पर कानूनी कार्रवाई शुरू करे।
एआईएमआईएम ने यह भी कहा कि धार्मिक स्थल से जुड़े विवाद का समाधान कानून के अनुसार होना चाहिए।
1977 के सरकारी गजट का दिया हवाला
एआईएमआईएम ने ज्ञापन में 8 सितंबर 1977 की दिल्ली प्रशासन की गजट अधिसूचना का उल्लेख किया है।
शोएब जामेई के अनुसार, इस अधिसूचना में रेस कोर्स मस्जिद और उससे सटे कब्रिस्तान का विवरण दर्ज है।
उन्होंने दावा किया कि दोनों स्थल लगभग दो बीघा भूमि पर स्थित हैं और संबंधित संपत्ति वक्फ रिकॉर्ड का हिस्सा है।
पार्टी का कहना है कि इस रिकॉर्ड की मौजूदगी में किसी भी कार्रवाई से पहले संपत्ति की कानूनी स्थिति की विस्तृत जांच आवश्यक है।
प्रतिनिधिमंडल ने दिल्ली वक्फ बोर्ड से वक्फ अभिलेखों, राजस्व रिकॉर्ड और गजट अधिसूचनाओं को सुरक्षित रखने की मांग भी की है।
मस्जिद समिति को कानूनी दस्तावेज देने की मांग
ज्ञापन में एआईएमआईएम ने दिल्ली वक्फ बोर्ड से कई महत्वपूर्ण मांगें की हैं।
पार्टी ने कहा कि मस्जिद के संबंध में सामने आई ध्वस्तीकरण संबंधी कार्रवाई की कानूनी समीक्षा की जाए।
इसके अलावा मस्जिद प्रबंधन समिति को आवश्यक दस्तावेज और अधिकार उपलब्ध कराए जाएं, ताकि वह सक्षम अदालत या संबंधित प्राधिकारी के समक्ष अपना पक्ष रख सके।
प्रतिनिधिमंडल ने किसी भी संभावित ध्वस्तीकरण से पहले अंतरिम संरक्षण प्राप्त करने के लिए कदम उठाने की भी मांग की।
एआईएमआईएम नेताओं का कहना है कि धार्मिक स्थल के भविष्य का फैसला उचित कानूनी प्रक्रिया पूरी होने के बाद ही होना चाहिए।
वक्फ बोर्ड कार्यालय के बाहर प्रदर्शन
दिल्ली वक्फ बोर्ड के अधिकारियों से मुलाकात के बाद एआईएमआईएम कार्यकर्ताओं ने कार्यालय के बाहर विरोध प्रदर्शन भी किया।
पार्टी नेताओं ने बोर्ड के मुख्य कार्यकारी अधिकारी की प्रतिक्रिया पर असंतोष व्यक्त किया।
उनका आरोप था कि मस्जिद को लेकर पैदा हुई स्थिति में वक्फ बोर्ड को अधिक सक्रिय भूमिका निभानी चाहिए।
कार्यकर्ताओं ने धार्मिक स्थल की सुरक्षा सुनिश्चित करने और संबंधित अधिकारियों के सामने मजबूती से पक्ष रखने की मांग की।
हालांकि, वक्फ बोर्ड पहले ही मस्जिद की बिजली और पानी की आपूर्ति बहाल करने के लिए संबंधित विभागों को पत्र लिख चुका है।
मस्जिद की बिजली-पानी आपूर्ति बंद होने का मामला
रेस कोर्स मस्जिद का विवाद केवल खाली कराने के नोटिस तक सीमित नहीं है।
जानकारी के अनुसार, सात अक्टूबर को आसपास के क्षेत्र में अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई के दौरान मस्जिद की बिजली और पानी की आपूर्ति भी बाधित हो गई थी।
इस संबंध में दिल्ली वक्फ बोर्ड के मुख्य कार्यकारी अधिकारी तनवीर अहमद ने 19 और 21 अक्टूबर को संबंधित अधिकारियों को पत्र लिखे।
बोर्ड ने भूमि एवं विकास कार्यालय तथा नई दिल्ली नगरपालिका परिषद से बिजली और पानी की आपूर्ति बहाल करने की मांग की।
बोर्ड का कहना है कि मस्जिद में नियमित नमाज होती है और आवश्यक सुविधाएं बंद होने से धार्मिक गतिविधियां प्रभावित हो रही हैं।
तोड़फोड़ के आदेश पर आधिकारिक स्थिति स्पष्ट नहीं
मस्जिद के इमाम और संबंधित संगठनों ने परिसर खाली करने के निर्देश दिए जाने का दावा किया है।
हालांकि, इस मामले में सरकारी पक्ष से अलग जानकारी भी सामने आई है।
मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, आवास एवं शहरी कार्य मंत्रालय से जुड़े सूत्रों ने कहा है कि भूमि एवं विकास कार्यालय ने मस्जिद को ध्वस्त करने के लिए कोई नोटिस जारी नहीं किया है।
वक्फ बोर्ड के मुख्य कार्यकारी अधिकारी ने भी मस्जिद को ध्वस्त करने का औपचारिक आदेश प्राप्त होने की पुष्टि नहीं की।
इसलिए मस्जिद को खाली कराने की कथित चेतावनी और औपचारिक ध्वस्तीकरण आदेश को एक ही बात नहीं माना जा सकता।
प्रशासन के अनुसार, आसपास की सरकारी भूमि से अनधिकृत कब्जे हटाने की कार्रवाई की जा रही है।
ओवैसी ने केंद्रीय मंत्री से भी की हस्तक्षेप की अपील
एआईएमआईएम प्रमुख और हैदराबाद से सांसद असदुद्दीन ओवैसी ने भी इस मामले को उठाया है।
उन्होंने केंद्रीय अल्पसंख्यक कार्य मंत्री किरेन रिजिजू से तत्काल हस्तक्षेप करने की मांग की।
ओवैसी ने सवाल किया कि जब मस्जिद वर्षों से वक्फ संपत्ति के रूप में अधिसूचित बताई जा रही है, तो उसके संरक्षण के लिए आवश्यक कानूनी कदम क्यों नहीं उठाए गए।
उन्होंने वक्फ कानून के प्रावधानों का उल्लेख करते हुए संबंधित संपत्ति के अधिकारों की रक्षा करने की मांग की।
ओवैसी ने दिल्ली वक्फ बोर्ड की कार्यप्रणाली पर भी सवाल उठाए।
जमीयत उलेमा-ए-हिंद ने भी उठाया मामला
इससे पहले 19 अक्टूबर को जमीयत उलेमा-ए-हिंद के प्रतिनिधिमंडल ने केंद्रीय अल्पसंख्यक कार्य मंत्री किरेन रिजिजू से मुलाकात की थी।
संगठन के महासचिव मौलाना मुहम्मद हकीमुद्दीन कासमी के नेतृत्व में प्रतिनिधिमंडल ने मस्जिद और कब्रिस्तान के संरक्षण की मांग रखी।
जमीयत ने बताया कि यह धार्मिक स्थल नई दिल्ली में सफदरजंग मकबरे के पीछे स्थित है।
संगठन ने मस्जिद में नमाज की व्यवस्था बनाए रखने, बिजली-पानी की आपूर्ति बहाल करने और किसी भी संभावित कार्रवाई से पहले कानूनी स्थिति स्पष्ट करने की मांग की।
जमीयत के अनुसार, केंद्रीय मंत्री ने मामले में यथासंभव सहयोग करने का आश्वासन दिया।
ऐतिहासिक धार्मिक स्थल की सुरक्षा पर उठे सवाल
रेस कोर्स मस्जिद की ऐतिहासिक स्थिति और धार्मिक महत्व को लेकर भी चर्चा तेज हो गई है।
वक्फ बोर्ड के अनुसार, मस्जिद और कब्रिस्तान 1977 से अधिसूचित संपत्ति के रूप में दर्ज हैं।
बोर्ड का दावा है कि मस्जिद का वैध बिजली कनेक्शन वर्ष 1976 से मौजूद रहा है और उसका संचालन बोर्ड की देखरेख में होता है।
मस्जिद को नई दिल्ली नगरपालिका परिषद की विरासत सूची में भी दर्ज बताया गया है।
हालांकि, संपत्ति के स्वामित्व, भूमि उपयोग और प्रशासनिक अधिकारों से जुड़े कानूनी प्रश्नों का समाधान संबंधित रिकॉर्ड और सक्षम प्राधिकारी के निर्णय के आधार पर ही होगा।
अब कानूनी कार्रवाई पर टिकी निगाहें
प्रधानमंत्री आवास के निकट स्थित रेस कोर्स मस्जिद को लेकर विवाद बढ़ने के बाद राजनीतिक और धार्मिक संगठनों की सक्रियता तेज हो गई है।
एआईएमआईएम और जमीयत उलेमा-ए-हिंद ने संबंधित अधिकारियों से हस्तक्षेप की मांग की है, जबकि दिल्ली वक्फ बोर्ड बिजली-पानी की आपूर्ति बहाल करने और मस्जिद की सुरक्षा को लेकर पत्राचार कर चुका है।
अब यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि संबंधित विभाग मस्जिद की कानूनी स्थिति पर क्या निर्णय लेते हैं और संभावित कार्रवाई को लेकर उठे सवालों का समाधान किस तरह किया जाता है।
फिलहाल मस्जिद और कब्रिस्तान के संरक्षण, वक्फ संपत्ति के अधिकारों तथा सरकारी भूमि से अतिक्रमण हटाने की प्रक्रिया को लेकर विवाद बना हुआ है।