नई दिल्ली। पुरानी दिल्ली के हौज काजी इलाके में निर्माणाधीन तीन मंजिला इमारत ढहने से बड़ा हादसा हो गया। चावड़ी बाजार मेट्रो स्टेशन के पास गली सितारा में गुरुवार सुबह हुई इस घटना में अब तक छह मजदूरों की मौत हो चुकी है। शनिवार को बचाव अभियान के दौरान मलबे से चार और शव बरामद किए गए, जिसके बाद मृतकों की संख्या बढ़कर छह हो गई। हादसे के मामले में दिल्ली पुलिस ने तीन ठेकेदारों सिराज, ताजुद्दीन और फरकान को गिरफ्तार किया है। पुलिस और आपदा राहत दलों ने घटनास्थल पर बचाव अभियान चलाया।;यह हादसा 5 नवंबर 2026 को सुबह करीब 9:50 बजे हुआ था। इमारत में निर्माण कार्य चल रहा था और उस समय वहां करीब 10 से 15 मजदूर मौजूद थे। इसी दौरान भवन का एक हिस्सा अचानक भरभराकर गिर गया। देखते ही देखते पूरी निर्माणाधीन संरचना मलबे में तब्दील हो गई। हादसे के बाद आसपास के इलाके में अफरा-तफरी मच गई और स्थानीय लोग मदद के लिए घटनास्थल पर पहुंचे।मलबे में दबे मजदूरों को निकालने के लिए चला अभियानइमारत गिरने की सूचना मिलते ही दिल्ली पुलिस, राष्ट्रीय आपदा मोचन बल (NDRF), दिल्ली अग्निशमन सेवा और नगर निगम की टीमें मौके पर पहुंचीं। बचाव दलों ने भारी मशीनों और अन्य उपकरणों की मदद से मलबा हटाने का काम शुरू किया।शुरुआत में मलबे से चार लोगों को बाहर निकाला गया था। इनमें दो मजदूरों की मौत हो गई, जबकि दो घायलों को अस्पताल पहुंचाया गया। इसके बाद लगातार तलाशी अभियान चलाया गया। शनिवार को भी बचाव दलों ने मलबे में फंसे लोगों की तलाश जारी रखी और चार अन्य शव बरामद किए। इस तरह हादसे में मृतकों की संख्या छह पहुंच गई।
छह मृतकों की हुई पहचान
इस हादसे में जान गंवाने वाले मजदूरों में किशोरी साह और संजीत कुमार के अलावा पंकज शर्मा, विपिन राम, शांतु और दिनेश साह के नाम सामने आए हैं। इनमें कई मजदूर बिहार के खगड़िया और सहरसा जिलों के रहने वाले थे।बताया गया कि मृतक मजदूर दिल्ली में रहकर निर्माण कार्य में लगे हुए थे। वे अपने परिवारों की आजीविका चलाने के लिए मजदूरी करते थे। हादसे में परिवारों के कमाने वाले सदस्यों की मौत से उनके घरों पर दुखों का पहाड़ टूट पड़ा है।मृतकों के परिजनों के सामने अब परिवार के भरण-पोषण और बच्चों की जिम्मेदारी का संकट खड़ा हो गया है। हादसे के बाद श्रमिकों की सुरक्षा और निर्माण स्थलों पर नियमों के पालन को लेकर भी सवाल उठ रहे हैंतीन ठेकेदार गिरफ्तार, फरीदाबाद से पकड़े गए आरोपीदिल्ली पुलिस ने मामले में कार्रवाई करते हुए तीन ठेकेदारों को गिरफ्तार किया है। आरोपियों की पहचान सिराज, ताजुद्दीन और फरकान के रूप में हुई है। पुलिस ने इन्हें हरियाणा के फरीदाबाद जिले के सिरोही गांव से पकड़ा।पुलिस के अनुसार, तीनों आरोपी पुरानी दिल्ली के अजमेरी गेट इलाके के रहने वाले हैं। हादसे के बाद उनके मौके से फरार होने की बात भी सामने आई थी। इनके खिलाफ भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 105 के तहत गैर इरादतन हत्या का मामला दर्ज किया गया है।जांच में यह भी सामने आया कि निर्माण कार्य का ठेका पहले सिराज के पास था, जिसे बाद में फरकान को सौंप दिया गया था। पुलिस अब यह पता लगाने में जुटी है कि निर्माण कार्य में किसकी क्या भूमिका थी और सुरक्षा मानकों की अनदेखी किस स्तर पर हुई।
