नई दिल्ली। भारतीय जनता पार्टी ने शनिवार को कांग्रेस द्वारा राष्ट्रगीत ‘वंदे मातरम’ के केवल दो पद गाए जाने के फैसले की कड़ी आलोचना की। पार्टी की नई टीम के पदाधिकारियों की बैठक में इस मुद्दे पर एक प्रस्ताव पारित किया गया, जिसमें भाजपा ने कहा कि राष्ट्रीय गीत के सम्मान से राजनीतिक लाभ या तुष्टीकरण के लिए किसी भी तरह का समझौता स्वीकार नहीं किया जाएगा।
भाजपा ने अपने प्रस्ताव में कांग्रेस पर राष्ट्रगीत के सम्मान को लेकर दोहरे मापदंड अपनाने का आरोप लगाया। पार्टी ने कहा कि राष्ट्रीय प्रतीकों और संवैधानिक मूल्यों का सम्मान सभी राजनीतिक दलों की जिम्मेदारी है। किसी भी राजनीतिक दल को देश की संवैधानिक संस्थाओं और कानून से ऊपर नहीं माना जा सकता।
कांग्रेस के फैसले की निंदा
बैठक में पारित प्रस्ताव में भाजपा ने कांग्रेस के उस फैसले पर आपत्ति जताई, जिसमें ‘वंदे मातरम’ के केवल दो पदों को गाने की बात सामने आई है। भाजपा ने इसे राष्ट्रगीत के सम्मान से जोड़ते हुए कांग्रेस पर राजनीतिक हितों के लिए राष्ट्रीय भावना से जुड़े विषयों से समझौता करने का आरोप लगाया।
भाजपा का कहना है कि ‘वंदे मातरम’ भारत के स्वतंत्रता आंदोलन और राष्ट्रीय चेतना से गहराई से जुड़ा हुआ है। पार्टी ने कहा कि राष्ट्रगीत के प्रति सम्मान केवल किसी राजनीतिक दल की विचारधारा का विषय नहीं, बल्कि देश की राष्ट्रीय भावना से जुड़ा मुद्दा है।
राजनीतिक लाभ के लिए समझौता नहीं
भाजपा ने प्रस्ताव में स्पष्ट किया कि वह राजनीतिक लाभ, वोट बैंक की राजनीति या तुष्टीकरण के नाम पर राष्ट्रीय गीत के सम्मान से समझौता स्वीकार नहीं करेगी। पार्टी ने कांग्रेस पर निशाना साधते हुए कहा कि राष्ट्रीय प्रतीकों के मामले में राजनीति से ऊपर उठकर राष्ट्रीय भावना को प्राथमिकता दी जानी चाहिए।
पार्टी नेताओं ने कहा कि देश की एकता और अखंडता से जुड़े प्रतीकों को राजनीतिक समीकरणों के आधार पर नहीं देखा जाना चाहिए। भाजपा का आरोप है कि कांग्रेस का रुख राष्ट्रीय गीत को लेकर उसकी प्रतिबद्धता पर सवाल खड़े करता है।
संवैधानिक संस्थाओं से ऊपर नहीं हो सकती कांग्रेस
भाजपा के प्रस्ताव में यह भी कहा गया कि कांग्रेस देश की संवैधानिक संस्थाओं और कानूनों से ऊपर नहीं हो सकती। पार्टी ने इस बात पर जोर दिया कि लोकतांत्रिक व्यवस्था में सभी राजनीतिक दलों और नागरिकों को संविधान तथा कानून का सम्मान करना होता है।
भाजपा ने कहा कि राष्ट्रीय प्रतीकों के सम्मान से जुड़े विषयों पर राजनीतिक दलों को जिम्मेदारी और संवेदनशीलता के साथ अपना रुख रखना चाहिए। पार्टी ने कांग्रेस के रवैये को लेकर अपने कार्यकर्ताओं और समर्थकों के बीच भी इस मुद्दे को प्रमुखता से उठाने के संकेत दिए।
नई टीम की पहली बड़ी बैठक
यह प्रस्ताव भाजपा के नए पदाधिकारियों की बैठक के दौरान पारित किया गया। बैठक में पार्टी की आगामी राजनीतिक और संगठनात्मक रणनीति पर चर्चा हुई। ‘वंदे मातरम’ को लेकर कांग्रेस के फैसले के खिलाफ भाजपा ने देशभर में राजनीतिक अभियान और जनसंपर्क गतिविधियों को आगे बढ़ाने की रणनीति पर भी जोर दिया।
पार्टी नेतृत्व का मानना है कि राष्ट्रगीत से जुड़ा मुद्दा व्यापक जनभावना से जुड़ा है। ऐसे में भाजपा इसे राजनीतिक और वैचारिक स्तर पर प्रमुखता से उठाने की तैयारी कर रही है।
स्वतंत्रता आंदोलन से जुड़ा है वंदे मातरम
‘वंदे मातरम’ भारतीय स्वतंत्रता आंदोलन के दौरान राष्ट्रीय चेतना जगाने वाले प्रमुख गीतों में रहा है। इसे लेकर देश में लंबे समय से भावनात्मक जुड़ाव रहा है। भाजपा इसी ऐतिहासिक और राष्ट्रीय महत्व को आधार बनाकर कांग्रेस के फैसले की आलोचना कर रही है।
पार्टी का कहना है कि राष्ट्रगीत को लेकर किसी भी तरह का विवाद राष्ट्रीय एकता और सम्मान की भावना को प्रभावित कर सकता है। इसलिए राजनीतिक दलों को ऐसे विषयों पर सावधानी बरतनी चाहिए।
कांग्रेस से जवाब की उम्मीद
भाजपा के प्रस्ताव के बाद अब कांग्रेस की ओर से प्रतिक्रिया का इंतजार है। भाजपा के आरोपों पर कांग्रेस का पक्ष सामने आने के बाद राजनीतिक बहस और तेज होने की संभावना है।
इस पूरे विवाद ने एक बार फिर राष्ट्रीय प्रतीकों, राजनीतिक दलों की भूमिका और तुष्टीकरण की राजनीति को लेकर बहस छेड़ दी है। भाजपा इसे राष्ट्रीय सम्मान से जोड़ रही है, जबकि इस मुद्दे पर कांग्रेस का विस्तृत रुख सामने आना बाकी है।
देशभर में अभियान की तैयारी
भाजपा ने संकेत दिया है कि वह इस विषय को केवल पार्टी मंच तक सीमित नहीं रखेगी। पार्टी कार्यकर्ताओं के माध्यम से इसे आम जनता तक पहुंचाने और ‘वंदे मातरम’ के ऐतिहासिक महत्व को सामने रखने की तैयारी की जा रही है।
भाजपा का कहना है कि राष्ट्रीय गीत का सम्मान किसी राजनीतिक दल की सुविधा या राजनीतिक गणित पर निर्भर नहीं होना चाहिए। पार्टी ने अपने प्रस्ताव में दोहराया कि राजनीतिक लाभ अथवा तुष्टीकरण के लिए राष्ट्रीय सम्मान से समझौता स्वीकार नहीं किया जाएगा। अब देखना होगा कि कांग्रेस इस प्रस्ताव और भाजपा के आरोपों पर किस तरह प्रतिक्रिया देती है।