नई दिल्ली। भारत के 80वें स्वतंत्रता दिवस पर लाल किले में आयोजित राष्ट्रीय समारोह से लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी और राज्यसभा में नेता प्रतिपक्ष मल्लिकार्जुन खरगे अनुपस्थित रहे। दोनों नेताओं को कार्यक्रम का निमंत्रण दिया गया था, लेकिन वे समारोह में शामिल नहीं हुए। उनकी अनुपस्थिति के पीछे बैठने की व्यवस्था और औपचारिक प्रोटोकॉल को लेकर असहमति बताई जा रही है। हालांकि, कांग्रेस ने इस संबंध में विस्तृत आधिकारिक बयान जारी नहीं किया है।
मीडिया रिपोर्टों में सूत्रों के हवाले से बताया गया है कि राहुल गांधी और मल्लिकार्जुन खरगे के पद के अनुरूप बैठने तथा आयोजन स्थल तक पहुंचने की व्यवस्था नहीं होने के कारण दोनों नेताओं ने समारोह से दूरी बनाई। कांग्रेस नेताओं का कथित रूप से मानना था कि लोकसभा और राज्यसभा में नेता प्रतिपक्ष को संवैधानिक तथा राजनीतिक पद के अनुसार सम्मानजनक स्थान मिलना चाहिए।
रक्षा मंत्रालय का पक्ष इससे अलग बताया जा रहा है। समारोह से पहले रक्षा सचिव आरके सिंह ने कहा था कि राहुल गांधी को आधिकारिक निमंत्रण भेजा गया है और उन्हें वरीयता क्रम के अनुसार केंद्रीय कैबिनेट मंत्रियों के ठीक बाद स्थान दिया जाएगा। नेता प्रतिपक्ष का पद केंद्रीय कैबिनेट मंत्री के समान माना जाता है। के अनुसार सरकार ने इस बार बैठने की व्यवस्था निर्धारित प्रोटोकॉल के तहत करने की बात कही थी।
सूत्रों के हवाले से यह दावा भी किया गया है कि रक्षा मंत्रालय ने कांग्रेस के वरिष्ठ नेताओं से संपर्क किया था। मंत्रालय की ओर से कथित रूप से पूर्ववर्ती संयुक्त प्रगतिशील गठबंधन सरकार के दौरान आयोजित राष्ट्रीय समारोहों की बैठने की व्यवस्था का विवरण भी साझा किया गया। इसमें बताया गया कि यूपीए शासन के समय सुषमा स्वराज और अरुण जेटली जैसे विपक्षी नेताओं को कहां स्थान दिया जाता था। इसके बावजूद कांग्रेस नेता सरकार के तर्क से सहमत नहीं हुए।
यह विवाद पहली बार नहीं उठा है। वर्ष 2024 के स्वतंत्रता दिवस समारोह में राहुल गांधी को लाल किले के वीआईपी क्षेत्र में पांचवीं पंक्ति में स्थान दिया गया था। उस समय कांग्रेस ने आरोप लगाया था कि नेता प्रतिपक्ष को पीछे बैठाकर उनके पद का अपमान किया गया। सरकार ने जवाब दिया था कि आगे की पंक्तियों में पेरिस ओलंपिक में हिस्सा लेने वाले खिलाड़ियों को बैठाने के कारण व्यवस्था में बदलाव करना पड़ा था।
इसके बाद राहुल गांधी और मल्लिकार्जुन खरगे वर्ष 2025 के स्वतंत्रता दिवस समारोह में भी शामिल नहीं हुए थे। जनवरी 2026 में गणतंत्र दिवस पर दोनों नेताओं को तीसरी पंक्ति में बैठाए जाने को लेकर भी कांग्रेस ने सवाल उठाए थे। पार्टी नेताओं ने कहा था कि निर्धारित वरीयता क्रम के मुताबिक दोनों नेता आगे की पंक्ति में स्थान पाने के हकदार हैं। दूसरी तरफ रक्षा मंत्रालय ने बैठने की व्यवस्था को प्रोटोकॉल के अनुरूप बताया था। में भी दोनों नेताओं की अनुपस्थिति के पीछे प्रोटोकॉल संबंधी असहमति का उल्लेख किया गया है।
लाल किले के कार्यक्रम में शामिल नहीं हुए मल्लिकार्जुन खरगे ने कांग्रेस मुख्यालय इंदिरा भवन में राष्ट्रीय ध्वज फहराया। कार्यक्रम में कांग्रेस संसदीय दल की अध्यक्ष सोनिया गांधी, राहुल गांधी और पार्टी के अन्य वरिष्ठ नेता मौजूद रहे। खरगे ने अपने संबोधन में कहा कि लोकतंत्र में जनता की आवाज सुनना और सरकार से पूछे गए सवालों के जवाब देना आवश्यक है। उन्होंने कहा कि स्वतंत्रता दिवस केवल इतिहास और स्वतंत्रता सेनानियों के बलिदान को याद करने का अवसर नहीं है, बल्कि यह मूल्यांकन करने का भी दिन है कि उनके सपनों का भारत कितना बन पाया है।
उधर, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने लाल किले पर आयोजित मुख्य समारोह का नेतृत्व किया और राष्ट्रीय ध्वज फहराया। इस बार समारोह में पहली बार राष्ट्रीय गीत ‘वंदे मातरम’ की विशेष प्रस्तुति हुई। सेना के बैंड ने इसकी धुन बजाई। इसके बाद राष्ट्रगान के साथ स्वदेशी 105 मिमी लाइट फील्ड गन से 21 तोपों की सलामी दी गई।
राहुल गांधी और मल्लिकार्जुन खरगे की अनुपस्थिति ने राष्ट्रीय समारोहों में विपक्षी नेताओं के प्रोटोकॉल को एक बार फिर राजनीतिक चर्चा का विषय बना दिया है। सरकार की ओर से व्यवस्था को निर्धारित वरीयता क्रम के अनुरूप बताया गया, जबकि विपक्षी खेमे से जुड़े सूत्रों ने इसे पद के अनुरूप नहीं माना।
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