नई दिल्ली। केंद्रीय औद्योगिक सुरक्षा बल (CISF) के जवानों की साइबर सुरक्षा संबंधी क्षमताओं को मजबूत बनाने के उद्देश्य से आयोजित 12 सप्ताह का विशेष प्रशिक्षण कार्यक्रम गुरुवार, 8 अक्टूबर 2026 को संपन्न हो गया। यह प्रशिक्षण नई दिल्ली के रोहिणी सेक्टर-3 स्थित लोक नायक जयप्रकाश नारायण नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ क्रिमिनोलॉजी एंड फॉरेंसिक साइंस (LNJN-NICFS), नेशनल फॉरेंसिक साइंसेज यूनिवर्सिटी (NFSU) के दिल्ली परिसर में आयोजित किया गया था। प्रशिक्षण कार्यक्रम में विभिन्न एयरपोर्ट सिक्योरिटी ग्रुप्स (ASGs) से जुड़े कुल 40 CISF कर्मियों ने भाग लिया। कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य साइबर सुरक्षा और साइबर घटनाओं से निपटने के लिए सुरक्षाकर्मियों की तकनीकी समझ तथा कार्यक्षमता को मजबूत करना था।
यह विशेष प्रशिक्षण कार्यक्रम 13 जुलाई 2026 से शुरू हुआ था और 8 अक्टूबर 2026 को इसका समापन किया गया। लगभग तीन महीने तक चले इस प्रशिक्षण में एयरपोर्ट सुरक्षा से जुड़े CISF कर्मियों की भागीदारी रही। कार्यक्रम के माध्यम से सुरक्षाकर्मियों को साइबर सुरक्षा और घटना प्रतिक्रिया जैसे महत्वपूर्ण विषयों पर विशेष प्रशिक्षण उपलब्ध कराया गया।समापन समारोह में NFSU दिल्ली परिसर की डिप्टी डायरेक्टर मीनाक्षी सिन्हा, कर्नल निधीश भटनागर और CISF मुख्यालय के एआईजी/एपी-एनजेड सुब्रत झा सहित कई वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित रहे। इसके अलावा संस्थान के प्रतिष्ठित संकाय सदस्य और अन्य अधिकारियों ने भी समारोह में भाग लिया। कार्यक्रम का समापन प्रशिक्षण में शामिल कर्मियों और अधिकारियों की उपस्थिति में किया गया।
CISF देश के महत्वपूर्ण प्रतिष्ठानों की सुरक्षा व्यवस्था में प्रमुख भूमिका निभाता है। हवाई अड्डों सहित विभिन्न संवेदनशील संस्थानों में तैनात सुरक्षाकर्मियों के लिए आधुनिक तकनीकी चुनौतियों की जानकारी आवश्यक होती जा रही है। साइबर सुरक्षा के क्षेत्र में बढ़ती जटिलताओं को देखते हुए विशेष प्रशिक्षण कार्यक्रमों का महत्व भी बढ़ रहा है।हवाई अड्डों पर सुरक्षा की व्यवस्था अब केवल भौतिक सुरक्षा तक सीमित नहीं है। आधुनिक हवाई अड्डों में डिजिटल नेटवर्क, संचार प्रणाली, निगरानी उपकरण और तकनीकी बुनियादी ढांचे की महत्वपूर्ण भूमिका होती है। ऐसी व्यवस्थाओं के संचालन में साइबर सुरक्षा से जुड़े जोखिमों को समझना और किसी घटना की स्थिति में उचित प्रतिक्रिया देना आवश्यक माना जाता है।
इसी संदर्भ में CISF कर्मियों के लिए आयोजित प्रशिक्षण कार्यक्रम को महत्वपूर्ण माना जा रहा है। इसमें भाग लेने वाले सभी 40 कर्मी विभिन्न एयरपोर्ट सिक्योरिटी ग्रुप्स से जुड़े हुए थे। इस प्रकार प्रशिक्षण कार्यक्रम सीधे उन सुरक्षाकर्मियों से संबंधित रहा, जो हवाई अड्डों की सुरक्षा व्यवस्था में अपनी जिम्मेदारियां निभाते हैं।साइबर सुरक्षा और घटना प्रतिक्रिया एक ऐसा क्षेत्र है, जिसमें डिजिटल प्रणालियों को संभावित खतरों से सुरक्षित रखने के साथ किसी सुरक्षा संबंधी घटना की स्थिति में त्वरित और व्यवस्थित कार्रवाई का महत्व होता है। साइबर सुरक्षा के प्रति जागरूकता से कर्मचारियों को तकनीकी जोखिमों को समझने और निर्धारित सुरक्षा प्रक्रियाओं का पालन करने में सहायता मिल सकती है।
