देहरादून। उत्तराखंड के बहुचर्चित अंकिता भंडारी हत्याकांड में केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) की जांच को लेकर एक बार फिर गतिविधियां तेज हो गई हैं। शनिवार, 17 अक्टूबर 2026 को सीबीआई की एक टीम के पूर्व भाजपा विधायक सुरेश राठौर के आवास पर पहुंचने की जानकारी सामने आई है। यह घटनाक्रम अंकिता भंडारी के माता-पिता की दिल्ली स्थित सीबीआई मुख्यालय में वरिष्ठ अधिकारियों से मुलाकात के अगले दिन हुआ है। पीड़ित परिवार ने जांच एजेंसी से मामले के सभी पहलुओं की निष्पक्ष जांच करने और कथित वीआईपी की भूमिका स्पष्ट करने की मांग की है। हालांकि, सुरेश राठौर के आवास पर शनिवार की कार्रवाई का विस्तृत आधिकारिक विवरण अभी उपलब्ध नहीं है।
पूर्व विधायक सुरेश राठौर के आवास पर पहुंची जांच टीम
अंकिता भंडारी हत्याकांड में पूर्व विधायक सुरेश राठौर का नाम एक बार फिर चर्चा में है। शनिवार को उनके आवास पर सीबीआई टीम के पहुंचने की सूचना के बाद मामले में जांच की दिशा को लेकर सवाल उठने लगे हैं।फिलहाल यह स्पष्ट नहीं है कि टीम वहां पूछताछ, दस्तावेजों की जांच या किसी अन्य प्रक्रिया के लिए पहुंची थी।इससे पहले अंकिता के माता-पिता ने जांच एजेंसी से सुरेश राठौर और अभिनेत्री उर्मिला सनावर के नार्को टेस्ट की मांग की थी।परिवार का कहना है कि मामले से जुड़े कथित वायरल ऑडियो और अन्य जानकारियों की गहराई से जांच होनी चाहिए, ताकि पूरी सच्चाई सामने आ सके।
दिल्ली में CBI के वरिष्ठ अधिकारियों से मिले माता-पिता
शुक्रवार, 16 अक्टूबर को अंकिता के पिता वीरेंद्र सिंह भंडारी और माता सोनी देवी ने नई दिल्ली स्थित सीबीआई मुख्यालय में वरिष्ठ अधिकारियों से मुलाकात की।इस दौरान पौड़ी गढ़वाल के सांसद अनिल बलूनी भी उनके साथ मौजूद रहे।परिवार ने अधिकारियों को मामले से संबंधित विभिन्न पहलुओं की जानकारी दी और जांच में उठाए जाने वाले सवालों को सामने रखा।अधिकारियों ने परिवार को भरोसा दिलाया कि मामले के सभी संबंधित तथ्यों की निष्पक्ष और न्यायसंगत तरीके से जांच की जाएगी।
कथित वीआईपी की भूमिका की जांच की मांग
अंकिता भंडारी के माता-पिता लंबे समय से इस हत्याकांड में किसी प्रभावशाली व्यक्ति की कथित भूमिका की जांच की मांग कर रहे हैं।परिवार का आरोप है कि मामले में कुछ महत्वपूर्ण सवाल अब तक अनुत्तरित हैं। उनका कहना है कि जांच में उन सभी परिस्थितियों की पड़ताल होनी चाहिए, जिनका संबंध अंकिता की हत्या से हो सकता है।सीबीआई ने कथित वीआईपी की भूमिका की जांच के लिए अज्ञात व्यक्तियों के खिलाफ अलग मामला भी दर्ज किया है।हालांकि, किसी व्यक्ति का नाम जांच के दौरान सामने आने या उसके खिलाफ आरोप लगाए जाने का अर्थ अपराध में उसकी संलिप्तता साबित होना नहीं है।
क्या है अंकिता भंडारी हत्याकांड?
उत्तराखंड की रहने वाली 19 वर्षीय अंकिता भंडारी ऋषिकेश के पास स्थित वनंतरा रिजॉर्ट में रिसेप्शनिस्ट के रूप में काम करती थीं।सितंबर 2022 में उनकी हत्या कर दी गई थी। उनका शव चीला नहर से बरामद हुआ था।इस घटना के बाद उत्तराखंड सहित देशभर में विरोध प्रदर्शन हुए और आरोपियों के खिलाफ कठोर कार्रवाई की मांग उठी।मामले में रिजॉर्ट संचालक पुलकित आर्य और उसके दो सहयोगियों को गिरफ्तार किया गया था।बाद में अदालत ने तीनों को हत्या का दोषी ठहराते हुए आजीवन कारावास की सजा सुनाई। हालांकि, परिवार कथित वीआईपी से जुड़े पहलुओं की अलग से जांच की मांग करता रहा है।
नार्को टेस्ट कराने की मांग ने बढ़ाई हलचल
परिवार ने सीबीआई अधिकारियों से मुलाकात के दौरान पूर्व विधायक सुरेश राठौर और अभिनेत्री उर्मिला सनावर के नार्को टेस्ट की मांग भी उठाई।परिजनों का कहना है कि मामले से जुड़े वायरल ऑडियो और आरोपों की सत्यता सामने लाने के लिए विस्तृत जांच आवश्यक है।हालांकि, नार्को टेस्ट कराने के लिए कानूनी प्रक्रिया और संबंधित व्यक्ति की स्वैच्छिक सहमति जैसे महत्वपूर्ण प्रावधान लागू होते हैं।फिलहाल सीबीआई की ओर से इन व्यक्तियों का नार्को टेस्ट कराने के किसी अंतिम निर्णय की जानकारी सामने नहीं आई है।
चार साल बाद भी न्याय की मांग को लेकर आंदोलन
अंकिता भंडारी हत्याकांड को चार वर्ष से अधिक समय हो चुका है, लेकिन मामले के कुछ पहलुओं को लेकर परिवार की मांगें जारी हैं।हाल ही में अंकिता के माता-पिता ने दिल्ली के इंडिया गेट पर भी प्रदर्शन किया था। इस दौरान उन्होंने मामले की निष्पक्ष जांच और कथित वीआईपी की भूमिका स्पष्ट करने की मांग उठाई।लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी और कांग्रेस नेता प्रियंका गांधी ने भी प्रदर्शन के दौरान परिजनों से मुलाकात की थी।परिवार की मांगों को लेकर उत्तराखंड में भी राजनीतिक गतिविधियां और विरोध प्रदर्शन हुए हैं।
CBI की अगली कार्रवाई पर टिकी नजर
सीबीआई अधिकारियों ने अंकिता के माता-पिता को आश्वासन दिया है कि मामले से जुड़े सभी महत्वपूर्ण पहलुओं का परीक्षण किया जाएगा।परिवार ने उम्मीद जताई है कि जांच एजेंसी उन सवालों का जवाब तलाशेगी, जिन्हें लेकर वे लंबे समय से आवाज उठा रहे हैं।अब पूर्व विधायक सुरेश राठौर से संबंधित जांच की अगली कार्रवाई और कथित वीआईपी की भूमिका पर सीबीआई के निष्कर्ष का इंतजार रहेगा।इस बीच अंकिता भंडारी हत्याकांड एक बार फिर उत्तराखंड की राजनीति और न्याय की मांग को लेकर चर्चा के केंद्र में आ गया है।