नई दिल्ली। कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के संस्थापक अभिजीत दिपके ने गुरुवार को मुख्य चुनाव आयुक्त (CEC) ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग करते हुए चुनाव आयोग और मतदाता सूची के स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन (SIR) को लेकर गंभीर आरोप लगाए। दिल्ली में आयोजित प्रेस कॉन्फ्रेंस में दिपके ने ज्ञानेश कुमार को पद छोड़ने के लिए 48 घंटे का अल्टीमेटम दिया और चेतावनी दी कि ऐसा नहीं होने पर उनका संगठन देशव्यापी आंदोलन शुरू करेगा।दिपके ने दावा किया कि SIR प्रक्रिया के दौरान देशभर में 13 करोड़ से ज्यादा मतदाताओं के नाम हटाए गए हैं। उन्होंने सवाल उठाया कि इतनी बड़ी संख्या में मतदाताओं के नाम सूची से बाहर होना लोकतांत्रिक व्यवस्था के लिए उचित कैसे माना जा सकता है। हालांकि, 13 करोड़ से अधिक नाम हटाए जाने का आंकड़ा CJP और दिपके का दावा है; इसे इस रिपोर्ट के लिए चुनाव आयोग के आधिकारिक आंकड़ों से स्वतंत्र रूप से सत्यापित नहीं किया गया है।दिपके ने प्रेस कॉन्फ्रेंस में कहा कि 13 करोड़ कोई छोटी संख्या नहीं है। उन्होंने दावा किया कि यह संख्या कुल मतदाताओं के लगभग 13 से 14 प्रतिशत के बराबर है। उन्होंने मतदाता सूची में हुए बदलावों को लेकर चुनाव आयोग से विस्तृत जवाब की मांग की।
ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग
CJP संस्थापक ने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार पर तीखे आरोप लगाते हुए उनके इस्तीफे की मांग की। दिपके ने आरोप लगाया कि मौजूदा चुनावी प्रक्रिया में यह तय करने की स्थिति बन रही है कि किसे मतदान का अधिकार मिलेगा और किसे नहीं। उन्होंने इसे लोकतंत्र के लिए गंभीर मुद्दा बताते हुए चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाए।दिपके ने ज्ञानेश कुमार को लेकर कुछ अत्यंत कठोर राजनीतिक आरोप भी लगाए। ये CJP नेता के आरोप हैं और इन्हें स्थापित तथ्य के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए। चुनाव आयोग और मुख्य चुनाव आयुक्त की भूमिका संवैधानिक तथा कानूनी ढांचे के तहत निर्धारित होती है।
48 घंटे का दिया अल्टीमेटम
CJP की ओर से ज्ञानेश कुमार को इस्तीफे के लिए 48 घंटे का समय देने की घोषणा की गई। दिपके ने कहा कि अगर इस अवधि के भीतर इस्तीफा नहीं दिया जाता है तो उनका संगठन देशभर में आंदोलन करेगा। उन्होंने कहा कि इस्तीफे की मांग पूरी होने तक संगठन पीछे नहीं हटेगा।इससे एक दिन पहले भी दिपके ने मुख्य चुनाव आयुक्त को लेकर सोशल मीडिया पर तीखी प्रतिक्रिया दी थी। चुनाव आयोग के भीतर SIR से जुड़े कुछ पहलुओं पर कथित मतभेद की मीडिया रिपोर्ट के बाद CJP नेतृत्व ने अपने पहले से तय कार्यक्रम बदलकर दिल्ली आने और प्रेस कॉन्फ्रेंस करने की घोषणा की थी।
SIR बना विवाद का केंद्र
इस पूरे विवाद के केंद्र में मतदाता सूची का स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन यानी SIR है। मतदाता सूची की समीक्षा और सत्यापन से जुड़ी इस प्रक्रिया को लेकर हाल के दिनों में विपक्षी दलों और विभिन्न संगठनों की ओर से सवाल उठाए गए हैं।CJP ने भी इसी प्रक्रिया को आधार बनाकर मुख्य चुनाव आयुक्त के खिलाफ मोर्चा खोला है। दिपके ने दावा किया कि SIR के दौरान बड़ी संख्या में मतदाताओं के नाम हटाए गए। उन्होंने मांग की कि मतदाता सूची में किए गए बदलावों और नाम हटाने की प्रक्रिया को लेकर चुनाव आयोग पूरी जानकारी सार्वजनिक करे।
चुनाव आयोग पर पहले भी उठे सवाल
CJP का बयान ऐसे समय आया है जब चुनाव आयोग के कुछ फैसलों और SIR प्रक्रिया को लेकर राजनीतिक विवाद चल रहा है। कांग्रेस समेत कई विपक्षी नेताओं ने आयोग की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाए हैं। दूसरी तरफ, चुनाव आयोग अपने निर्णयों और मतदाता सूची से जुड़ी प्रक्रियाओं को निर्धारित नियमों और कानूनी प्रावधानों के तहत संचालित किए जाने की बात कहता रहा है।मतदाता सूची में नाम जोड़ने या हटाने की प्रक्रिया में निर्धारित कानूनी प्रक्रिया, दावे और आपत्तियों की व्यवस्था होती है। इसलिए किसी राज्य या देशभर में हटाए गए नामों की संख्या का आकलन करते समय अंतिम मतदाता सूची और चुनाव आयोग के आधिकारिक आंकड़ों को आधार बनाना जरूरी है।
CJP ने तेज किया अभियान
कॉकरोच जनता पार्टी हाल के महीनों में अलग-अलग सार्वजनिक मुद्दों को लेकर अभियान चला रही है। संगठन ने शिक्षा और सरकारी स्कूलों से जुड़े मुद्दों पर भी अभियान शुरू किए हैं। सितंबर में CJP ने आदिवासी स्कूलों की स्थिति को लेकर ‘आदिवासी स्कूल ठीक करो’ अभियान शुरू करने की घोषणा की थी।अब संगठन ने चुनाव आयोग और SIR को अपने अभियान का प्रमुख मुद्दा बनाया है। दिपके के साथ CJP के अन्य प्रमुख नेताओं के भी दिल्ली पहुंचने की खबर सामने आई थी। प्रेस कॉन्फ्रेंस से पहले संगठन ने चुनाव आयोग से जुड़े मुद्दे पर महत्वपूर्ण घोषणा करने के संकेत दिए थे।
आंकड़ों की आधिकारिक पुष्टि अहम
दिपके की ओर से 13 करोड़ से अधिक मतदाताओं के नाम हटाए जाने का दावा राजनीतिक रूप से महत्वपूर्ण है, लेकिन इस आंकड़े की पुष्टि चुनाव आयोग के आधिकारिक समेकित डेटा से होना आवश्यक है। मतदाता सूची से नाम हटने के अलग-अलग कारण हो सकते हैं, जिनमें मृत्यु, स्थानांतरण, डुप्लीकेट प्रविष्टियां या पात्रता से जुड़े मामले शामिल हो सकते हैं। किसी विशिष्ट हटाए गए नाम की वैधता संबंधित रिकॉर्ड और निर्धारित प्रक्रिया से ही तय की जा सकती है।फिलहाल CJP ने ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे को लेकर अपना रुख स्पष्ट करते हुए 48 घंटे का अल्टीमेटम दिया है। संगठन ने समयसीमा समाप्त होने के बाद देशव्यापी आंदोलन की चेतावनी दी है। अब इस मांग और CJP की ओर से पेश किए गए आंकड़ों पर चुनाव आयोग की किसी विस्तृत आधिकारिक प्रतिक्रिया का इंतजार रहेगा।