नई दिल्ली: दिल्ली पुलिस ने शुक्रवार को शनिवार को होने वाले विरोध प्रदर्शन से पहले राजधानी में लागू सुरक्षा उपायों और पाबंदियों का बचाव किया। पुलिस ने कहा कि लोगों की सुरक्षा सुनिश्चित करने, भीड़ को नियंत्रित करने और शहर के कामकाज को सामान्य बनाए रखने के लिए ये उपाय ज़रूरी थे।
एक बयान में दिल्ली पुलिस ने कहा कि लोगों को विरोध करने का अधिकार है, लेकिन अधिकारियों की यह ज़िम्मेदारी भी है कि वे निवासियों, कर्मचारियों, व्यवसायों, पुलिसकर्मियों और महत्वपूर्ण संस्थानों - जिनमें राजधानी में स्थित संवैधानिक निकायों के कार्यालय भी शामिल हैं - की सुरक्षा करें।
बयान में कहा गया, "हम दिल्ली और जंतर-मंतर के आसपास सुरक्षा उपायों और पाबंदियों को सही परिप्रेक्ष्य में रखना चाहते हैं। लोगों को विरोध करने का अधिकार है। साथ ही, नई दिल्ली में महत्वपूर्ण संस्थान और संवैधानिक निकायों के कार्यालय भी स्थित हैं।"
पुलिस ने जुलाई में जंतर-मंतर पर हुए विरोध प्रदर्शनों के अनुभव का हवाला देते हुए दावा किया कि एक दिन के प्रदर्शन की अनुमति मांगी गई थी, लेकिन विरोध प्रदर्शन एक महीने तक चला। बयान के अनुसार, विरोध प्रदर्शनों के दौरान 200 से अधिक पुलिसकर्मी घायल हुए, जबकि आपराधिक पृष्ठभूमि वाले 2,000 से अधिक लोगों ने इसमें भाग लिया और हिंसा में योगदान दिया।
बयान में कहा गया, "जब स्थिति नियंत्रण से बाहर हो गई, तो झड़पें हुईं और निर्दोष छात्र भी घायल हो गए।" साथ ही कहा गया कि अधिकारी ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति नहीं चाहते थे।
दिल्ली पुलिस ने कहा कि वही समूह फिर से उसी स्थान पर इकट्ठा होने की कोशिश कर रहा था, इसलिए अनुमति देने से पहले भीड़ प्रबंधन और सुरक्षा संबंधी चिंताओं को दूर करना आवश्यक हो गया।
बयान में पिछले सप्ताह विरोध प्रदर्शनों के दौरान पुलिसकर्मियों से जुड़ी कथित घटनाओं की ओर भी इशारा किया गया और दावा किया गया कि जंतर-मंतर पर प्रदर्शनकारियों ने महिला कांस्टेबलों के साथ छेड़छाड़ और मारपीट की।
पुलिस ने कहा, "यह बेहद चिंताजनक है और इसे गंभीरता से लिया जाना चाहिए।"
विरोध स्थल की सीमाओं पर प्रकाश डालते हुए दिल्ली पुलिस ने कहा कि जंतर-मंतर पर एक समय में केवल 1,000 लोग ही आ सकते हैं। पुलिस ने कहा कि अधिकारियों को शहर की उस क्षमता पर भी विचार करना होगा जिसके तहत दैनिक जीवन और आर्थिक गतिविधियों में बाधा डाले बिना बड़ी भीड़ को संभाला जा सके। बयान में कहा गया, "दिल्ली देश की सबसे तेज़ी से बढ़ती अर्थव्यवस्था की राजधानी है, इसलिए हर बार विरोध-प्रदर्शन होने पर इसे रोका नहीं जा सकता।" इसमें इस बात पर ज़ोर दिया गया कि पुलिस को प्रदर्शनकारियों की ज़रूरतों और नागरिकों की भलाई व शहर के आर्थिक हितों के बीच संतुलन बनाना होता है।
पहले से मंज़ूरी लेने की ज़रूरत के बारे में बताते हुए पुलिस ने कहा कि इस प्रक्रिया से अधिकारियों को संभावित भीड़ का अंदाज़ा लगाने और ट्रैफ़िक डायवर्ज़न, इमरजेंसी एक्सेस और भीड़ की सुरक्षित आवाजाही के लिए इंतज़ाम करने में मदद मिलती है।
बयान में कहा गया, "विरोध-प्रदर्शन के लिए मंज़ूरी मांगना लोकतंत्र के ख़िलाफ़ नहीं है।" इसमें आगे कहा गया कि पहले से योजना बनाना ज़रूरी है ताकि यह पक्का किया जा सके कि प्रदर्शन शांतिपूर्ण ढंग से हों और उनसे निवासियों, कामगारों, दुकानदारों और कारोबारों पर कोई असर न पड़े।
दिल्ली पुलिस ने यह भी आरोप लगाया कि 'कॉकरोच जनता पार्टी' बिना मंज़ूरी के प्रस्तावित सभा करने जा रही थी। उसने बिना मंज़ूरी के किए जाने वाले विरोध-प्रदर्शनों पर सुप्रीम कोर्ट के रुख़ का भी ज़िक्र किया और कहा कि ऐसे प्रदर्शन ग़ैर-क़ानूनी होते हैं और उनमें शामिल लोगों पर मुक़दमा चलाया जा सकता है।
पुलिस ने कहा कि आयोजकों की यह ज़िम्मेदारी है कि वे प्रतिभागियों को बिना मंज़ूरी के आयोजित विरोध-प्रदर्शन में शामिल होने के क़ानूनी नतीजों के बारे में बताएं।
बयान में कहा गया कि शनिवार के प्रदर्शन से पहले लगाई जा रही पाबंदियां अस्थायी हैं और इनका मकसद लोगों की आवाजाही को नियंत्रित करना, भीड़ को रोकना और इलाके में सभी की सुरक्षा करना है।
दिल्ली पुलिस ने कहा, "लोगों को शांतिपूर्ण ढंग से अपनी बात रखने का अधिकार होना चाहिए। हमारी ज़िम्मेदारी है कि हम ऐसे हालात बनाएं जिनमें वे सुरक्षित रूप से ऐसा कर सकें और साथ ही शहर का कामकाज भी चलता रहे।"
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