INDIA गठबंधन की रैली में बड़ा हंगामा, CEC ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग
नई दिल्ली। राजधानी दिल्ली में इंडिया गठबंधन की रैली के दौरान चुनाव आयोग की निष्पक्षता और चुनावी प्रक्रिया की पारदर्शिता को लेकर विपक्षी नेताओं ने सवाल उठाए। कांग्रेस सांसद शशि थरूर ने मुख्य चुनाव आयुक्त (CEC) ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग की। वहीं, कांग्रेस के वरिष्ठ नेता रणदीप सिंह सुरजेवाला ने विरोध प्रदर्शन को 'जनक्रांति' करार देते हुए इसे लोकतांत्रिक अधिकारों और जनता की आवाज से जुड़ा आंदोलन बताया।रैली में विपक्षी दलों के नेताओं ने मतदाता सूची, चुनावी प्रक्रिया और संवैधानिक संस्थाओं की जवाबदेही जैसे मुद्दों को प्रमुखता से उठाया। नेताओं का कहना था कि स्वतंत्र और निष्पक्ष चुनाव किसी भी लोकतंत्र की बुनियाद होते हैं और चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली पर जनता का भरोसा बना रहना जरूरी है।हालांकि, चुनाव आयोग के खिलाफ लगाए गए आरोप विपक्षी नेताओं के राजनीतिक दावे हैं। इनसे किसी चुनावी अनियमितता या मुख्य चुनाव आयुक्त के व्यक्तिगत दुराचार की पुष्टि नहीं होती।
शशि थरूर ने मतदाता सूची में कटौती पर उठाए सवाल
कांग्रेस सांसद शशि थरूर ने रैली को संबोधित करते हुए कहा कि यह आंदोलन किसी एक राजनीतिक दल के हित के लिए नहीं, बल्कि देश के नागरिकों के संवैधानिक अधिकारों की रक्षा के लिए है। उन्होंने विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) प्रक्रिया के दौरान बड़ी संख्या में मतदाताओं के नाम हटाए जाने पर चिंता व्यक्त की।थरूर ने दावा किया कि लगभग 13 करोड़ मतदाताओं के नाम सूची से हटाए गए हैं। उन्होंने कहा कि चुनावी व्यवस्था में ऐसी पारदर्शिता होनी चाहिए जिससे किसी भी पात्र नागरिक का मतदान अधिकार प्रभावित न हो। उन्होंने निष्पक्ष और त्रुटिरहित मतदाता सूची तैयार करने की आवश्यकता पर जोर दिया।थरूर इससे पहले भी मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग कर चुके हैं। उन्होंने अक्टूबर में कहा था कि मतदाता सूची पुनरीक्षण से जुड़ी कथित अनियमितताओं की जवाबदेही तय होनी चाहिए। उनके मुताबिक, चुनाव आयोग जैसी संवैधानिक संस्था के प्रति जनता का विश्वास बनाए रखना बेहद आवश्यक है।
सुरजेवाला ने आंदोलन को बताया 'जनक्रांति'
कांग्रेस नेता रणदीप सिंह सुरजेवाला ने विरोध प्रदर्शन को 'जनक्रांति' बताते हुए इसे लोकतांत्रिक अधिकारों की रक्षा के लिए जनता की व्यापक भागीदारी से जोड़ा। विपक्षी नेताओं ने दावा किया कि रैली में शामिल लोग चुनावी प्रक्रिया की निष्पक्षता और मतदाता अधिकारों की सुरक्षा की मांग लेकर पहुंचे हैं।कांग्रेस नेताओं का कहना है कि चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली पर उठ रहे सवालों का स्पष्ट जवाब मिलना चाहिए। पार्टी ने यह भी आरोप लगाया कि मतदाता सूची में नाम हटाने की प्रक्रिया से बड़ी संख्या में पात्र नागरिक प्रभावित हो सकते हैं।हालांकि, सुरजेवाला के 'जनक्रांति' वाले बयान का मूल वीडियो या पूरा आधिकारिक वक्तव्य उपलब्ध स्रोतों में स्वतंत्र रूप से सत्यापित नहीं हो सका है।
रामलीला मैदान में विपक्षी नेताओं का जमावड़ा
रविवार, 1 नवंबर 2026 को दिल्ली के रामलीला मैदान में आयोजित रैली में कांग्रेस नेता राहुल गांधी, पार्टी अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे, प्रियंका गांधी वाड्रा, समाजवादी पार्टी अध्यक्ष अखिलेश यादव, तृणमूल कांग्रेस और अन्य विपक्षी दलों के नेता शामिल हुए।विपक्षी गठबंधन ने इस कार्यक्रम को 'चलो दिल्ली' अभियान से जोड़ा। प्रदर्शनकारियों ने 'वोट बचाओ, देश बचाओ' के नारे लगाए और चुनावी प्रक्रिया में पारदर्शिता सुनिश्चित करने की मांग की।रैली से पहले विपक्षी नेताओं ने कनॉट प्लेस से रामलीला मैदान तक मार्च भी निकाला। आयोजन के दौरान विभिन्न राज्यों से आए राजनीतिक कार्यकर्ताओं, छात्र संगठनों और नागरिक समूहों की भागीदारी देखी गई।
SIR प्रक्रिया को लेकर क्यों बढ़ा विवाद?
