New Delhi नई दिल्ली : भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के सांसद दिनेश शर्मा ने ‘वंदे मातरम’ गीत के अपमान या उसमें बाधा डालने पर कार्रवाई से जुड़े प्रस्तावित विधेयक का समर्थन किया है। उन्होंने कहा कि संसद में पेश होने वाले किसी भी कानून का उद्देश्य देश की एकता, सम्मान और लोकतांत्रिक व्यवस्था को मजबूत करना होना चाहिए।
भाजपा सांसद दिनेश शर्मा ने कहा कि ‘वंदे मातरम’ केवल एक गीत नहीं है, बल्कि यह भारत के स्वतंत्रता आंदोलन और राष्ट्रीय भावना से जुड़ा हुआ एक महत्वपूर्ण प्रतीक है। उन्होंने कहा कि आजादी की लड़ाई के दौरान इस गीत ने लाखों लोगों को त्याग, संघर्ष और बलिदान के लिए प्रेरित किया था।
दिनेश शर्मा ने प्रस्तावित बिल को लेकर कहा कि अगर किसी राष्ट्रीय प्रतीक या ऐसे गीत का जानबूझकर अपमान किया जाता है, जिसने देश के इतिहास में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है, तो उसके लिए कानूनी प्रावधान होना जरूरी है। उन्होंने कहा कि इस तरह के कानून का उद्देश्य किसी धर्म, समुदाय या संप्रदाय के खिलाफ कार्रवाई करना नहीं होना चाहिए, बल्कि राष्ट्रीय सम्मान और एकता को बनाए रखना होना चाहिए।
उन्होंने कहा कि भारत एक लोकतांत्रिक देश है, जहां हर नागरिक को अपनी बात रखने का अधिकार है। लेकिन साथ ही देश के गौरव और ऐतिहासिक महत्व रखने वाले प्रतीकों का सम्मान करना भी हर नागरिक की जिम्मेदारी है। उन्होंने कहा कि किसी भी विधायी पहल को इसी भावना के साथ देखा जाना चाहिए।
‘वंदे मातरम’ गीत का इतिहास भारतीय स्वतंत्रता संग्राम से जुड़ा हुआ है। यह गीत बंकिम चंद्र चट्टोपाध्याय द्वारा लिखा गया था और बाद में स्वतंत्रता आंदोलन के दौरान यह देशवासियों के लिए प्रेरणा का स्रोत बना। स्वतंत्रता सेनानियों ने इस गीत को अंग्रेजी शासन के खिलाफ संघर्ष के दौरान जोश और उत्साह के प्रतीक के रूप में इस्तेमाल किया।
दिनेश शर्मा ने कहा कि देश की एकता और अखंडता को बनाए रखने के लिए राष्ट्रीय भावना से जुड़े विषयों पर गंभीरता से विचार किया जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि संसद में आने वाले विधेयकों का उद्देश्य समाज में सकारात्मक बदलाव लाना और देश के मूल्यों को मजबूत करना होना चाहिए।
उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि किसी भी कानून को लागू करते समय संविधान में दिए गए अधिकारों और लोकतांत्रिक मूल्यों का ध्यान रखना जरूरी है। उन्होंने कहा कि भारत की विविधता उसकी ताकत है और किसी भी कदम का उद्देश्य लोगों को जोड़ना होना चाहिए, न कि विभाजन पैदा करना।
इस मुद्दे को लेकर राजनीतिक हलकों में भी चर्चा शुरू हो गई है। जहां भाजपा नेता इसे राष्ट्रीय सम्मान से जुड़ा विषय बता रहे हैं, वहीं विपक्षी दलों की ओर से इस तरह के कानूनों को लेकर अलग-अलग प्रतिक्रियाएं सामने आ सकती हैं।
फिलहाल, ‘वंदे मातरम’ से जुड़े प्रस्तावित विधेयक को लेकर बहस जारी है। समर्थकों का कहना है कि इससे राष्ट्रीय प्रतीकों के सम्मान को बढ़ावा मिलेगा, जबकि आलोचक ऐसे प्रावधानों को लेकर लोकतांत्रिक अधिकारों और अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता पर चर्चा कर सकते हैं।
दिनेश शर्मा के बयान के बाद यह मुद्दा एक बार फिर राजनीतिक और सामाजिक चर्चा के केंद्र में आ गया है। आने वाले समय में संसद में इस विषय पर होने वाली बहस और सरकार की ओर से उठाए जाने वाले कदमों पर सभी की नजर रहेगी।