New Delhi नई दिल्ली : केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (CBSE) की कक्षा 12वीं की उत्तर पुस्तिकाओं को लेकर बड़ा विवाद सामने आया है। कांग्रेस ने आरोप लगाया है कि करीब 20 लाख छात्रों की आंसर शीट्स सार्वजनिक डोमेन में उपलब्ध दिखाई दे रही हैं, जिसे पार्टी ने गंभीर डेटा सुरक्षा उल्लंघन (डेटा ब्रीच) करार दिया है। इस मामले ने छात्रों की गोपनीयता और परीक्षा प्रणाली की सुरक्षा को लेकर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
कांग्रेस के वरिष्ठ नेता जयराम रमेश ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर इस मुद्दे को सही हुए कहा कि यह घटना शिक्षा प्रणाली की गंभीर असफलता और प्रशासनिक विफलता को उजागर करती है। उन्होंने आरोप लगाया कि “COEMPT की नाकामी और असफलता” एक बार फिर सामने आई है, जिससे सिस्टम की कमजोरियां स्पष्ट होती हैं।
अपनी पोस्ट में जयराम रमेश ने कहा कि सीबीएसई कक्षा 12 के लगभग 20 लाख छात्रों की उत्तर पुस्तिकाएं सार्वजनिक रूप से उपलब्ध दिखाई दे रही हैं, जो एक बहुत गंभीर मामला है। उन्होंने इसे छात्रों की व्यक्तिगत जानकारी और अकादमी रिकॉर्ड की सुरक्षा में बड़ी चूक बताई।
कांग्रेस का कहना है कि इस तरह की घटना से छात्रों की निजी जानकारी खतरे में पड़ सकती है और इसका दुरुपयोग भी संभव है। पार्टी ने इसे शिक्षा प्रणाली में डिजिटल सुरक्षा के कमजोर ढांचे का परिणाम बताया है। साथ ही इस पूरे मामले की तत्काल जांच और जिम्मेदार अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की गई है।
इस कथित डेटा ब्रीच को लेकर अभिभावकों और छात्रों में भी चिंता का माहौल देखा जा रहा है। कई लोगों का मानना है कि परीक्षा से जुड़ी संवेदनशील जानकारी का इस तरह सार्वजनिक होना गंभीर सुरक्षा चूक है, जिससे छात्रों के भविष्य और गोपनीयता दोनों पर असर पड़ सकता है।
विशेषज्ञों का कहना है कि डिजिटल शिक्षा और ऑनलाइन मूल्यांकन प्रणाली के बढ़ते उपयोग के साथ डेटा सुरक्षा और साइबर सुरक्षा उपायों को और मजबूत करना बेहद जरूरी हो गया है। यदि इस तरह की चूक होती है, तो यह न केवल संस्थागत विश्वसनीयता को प्रभावित करती है, बल्कि लाखों छात्रों की निजी जानकारी को भी जोखिम में डाल सकती है।
फिलहाल, संबंधित शिक्षा बोर्ड या सरकार की ओर से इस मामले पर विस्तृत आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। कांग्रेस ने इस मुद्दे को गंभीर बताते हुए तुरंत स्पष्टीकरण और जांच की मांग की है।
इस पूरे घटनाक्रम ने देश की परीक्षा प्रणाली में डेटा सुरक्षा और पारदर्शिता को लेकर एक नई बहस छेड़ दी है, जिसमें सभी पक्षों से जिम्मेदारी और त्वरित कार्रवाई की मांग की जा रही है।