New दिल्ली : बॉर्डर सिक्योरिटी फोर्स (BSF) ने पश्चिमी सीमा पर सुरक्षा व्यवस्था और मजबूत करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम उठाने के निर्देश दिए हैं। गृह मंत्रालय के हालिया निर्देशों के अनुरूप एक मजबूत बॉर्डर सिक्योरिटी ग्रिड तैयार करने, आधुनिक तकनीक और इंटेलिजेंस का बेहतर इस्तेमाल करने तथा सीमा पार नशीले पदार्थों की तस्करी के खिलाफ अभियान तेज करने पर जोर दिया गया है। BSF के डायरेक्टर जनरल प्रवीण कुमार ने गांधीनगर स्थित गुजरात फ्रंटियर मुख्यालय में वरिष्ठ अधिकारियों के साथ बैठक के दौरान पश्चिमी सीमा की सुरक्षा और ऑपरेशनल तैयारियों की समीक्षा की।
बैठक में पश्चिमी सीमा से जुड़े कई महत्वपूर्ण सुरक्षा विषयों पर विस्तार से चर्चा हुई। इनमें सीमा सुरक्षा ग्रिड को और मजबूत करना, बॉर्डर इंफ्रास्ट्रक्चर में सुधार, घुसपैठ रोकने के उपाय, सीमा पार तस्करी और बदलती सुरक्षा चुनौतियां शामिल रहीं। अधिकारियों को गृह मंत्रालय के हालिया निर्देशों को प्रभावी तरीके से लागू करने पर विशेष ध्यान देने को कहा गया।
BSF महानिदेशक ने अधिकारियों से कहा कि सीमावर्ती इलाकों में प्रभावी नियंत्रण बनाए रखने के लिए मानव संसाधन, आधुनिक तकनीक और खुफिया जानकारी का समन्वित इस्तेमाल किया जाए। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि केवल जवानों की तैनाती ही पर्याप्त नहीं है, बल्कि तकनीकी निगरानी और समय पर मिलने वाली इंटेलिजेंस को भी सीमा प्रबंधन का अहम हिस्सा बनाया जाए।
आधुनिक तकनीक के जरिए सीमा पर संदिग्ध गतिविधियों की निगरानी और तेज की जा सकती है। संवेदनशील इलाकों में निगरानी उपकरणों, आधुनिक संचार व्यवस्था और अन्य तकनीकी संसाधनों का इस्तेमाल बढ़ाने पर जोर दिया गया। इसका उद्देश्य घुसपैठ या तस्करी की किसी भी कोशिश का जल्द पता लगाना और उस पर तेजी से कार्रवाई करना है।
बैठक में अलग-अलग सुरक्षा एजेंसियों, केंद्रीय बलों और स्थानीय प्रशासन के बीच बेहतर तालमेल को भी महत्वपूर्ण बताया गया। DG BSF ने कहा कि बॉर्डर मैनेजमेंट को मजबूत बनाने के लिए एजेंसियों के बीच सूचनाओं का समय पर आदान-प्रदान और संयुक्त कार्रवाई जरूरी है। इससे सीमावर्ती क्षेत्रों में उभरने वाली चुनौतियों का तेजी से सामना किया जा सकेगा।
पश्चिमी सीमा पर घुसपैठ रोकना बैठक के प्रमुख मुद्दों में शामिल रहा। अधिकारियों ने मौजूदा सुरक्षा इंतजामों की समीक्षा की और ऐसे इलाकों पर विशेष ध्यान देने को कहा जहां भौगोलिक परिस्थितियों के कारण निगरानी मुश्किल होती है। इन क्षेत्रों में तकनीकी संसाधनों और बेहतर गश्त के माध्यम से सुरक्षा मजबूत करने की रणनीति पर चर्चा की गई।