बिना मंजूरी के हो रहा था निर्माण
इस हादसे के बाद दिल्ली नगर निगम की कार्यप्रणाली और निर्माण संबंधी अनुमति को लेकर गंभीर सवाल उठे हैं। निगम के एक अधिकारी के अनुसार, करीब 50 वर्गमीटर के भूखंड पर निर्माणाधीन इमारत के लिए कोई भवन नक्शा स्वीकृत नहीं कराया गया था।आरोप है कि आवश्यक अनुमति के बिना ही तीन मंजिला इमारत का निर्माण कराया जा रहा था। निर्माण कार्य तीसरी मंजिल तक पहुंच चुका था और छत की स्लैब डालने का काम चल रहा था। इसी दौरान पूरी संरचना ढह गई।प्रारंभिक जांच में निर्माण सामग्री के इंजीनियरिंग मानकों के अनुरूप नहीं होने की बात भी सामने आई है। अधिकारियों के अनुसार, इस्तेमाल की गई सामग्री ठीक से सेट नहीं हुई थी। इसके अलावा स्लैब डालने के कुछ ही दिनों बाद आगे का निर्माण कार्य शुरू किए जाने की आशंका भी जताई गई है।जून में ही पुलिस ने MCD को किया था आगाहइस मामले में सबसे गंभीर पहलू यह सामने आया है कि दिल्ली पुलिस ने हादसे से करीब पांच महीने पहले ही संबंधित संपत्ति पर हो रहे कथित अवैध निर्माण के बारे में नगर निगम को सूचना दी थी।जानकारी के अनुसार, 15 जून 2026 को हौज काजी थाने के तत्कालीन एसएचओ ने एमसीडी के सिटी सदर पहाड़गंज जोन को पत्र लिखकर निर्माण कार्य की जानकारी दी थी। पत्र में फरकान का नाम ठेकेदार के रूप में भी बताया गया था।इसके बावजूद निर्माण कार्य जारी रहने और बाद में इमारत गिरने से प्रशासनिक निगरानी पर सवाल खड़े हो गए हैं। अब जांच में यह भी देखा जा रहा है कि पुलिस की चेतावनी के बाद नगर निगम ने क्या कार्रवाई की थी और अवैध निर्माण को रोकने के लिए समय रहते कदम क्यों नहीं उठाए गए।
CM रेखा गुप्ता ने दिए जांच के आदेश
हादसे के बाद दिल्ली की मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने मामले को गंभीरता से लेते हुए जांच के निर्देश दिए। संबंधित विभाग के दो सिविल इंजीनियरों को निलंबित करने का आदेश भी दिया गया। इसके अलावा ठेकेदार के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज कराने के निर्देश दिए गए।मुख्यमंत्री ने निर्माण कार्यों में सुरक्षा मानकों और नियमों के पालन को लेकर जवाबदेही सुनिश्चित करने पर जोर दिया। प्रशासन की ओर से यह भी जांच की जा रही है कि संबंधित अधिकारियों को अवैध निर्माण की जानकारी थी या नहीं और उनके स्तर पर क्या कार्रवाई की गई थी।आसपास की इमारतों की सुरक्षा को लेकर भी चिंतापुरानी दिल्ली का हौज काजी और चावड़ी बाजार इलाका घनी आबादी वाला क्षेत्र है। यहां कई इमारतें एक-दूसरे से सटी हुई हैं और गलियां काफी संकरी हैं। ऐसे में किसी निर्माणाधीन इमारत के गिरने से आसपास की इमारतों पर भी खतरा पैदा हो सकता है।हादसे के बाद आसपास की संरचनाओं की स्थिरता को लेकर भी चिंता जताई गई। प्रशासन और बचाव दलों को मलबा हटाने के दौरान विशेष सावधानी बरतनी पड़ी।इस घटना ने एक बार फिर अनधिकृत निर्माण, घटिया निर्माण सामग्री और मजदूरों की सुरक्षा को लेकर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। पुलिस अब गिरफ्तार ठेकेदारों से पूछताछ कर निर्माण कार्य से जुड़े दस्तावेजों और जिम्मेदार लोगों की भूमिका की जांच कर रही है।
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