नई दिल्ली : 27 अक्टूबर 2026। देश में कथित 'वोट चोरी' और मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) को लेकर सियासी टकराव तेज हो गया है। कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह पर गंभीर आरोप लगाते हुए कहा है कि केंद्र सरकार लोकतांत्रिक अधिकारों की रक्षा के लिए उठ रही जनता की आवाज को दबाने की कोशिश कर रही है। खड़गे ने आरोप लगाया कि सरकार विरोध प्रदर्शनों पर प्रतिबंध और प्रदर्शनकारियों के खिलाफ कार्रवाई के जरिए जन आंदोलन को कमजोर करना चाहती है।कांग्रेस अध्यक्ष ने कहा कि मताधिकार की रक्षा करना प्रत्येक नागरिक का संवैधानिक अधिकार है और उनकी पार्टी इस मुद्दे पर अपना संघर्ष जारी रखेगी। उन्होंने चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली पर भी सवाल उठाए और मतदाता सूची में कथित अनियमितताओं की निष्पक्ष जांच की मांग की।
मोदी-शाह पर खड़गे ने लगाए गंभीर आरोप
मल्लिकार्जुन खड़गे ने केंद्र सरकार पर विरोध की आवाज दबाने का आरोप लगाते हुए कहा कि देश में ऐसी परिस्थितियां पैदा की जा रही हैं, जिनसे लोकतांत्रिक अधिकार प्रभावित हो रहे हैं।उन्होंने प्रधानमंत्री मोदी और गृह मंत्री अमित शाह पर अघोषित आपातकाल जैसी स्थिति पैदा करने का आरोप लगाया। खड़गे के अनुसार, सरकार के खिलाफ प्रदर्शन करने वाले युवाओं और राजनीतिक कार्यकर्ताओं पर पुलिस कार्रवाई चिंताजनक है।कांग्रेस अध्यक्ष ने कहा कि किसी भी लोकतंत्र में शांतिपूर्ण विरोध प्रदर्शन का अधिकार बेहद महत्वपूर्ण है। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार सवाल उठाने वालों को दबाने का प्रयास कर रही है।
वोट चोरी और SIR को लेकर बढ़ा विवाद
कांग्रेस और अन्य विपक्षी दल मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण को लेकर लगातार सवाल उठा रहे हैं।विपक्ष का आरोप है कि इस प्रक्रिया के दौरान बड़ी संख्या में मतदाताओं के नाम सूची से हटाए जा रहे हैं, जिससे उनके मतदान के अधिकार प्रभावित हो सकते हैं।खड़गे ने आरोप लगाया कि मतदाता सूची में कथित गड़बड़ियों का राजनीतिक लाभ सत्तारूढ़ भाजपा को मिल सकता है।हालांकि, 'वोट चोरी' और चुनावी प्रक्रिया में राजनीतिक हस्तक्षेप के ये आरोप हैं। इन्हें स्थापित तथ्य के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए। विपक्ष ने इन आरोपों की जांच और निर्वाचन प्रक्रिया में पारदर्शिता सुनिश्चित करने की मांग उठाई है।
जंतर-मंतर पर प्रदर्शन को लेकर भी सवाल
कांग्रेस अध्यक्ष ने दिल्ली के जंतर-मंतर पर प्रदर्शन से जुड़े प्रतिबंधों और प्रदर्शनकारियों के खिलाफ पुलिस कार्रवाई की आलोचना की है।14 अक्टूबर को खड़गे ने आरोप लगाया था कि पहले मतदाताओं के अधिकारों को प्रभावित किया जा रहा है और अब शांतिपूर्ण प्रदर्शन के अधिकार पर भी रोक लगाई जा रही है।उन्होंने कहा कि सरकार की नीतियों के खिलाफ आवाज उठाना लोकतंत्र का हिस्सा है और नागरिकों को संवैधानिक तरीके से विरोध करने की स्वतंत्रता मिलनी चाहिए।दूसरी ओर, दिल्ली पुलिस ने संबंधित प्रदर्शनकारियों पर प्रतिबंधित प्रदर्शन स्थल में प्रवेश करने और पुलिसकर्मियों के काम में बाधा डालने के आरोप लगाए थे।
एक नवंबर को दिल्ली में विपक्ष की महारैली
कथित वोट चोरी के मुद्दे पर विपक्षी गठबंधन INDIA ने एक नवंबर को नई दिल्ली के रामलीला मैदान में विशाल रैली आयोजित करने की घोषणा की है।26 अक्टूबर को खड़गे ने सोशल मीडिया के माध्यम से नागरिकों से इस रैली में शामिल होने की अपील की।उन्होंने इसे मतदान के अधिकार और लोकतांत्रिक संस्थाओं की रक्षा से जुड़ा अभियान बताया।कांग्रेस अध्यक्ष ने कहा कि विपक्ष का आंदोलन केवल मतदाता सूची तक सीमित नहीं है, बल्कि संविधान और लोकतंत्र की रक्षा के व्यापक सवालों से भी जुड़ा हुआ है।
मुख्य चुनाव आयुक्त के इस्तीफे की मांग
विपक्षी दलों ने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग भी उठाई है।खड़गे ने निर्वाचन आयोग की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाते हुए आरोप लगाया कि आयोग की निष्पक्षता प्रभावित हो रही है।विपक्ष ने एसआईआर प्रक्रिया पर तत्काल रोक लगाने और मतदाता सूची से गलत तरीके से हटाए गए पात्र नागरिकों के नाम बहाल करने की मांग की है।इसके अलावा चुनावों में इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीनों के स्थान पर मतपत्रों के इस्तेमाल का मुद्दा भी विपक्ष ने उठाया है।
राजनीतिक माहौल में बढ़ी हलचल
कथित वोट चोरी और मतदाता सूची विवाद को लेकर कांग्रेस तथा भाजपा के बीच राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप जारी हैं।कांग्रेस इस मुद्दे को नागरिकों के मताधिकार और संवैधानिक संस्थाओं की जवाबदेही से जोड़ रही है। वहीं, चुनावी अनियमितताओं से संबंधित आरोपों की सत्यता तय करने के लिए प्रमाण और संबंधित संस्थाओं की जांच महत्वपूर्ण है।एक नवंबर को प्रस्तावित विपक्ष की रैली को लेकर राजनीतिक गतिविधियां तेज हो गई हैं। अब निगाहें विपक्ष के अगले कदम और चुनाव आयोग की प्रतिक्रिया पर टिकी हैं।
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