इसके साथ ही सीमा पार तस्करी पर लगाम लगाने को लेकर भी विस्तृत मंथन हुआ। पश्चिमी सीमा के कुछ हिस्सों में नशीले पदार्थों की तस्करी सुरक्षा एजेंसियों के लिए बड़ी चुनौती रही है। BSF नेतृत्व ने इस नेटवर्क को तोड़ने के लिए लगातार और समन्वित कार्रवाई करने के निर्देश दिए।
बैठक में सरकार के ‘नशा मुक्त भारत 2029’ लक्ष्य का भी उल्लेख किया गया। DG BSF प्रवीण कुमार ने सीमा पार से होने वाली नशीले पदार्थों की तस्करी में शामिल नेटवर्क को पहचानने, उनकी गतिविधियों को बाधित करने और उन्हें खत्म करने के लिए लगातार अभियान चलाने पर जोर दिया। गृह मंत्रालय ने जून 2026 में ड्रग नियंत्रण से जुड़े 2026-2029 विजन डॉक्यूमेंट को भी आगे बढ़ाया था।
BSF के अधिकारियों को ड्रग तस्करी के मामलों में केवल जब्ती तक सीमित न रहने, बल्कि पूरे नेटवर्क की जानकारी जुटाने पर भी जोर देने को कहा गया। इसमें तस्करों के संपर्क, रूट, स्थानीय मददगार और अन्य संभावित कड़ियों का पता लगाना शामिल है। इंटेलिजेंस एजेंसियों और स्थानीय पुलिस के साथ बेहतर तालमेल को इस दिशा में अहम माना गया।
पश्चिमी सीमा पर इंफ्रास्ट्रक्चर को मजबूत करने पर भी बैठक में विशेष चर्चा हुई। बेहतर सीमा चौकियों, संचार व्यवस्था, सड़कों और निगरानी सुविधाओं के जरिए जवानों की ऑपरेशनल क्षमता बढ़ाने की जरूरत बताई गई। कठिन भौगोलिक इलाकों में बेहतर आधारभूत सुविधाओं से गश्त और त्वरित कार्रवाई में मदद मिल सकती है।
DG BSF ने ऑपरेशनल तैयारियों की भी समीक्षा की। उन्होंने अधिकारियों से यह सुनिश्चित करने को कहा कि संवेदनशील क्षेत्रों में तैनात जवान किसी भी परिस्थिति से निपटने के लिए तैयार रहें। इसके लिए नियमित प्रशिक्षण, अभ्यास और तकनीकी उपकरणों के बेहतर इस्तेमाल पर जोर दिया गया।
इससे पहले मई 2026 में गृह मंत्री अमित शाह ने भी गुजरात और राजस्थान से जुड़े पश्चिमी सीमावर्ती क्षेत्रों में सुरक्षा समीक्षा बैठकें की थीं। गृह मंत्रालय की ओर से सीमा सुरक्षा, बॉर्डर आउट पोस्ट और इंफ्रास्ट्रक्चर को मजबूत करने पर लगातार जोर दिया जा रहा है।
गांधीनगर में हुई बैठक के बाद BSF महानिदेशक ने नेशनल अकादमी ऑफ कोस्टल पुलिसिंग (NACP), ओखा का भी दौरा किया। यहां उन्होंने प्रशिक्षण कार्यक्रमों की प्रगति, प्रस्तावित इंफ्रास्ट्रक्चर परियोजनाओं और प्रशिक्षकों तथा स्टाफ की उपलब्धता की समीक्षा की। इस दौरान उन्होंने परिसर में पौधरोपण कार्यक्रम में भी हिस्सा लिया और जवानों तथा कर्मचारियों के साथ भोजन किया।
कुल मिलाकर BSF की इस समीक्षा बैठक में पश्चिमी सीमा को आधुनिक तकनीक, मजबूत खुफिया तंत्र और बेहतर अंतर-एजेंसी समन्वय के जरिए और सुरक्षित बनाने पर फोकस रहा। घुसपैठ, सीमा पार तस्करी और ड्रग नेटवर्क जैसी चुनौतियों से निपटने के लिए आने वाले समय में तकनीक और इंटेलिजेंस आधारित ऑपरेशन को और बढ़ाया जाएगा।