नई दिल्ली : 23 अक्टूबर 2026। भारतीय जनता पार्टी (BJP) के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन ने शुक्रवार को शिक्षा व्यवस्था में भारतीय संस्कृति, आधुनिक तकनीक और नवाचार को समान महत्व देने की आवश्यकता पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि देश की शिक्षा प्रणाली ऐसी होनी चाहिए, जो विद्यार्थियों को केवल किताबी ज्ञान तक सीमित न रखे, बल्कि उन्हें पाठ्येतर गतिविधियों, नई तकनीकों और भारतीय परंपराओं से भी जोड़े। उन्होंने कहा कि वर्ष 2047 तक भारत को विकसित राष्ट्र बनाने के लक्ष्य में युवा पीढ़ी की महत्वपूर्ण भूमिका होगी।दिल्ली स्थित सीएसकेएम पब्लिक स्कूल के 41वें स्थापना दिवस समारोह को संबोधित करते हुए नितिन नवीन ने शिक्षा के विभिन्न पहलुओं पर अपने विचार रखे। उन्होंने कहा कि विद्यार्थियों को ऐसी शिक्षा मिलनी चाहिए, जिससे उनका सर्वांगीण विकास हो और वे भविष्य में देश की प्रगति में सक्रिय योगदान दे सकें।
शिक्षा के साथ संस्कृति से जुड़ना जरूरी
नितिन नवीन ने अपने संबोधन में कहा कि वर्तमान समय में शिक्षा का उद्देश्य केवल परीक्षा पास करना या डिग्री हासिल करना नहीं होना चाहिए। विद्यार्थियों को आधुनिक ज्ञान के साथ भारतीय संस्कृति और जीवन मूल्यों की जानकारी भी मिलनी चाहिए।उन्होंने कहा, "शिक्षा प्रणाली ऐसी होनी चाहिए कि छात्र हॉस्टल में रहते हुए पाठ्येतर गतिविधियां सीखें, नए नवाचारों के बारे में जानें और हमारी संस्कृति से जुड़े रहें। मेरा मानना है कि यही प्रणाली भविष्य के भारत का निर्माण करेगी।"उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि विद्यार्थियों को पढ़ाई के अलावा खेलकूद, सांस्कृतिक कार्यक्रमों, रचनात्मक गतिविधियों और नई तकनीकों से संबंधित जानकारी प्राप्त करने के अवसर मिलने चाहिए।
विकसित भारत 2047 के लक्ष्य पर दिया जोर
भाजपा अध्यक्ष ने वर्ष 2047 तक भारत को विकसित राष्ट्र बनाने के लक्ष्य का उल्लेख करते हुए कहा कि इस दिशा में शिक्षा की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण है।उन्होंने कहा कि आने वाली पीढ़ी को ऐसे ज्ञान और कौशल से लैस करना आवश्यक है, जो भविष्य की चुनौतियों का सामना करने में उनकी मदद कर सकें।नवीन ने 'भारतीय दर्शन' की अवधारणा पर चर्चा करते हुए कहा कि विद्यार्थियों को यह समझना चाहिए कि देश की वास्तविक जरूरतें क्या हैं और भारत के विकास में उनका योगदान किस प्रकार हो सकता है।उन्होंने कहा कि युवा पीढ़ी को अपनी सांस्कृतिक पहचान बनाए रखते हुए आधुनिक विज्ञान, तकनीक और नवाचार की दिशा में आगे बढ़ना चाहिए।
अपने पुराने स्कूल पहुंचकर जताई खुशी
कार्यक्रम के दौरान नितिन नवीन ने सीएसकेएम पब्लिक स्कूल से जुड़े अपने पुराने दिनों को भी याद किया। उन्होंने कहा कि इस संस्थान का पूर्व छात्र होने के कारण स्थापना दिवस समारोह में शामिल होना उनके लिए विशेष अवसर है।उन्होंने कहा, "मुझे खुशी है कि मैं इस स्कूल का पूर्व छात्र हूं।"उल्लेखनीय है कि नितिन नवीन ने वर्ष 1998 में दिल्ली के सीएसकेएम पब्लिक स्कूल से अपनी बारहवीं की शिक्षा पूरी की थी। विद्यालय के पूर्व छात्र संघ के रिकॉर्ड में भी उनका नाम दर्ज है।
विद्यार्थियों के सर्वांगीण विकास पर जोर
सीएसकेएम पब्लिक स्कूल के शैक्षणिक दृष्टिकोण में भी विद्यार्थियों के संपूर्ण व्यक्तित्व विकास को महत्वपूर्ण स्थान दिया गया है। संस्थान का उद्देश्य बच्चों में आत्मविश्वास, स्वतंत्र सोच, रचनात्मकता और समस्याओं का समाधान खोजने की क्षमता विकसित करना है।नितिन नवीन ने अपने संबोधन में इसी प्रकार की शिक्षा व्यवस्था की आवश्यकता बताई, जिसमें विद्यार्थी अकादमिक शिक्षा के साथ व्यावहारिक अनुभव भी हासिल कर सकें।उन्होंने कहा कि स्कूलों और शैक्षणिक संस्थानों की जिम्मेदारी ऐसी पीढ़ी तैयार करने की है, जो आधुनिक दुनिया में प्रतिस्पर्धा कर सके और अपनी सांस्कृतिक विरासत का सम्मान भी करे।
भैरों सिंह शेखावत को दी श्रद्धांजलि
शुक्रवार को अपने कार्यक्रमों के दौरान नितिन नवीन ने भारत के पूर्व उपराष्ट्रपति और राजस्थान के पूर्व मुख्यमंत्री भैरों सिंह शेखावत को भी श्रद्धांजलि अर्पित की।नवीन ने शिक्षा, भारतीय दर्शन और राष्ट्र निर्माण को एक-दूसरे से जुड़े महत्वपूर्ण विषय बताया। उनका कहना था कि विद्यार्थियों को बचपन से ही ऐसी दिशा मिलनी चाहिए, जिससे वे भविष्य में जिम्मेदार नागरिक बन सकें।उन्होंने कहा कि विकसित भारत का लक्ष्य हासिल करने के लिए आने वाली पीढ़ी को ज्ञान, कौशल, नवाचार और सांस्कृतिक मूल्यों के साथ आगे बढ़ना होगा। इसी सोच के आधार पर शिक्षा व्यवस्था को भविष्य की आवश्यकताओं के अनुरूप तैयार करने की जरूरत है।