चुनाव आयोग की विशेष गहन पुनरीक्षण प्रक्रिया का उद्देश्य मतदाता सूचियों को अद्यतन करना है। इसके तहत मृत, स्थानांतरित, दोहराए गए और अन्य अपात्र नामों की पहचान कर सूची में आवश्यक संशोधन किए जाते हैं।विपक्ष का आरोप है कि इस प्रक्रिया में बड़ी संख्या में पात्र मतदाताओं के नाम भी हटाए गए हैं। कांग्रेस और उसके सहयोगी दलों का कहना है कि इससे नागरिकों के मतदान अधिकार प्रभावित होने का खतरा पैदा हो सकता है।दूसरी ओर, चुनाव आयोग ने राजनीतिक पक्षपात के आरोपों को खारिज किया है। आयोग का कहना है कि मतदाता सूची की शुद्धता सुनिश्चित करना आवश्यक है और गलत तरीके से नाम हटने की स्थिति में पात्र मतदाताओं के लिए दोबारा पंजीकरण की व्यवस्था मौजूद है।समाचार एजेंसी रॉयटर्स के अनुसार, मतदाता सूचियों से 13 करोड़ से अधिक नाम हटाए जाने की खबरों के बीच विपक्षी दलों ने इस प्रक्रिया की निष्पक्षता पर सवाल उठाए हैं। हालांकि, नाम हटाए जाने की कुल संख्या अपने आप में यह साबित नहीं करती कि सभी नाम गलत तरीके से हटाए गए।
खरगे और अन्य नेताओं ने भी मांगा इस्तीफा
कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने भी रैली में मुख्य चुनाव आयुक्त के इस्तीफे की मांग दोहराई। उन्होंने आरोप लगाया कि चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली सत्तारूढ़ भारतीय जनता पार्टी के पक्ष में दिखाई दे रही है।कांग्रेस महासचिव केसी वेणुगोपाल ने प्रदर्शन को केंद्र सरकार के लिए चेतावनी बताया। उन्होंने कहा कि विपक्ष चुनावी प्रक्रिया से जुड़े मुद्दों को लगातार उठाता रहेगा।हिमाचल प्रदेश के मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू और कांग्रेस सांसद मणिकम टैगोर सहित अन्य नेताओं ने भी ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग का समर्थन किया।
भाजपा ने विपक्ष के आरोपों को किया खारिज
इंडिया गठबंधन के विरोध प्रदर्शन पर भाजपा ने पलटवार किया। भाजपा नेताओं ने विपक्ष पर संवैधानिक संस्थाओं की विश्वसनीयता को राजनीतिक विवाद का विषय बनाने का आरोप लगाया।भाजपा ने दिल्ली में अलग प्रदर्शन भी आयोजित किया। पार्टी नेताओं ने सवाल उठाया कि कांग्रेस ने 1984 के सिख विरोधी दंगों की बरसी के दिन ही रैली का आयोजन क्यों किया।भाजपा नेताओं ने कहा कि चुनाव आयोग के खिलाफ लगाए जा रहे आरोपों को प्रमाणों के आधार पर परखा जाना चाहिए। वहीं, कांग्रेस नेताओं ने कहा कि लोकतांत्रिक व्यवस्था में चुनाव आयोग की जवाबदेही मांगना विपक्ष का अधिकार है।
दिल्ली में सुरक्षा के कड़े इंतजाम
रैली को देखते हुए दिल्ली पुलिस ने राजधानी के कई हिस्सों में सुरक्षा बढ़ाई। रामलीला मैदान और मार्च के मार्ग पर पुलिस तथा अर्धसैनिक बलों की तैनाती की गई।भीड़ को नियंत्रित करने के लिए बैरिकेडिंग, निगरानी कैमरे और ड्रोन का इस्तेमाल किया गया। यातायात व्यवस्था प्रभावित न हो, इसके लिए कुछ मार्गों पर विशेष प्रबंध किए गए।प्रशासन की प्राथमिकता रैली के दौरान कानून-व्यवस्था बनाए रखने और आम नागरिकों की सुरक्षा सुनिश्चित करने की रही।
चुनाव आयोग की निष्पक्षता पर जारी रहेगी बहस
इंडिया गठबंधन की रैली ने चुनाव आयोग की भूमिका, मतदाता सूची पुनरीक्षण और नागरिकों के मतदान अधिकारों से जुड़े सवालों को फिर राष्ट्रीय राजनीतिक चर्चा के केंद्र में ला दिया है।विपक्ष जहां मुख्य चुनाव आयुक्त के इस्तीफे और चुनावी प्रक्रिया में बदलाव की मांग कर रहा है, वहीं चुनाव आयोग अपने पुनरीक्षण अभियान को मतदाता सूची की शुद्धता के लिए आवश्यक बता रहा है।आने वाले दिनों में यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि मतदाता सूची से संबंधित शिकायतों के समाधान, पुनरीक्षण प्रक्रिया की पारदर्शिता और विपक्ष की मांगों पर क्या संस्थागत कदम उठाए जाते हैं।