NEW DELHI नई दिल्ली: विधानसभा अध्यक्ष विजेंद्र गुप्ता ने शुक्रवार को कहा कि पिछली आप सरकार के वित्त और विनियोग खातों पर नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक (सीएजी) की रिपोर्ट में सैकड़ों करोड़ रुपये के बिल और उपयोग प्रमाण पत्र जमा न करने और धन के दुरुपयोग का खतरा सामने आया है। मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने रिपोर्ट को जांच के लिए विधानसभा की लोक लेखा समिति (पीएसी) को भेज दिया है। वर्ष 2021-2022 के विनियोग खातों में सीएजी ने कुल 10,539 करोड़ रुपये की बचत की सूचना दी, जिसमें से 5,458 करोड़ रुपये देरी से सरेंडर करने के कारण लैप्स हो गए। इसी तरह, 2022-2023 में कुल 14,115.71 करोड़ रुपये की बचत हुई, जिसमें से 7,557.47 करोड़ रुपये देरी से सरेंडर करने के कारण लैप्स हो गए।
उन्होंने कहा कि इसका मतलब है कि अगर सरकार ने ठीक से योजना बनाई होती, तो राशि का इस्तेमाल लोगों के कल्याण के लिए किया जा सकता था। विधानसभा अध्यक्ष ने कहा कि वर्ष 2021-2022 में पाया गया कि विभिन्न विभागों द्वारा बिल जमा न किए जाने के कारण 432.42 करोड़ रुपए बकाया हैं। इससे पता चलता है कि यह पुष्टि करने का कोई तरीका नहीं है कि राशि वास्तव में विधानसभा द्वारा अनुमोदित के अनुसार खर्च की गई थी या नहीं। वर्ष 2022-23 की रिपोर्ट से पता चला है कि पुराने ऋणों के संबंध में, 31 मार्च, 2023 तक 1,55,805.74 करोड़ रुपए का पुनर्भुगतान बकाया था। इनमें से 1,49,468.97 करोड़ रुपए के ऋण 10 साल से अधिक पुराने हैं, अध्यक्ष ने कहा। यह राशि 2022-2023 में 574.89 करोड़ रुपए थी। गुप्ता ने कहा कि सीएजी ने 31 मार्च, 2023 तक 9,314.85 करोड़ रुपए के उपयोगिता प्रमाण पत्र जमा न करने पर भी चिंता व्यक्त की है, जिससे धन के दुरुपयोग का गंभीर खतरा है।
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