आज विभिन्न संस्थानों की कार्यप्रणाली डिजिटल तकनीक पर निर्भर है। संचार व्यवस्था, डेटा प्रबंधन और सुरक्षा उपकरणों के संचालन में तकनीकी प्रणालियों का उपयोग किया जाता है। ऐसे में साइबर सुरक्षा से जुड़ी समझ केवल सूचना प्रौद्योगिकी विशेषज्ञों तक सीमित नहीं रह गई है। महत्वपूर्ण प्रतिष्ठानों की सुरक्षा में तैनात कर्मचारियों के लिए भी इस विषय की जानकारी उपयोगी है।प्रशिक्षण कार्यक्रम में साइबर खतरों की पहचान, नेटवर्क सुरक्षा, सिस्टम सुरक्षा, डिजिटल फॉरेंसिक और साइबर घटनाओं की प्रतिक्रिया जैसे विषयों को शामिल किया गया। पाठ्यक्रम का उद्देश्य प्रतिभागियों को साइबर सुरक्षा से जुड़े प्रमुख तकनीकी क्षेत्रों की व्यापक जानकारी उपलब्ध कराना था। इससे सुरक्षाकर्मी डिजिटल सुरक्षा से संबंधित चुनौतियों को बेहतर तरीके से समझ सकेंगे।
डिजिटल फॉरेंसिक साइबर सुरक्षा का एक महत्वपूर्ण क्षेत्र है। इसके अंतर्गत इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों और डिजिटल प्रणालियों से जुड़े साक्ष्यों का वैज्ञानिक तरीके से विश्लेषण किया जाता है। साइबर घटना के बाद उसकी प्रकृति को समझने तथा संबंधित तकनीकी जानकारी जुटाने में डिजिटल फॉरेंसिक उपयोगी साबित हो सकती है। इसी प्रकार नेटवर्क और सिस्टम सुरक्षा से संबंधित जानकारी डिजिटल बुनियादी ढांचे की सुरक्षा के लिए आवश्यक मानी जाती है।
केंद्रीय औद्योगिक सुरक्षा बल की जिम्मेदारियां देश के अनेक महत्वपूर्ण प्रतिष्ठानों तक फैली हुई हैं। बल की आधिकारिक जानकारी के अनुसार, CISF देश के 70 हवाई अड्डों सहित 361 महत्वपूर्ण राष्ट्रीय प्रतिष्ठानों को सुरक्षा प्रदान करता है। इनमें परमाणु ऊर्जा संयंत्र, अंतरिक्ष प्रतिष्ठान, बंदरगाह, बिजली संयंत्र और अन्य रणनीतिक संस्थान भी शामिल हैं। ऐसे प्रतिष्ठानों की सुरक्षा में तकनीकी दक्षता का विशेष महत्व है।आधुनिक सुरक्षा व्यवस्था में डिजिटल खतरों की पहचान और उनसे निपटने की क्षमता महत्वपूर्ण हो गई है। साइबर हमलों के कारण डेटा, संचार प्रणालियों और डिजिटल सेवाओं पर प्रभाव पड़ सकता है। ऐसे में तकनीकी जानकारी रखने वाले सुरक्षाकर्मी संभावित जोखिमों को पहचानने और संबंधित विशेषज्ञ इकाइयों के साथ समन्वय स्थापित करने में अधिक प्रभावी भूमिका निभा सकते हैं।
NFSU दिल्ली परिसर में आयोजित इस प्रशिक्षण कार्यक्रम के माध्यम से सुरक्षा कर्मियों को शैक्षणिक और तकनीकी विशेषज्ञता से जुड़ने का अवसर मिला। राष्ट्रीय फॉरेंसिक विज्ञान विश्वविद्यालय का अध्ययन क्षेत्र फॉरेंसिक विज्ञान और उससे संबंधित तकनीकी विषयों से जुड़ा है। ऐसे संस्थानों और सुरक्षा बलों के बीच प्रशिक्षण सहयोग से पेशेवर दक्षता बढ़ाने में सहायता मिल सकती है।गुरुवार को आयोजित समापन समारोह के साथ 13 जुलाई से चल रहे इस विशेष पाठ्यक्रम का औपचारिक समापन हुआ। कार्यक्रम में शामिल वरिष्ठ अधिकारियों, संकाय सदस्यों और प्रशिक्षुओं की मौजूदगी ने इस पहल के महत्व को रेखांकित किया।CISF कर्मियों के लिए आयोजित यह 12 सप्ताह का प्रशिक्षण कार्यक्रम देश के महत्वपूर्ण प्रतिष्ठानों की सुरक्षा व्यवस्था में तकनीकी क्षमताओं को मजबूत करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल है। विभिन्न एयरपोर्ट सिक्योरिटी ग्रुप्स के 40 जवानों की भागीदारी के साथ संपन्न इस कार्यक्रम का प्रमुख उद्देश्य साइबर सुरक्षा, डिजिटल फॉरेंसिक और घटना प्रतिक्रिया से संबंधित ज्ञान विकसित करना रहा। डिजिटल तकनीक के बढ़ते उपयोग के बीच ऐसे विशेष प्रशिक्षण कार्यक्रम सुरक्षा बलों की तैयारियों को बेहतर बनाने में उपयोगी साबित हो सकते हैं।