नई दिल्ली। कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के कार्यकर्ता सौरभ दास और आशुतोष रांका बुधवार, 21 अक्टूबर 2026 को तिहाड़ जेल से रिहा हो गए। दिल्ली की स्पेशल एग्जीक्यूटिव मजिस्ट्रेट (SEM) कोर्ट के आदेश के बाद दोनों कार्यकर्ता जेल से बाहर आए। करीब आठ दिनों की न्यायिक हिरासत के बाद मिली रिहाई पर उनके समर्थकों ने खुशी जताई। जेल से बाहर निकलते समय सौरभ दास ने मुट्ठी उठाकर अपना उत्साह दिखाया, जबकि आशुतोष रांका ने 'इंकलाब जिंदाबाद' के नारे लगाए। इसके बाद दोनों एक कार में बैठकर वहां से रवाना हो गए। सीजेपी की लीगल अफेयर्स हेड रत्ना सिंह ने अदालत के फैसले का स्वागत करते हुए कहा कि रिहाई में देरी जरूर हुई, लेकिन आखिरकार दोनों कार्यकर्ता जेल से बाहर आ गए हैं।
तिहाड़ जेल के बाहर दिखा अलग अंदाज
बुधवार शाम तिहाड़ जेल से बाहर आने के बाद सौरभ दास और आशुतोष रांका मीडिया के सामने आए। जेल से निकलते ही दोनों ने उत्साह व्यक्त किया।सौरभ दास ने अपनी मुट्ठी हवा में उठाई, जबकि आशुतोष रांका ने 'इंकलाब जिंदाबाद' का नारा लगाया। इस दौरान मौजूद लोगों ने दोनों की रिहाई पर खुशी जताई।हालांकि, दोनों ने मीडिया से लंबी बातचीत नहीं की। कुछ देर बाद वे अपनी कार में बैठे और वहां से चले गए।दोनों कार्यकर्ताओं की रिहाई सीजेपी के लिए महत्वपूर्ण घटनाक्रम माना जा रहा है, क्योंकि संगठन लगातार उनकी न्यायिक हिरासत को लेकर सवाल उठा रहा था।
रत्ना सिंह ने किया अदालत के फैसले का स्वागत
सीजेपी की कानूनी मामलों की प्रमुख रत्ना सिंह ने सौरभ दास और आशुतोष रांका की रिहाई पर खुशी व्यक्त की।समाचार एजेंसी एएनआई से बातचीत करते हुए उन्होंने कहा, "इसमें देरी जरूर हुई, लेकिन आखिरकार आज ये लड़के बाहर आ गए हैं।"रत्ना सिंह ने कहा कि संगठन के लिए दोनों कार्यकर्ताओं का जेल से बाहर आना महत्वपूर्ण है। उन्होंने बताया कि रिहाई की जानकारी मिलने के बाद संगठन के सदस्य काफी खुश हैं।उन्होंने कहा कि अदालत के आदेश का स्वागत किया गया है, हालांकि उस समय तक संगठन को आदेश की आधिकारिक प्रति प्राप्त नहीं हुई थी।
आदेश की कॉपी मिलने का कर रहे थे इंतजार
रत्ना सिंह ने बताया कि उन्हें पहले ही जानकारी दी गई थी कि दोनों कार्यकर्ताओं को जल्द रिहा किया जाएगा, लेकिन आदेश की प्रति अभी उपलब्ध नहीं हुई थीउन्होंने कहा कि संगठन अदालत के फैसले का सम्मान करता है और आदेश की आधिकारिक प्रति मिलने के बाद उसकी शर्तों का अध्ययन करेगा।रत्ना सिंह के अनुसार, आठ दिनों तक न्यायिक हिरासत में रहने के बाद दोनों कार्यकर्ताओं की रिहाई संगठन के लिए राहत की बात है।
जंतर-मंतर प्रदर्शन के बाद हुई थी गिरफ्तारी
सौरभ दास और आशुतोष रांका को 13 अक्टूबर को दिल्ली के जंतर-मंतर पर विरोध प्रदर्शन के दौरान हिरासत में लिया गया था। पुलिस के अनुसार, दोनों ने प्रतिबंधात्मक आदेशों और पहले दिए गए शांति बनाए रखने के बॉन्ड की शर्तों का कथित उल्लंघन किया था।14 अक्टूबर को उन्हें स्पेशल एग्जीक्यूटिव मजिस्ट्रेट के समक्ष पेश किया गया, जहां से पांच दिनों की न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया। इसके बाद 19 अक्टूबर को उनकी हिरासत दो दिन और बढ़ा दी गई थी। इस फैसले के बाद दोनों नेताओं की ओर से कानूनी चुनौती दी गई।
50 हजार रुपये के बॉन्ड पर मिली रिहाई
मंदिर मार्ग स्थित स्पेशल एग्जीक्यूटिव मजिस्ट्रेट की अदालत में बुधवार को दोनों कार्यकर्ताओं को पेश किया गया। दिल्ली पुलिस ने तीन दिनों की अतिरिक्त हिरासत की मांग की थी।हालांकि, अदालत ने दोनों की ओर से प्रस्तुत जमानती दस्तावेज स्वीकार करते हुए रिहाई का आदेश दिया। दोनों नेताओं को 50-50 हजार रुपये के निजी और जमानती बॉन्ड भरने की शर्त पर राहत मिली।रिहाई के लिए उन्हें शांति व्यवस्था बनाए रखने तथा जंतर-मंतर को दोबारा वैध प्रदर्शन स्थल घोषित किए जाने तक वहां विरोध प्रदर्शन आयोजित करने का आह्वान नहीं करने का लिखित आश्वासन भी देना पड़ा।
दिल्ली हाईकोर्ट में भी हुई थी सुनवाई
रिहाई से पहले दोनों नेताओं ने न्यायिक हिरासत बढ़ाने के आदेश को दिल्ली हाईकोर्ट में चुनौती दी थी।न्यायमूर्ति सुब्रमण्यम प्रसाद की अदालत ने सुनवाई के दौरान पूछा कि जब संबंधित आदेश के खिलाफ वैकल्पिक कानूनी उपाय उपलब्ध हैं, तो सीधे हाईकोर्ट का रुख क्यों किया गया।इसके बाद याचिकाकर्ताओं ने अपनी याचिका वापस ले ली। हाईकोर्ट ने मामले के गुण-दोष पर कोई अंतिम निर्णय नहीं दिया।
रिहाई के बाद संगठन में खुशी
दोनों नेताओं के जेल से बाहर आने के बाद सीजेपी कार्यकर्ताओं और समर्थकों ने राहत व्यक्त की। संगठन की लीगल अफेयर्स हेड रत्ना सिंह ने कहा कि न्यायिक हिरासत के दौरान दोनों की रिहाई के लिए लगातार कानूनी प्रयास किए गए।वहीं, तिहाड़ जेल से बाहर निकलते समय सौरभ दास और आशुतोष रांका ने अपने अंदाज में खुशी व्यक्त की। रांका के 'इंकलाब जिंदाबाद' के नारे और दास की उठी हुई मुट्ठी ने लोगों का ध्यान खींचा।हालांकि, अदालत से मिली राहत का अर्थ प्रदर्शन से संबंधित सभी कानूनी मामलों का समाप्त होना नहीं है। दोनों कार्यकर्ताओं को निर्धारित शर्तों का पालन करना होगा।