नई दिल्ली। कॉकरोच जनता पार्टी के सह-संयोजक आशुतोष रांका ने आदिवासी समुदाय से जुड़े मुद्दों को लेकर सरकारों और व्यवस्था पर सवाल उठाए हैं। उन्होंने कहा कि देश के आदिवासी समाज का जल, जंगल और जमीन से गहरा संबंध है और उनके अधिकारों को प्राथमिकता दी जानी चाहिए। उन्होंने आदिवासी क्षेत्रों में शिक्षा, स्वास्थ्य, रोजगार और बुनियादी ढांचे की स्थिति को लेकर चिंता व्यक्त की।

आशुतोष रांका ने कहा कि आदिवासी समुदाय देश के मूल निवासियों में शामिल हैं और प्राकृतिक संसाधनों पर उनके अधिकारों को नजरअंदाज नहीं किया जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि आजादी के कई दशक बाद भी कई आदिवासी इलाकों में लोग बुनियादी सुविधाओं के लिए संघर्ष कर रहे हैं।

उन्होंने आदिवासी क्षेत्रों में शिक्षा व्यवस्था पर सवाल उठाते हुए कहा कि वहां के बच्चों को किस तरह के स्कूलों में पढ़ाई करनी पड़ रही है, इस पर ध्यान देने की जरूरत है। उन्होंने कहा कि कई क्षेत्रों में बेहतर शिक्षा संस्थानों की कमी है, जिसके कारण बच्चों को आगे की पढ़ाई में परेशानियों का सामना करना पड़ता है।

रांका ने स्वास्थ्य सुविधाओं को लेकर भी अपनी बात रखी। उन्होंने कहा कि कई आदिवासी क्षेत्रों में अस्पतालों और चिकित्सा सुविधाओं की स्थिति चिंता का विषय है। दूर-दराज के इलाकों में रहने वाले लोगों को इलाज के लिए लंबी दूरी तय करनी पड़ती है। उन्होंने स्वास्थ्य सेवाओं को मजबूत करने की जरूरत बताई।

उन्होंने रोजगार के मुद्दे पर भी अपनी राय रखी। आशुतोष रांका ने कहा कि आदिवासी क्षेत्रों में रोजगार के पर्याप्त अवसर उपलब्ध नहीं हैं। रोजगार के साधनों की कमी के कारण कई परिवारों को आर्थिक परेशानियों का सामना करना पड़ता है। उन्होंने कहा कि स्थानीय स्तर पर रोजगार के अवसर बढ़ाने की दिशा में काम किया जाना चाहिए।

उन्होंने आदिवासी इलाकों में बुनियादी ढांचे की कमी का मुद्दा भी उठाया। रांका ने कहा कि कई क्षेत्रों में सड़क, बिजली, पानी और अन्य आवश्यक सुविधाओं की स्थिति में सुधार की जरूरत है। उन्होंने कहा कि विकास योजनाओं का लाभ अंतिम व्यक्ति तक पहुंचना जरूरी है।

आशुतोष रांका ने कहा कि आदिवासी समुदायों के विकास के लिए केवल योजनाएं बनाना पर्याप्त नहीं है, बल्कि उनका प्रभावी क्रियान्वयन भी जरूरी है। उन्होंने शिक्षा, स्वास्थ्य, रोजगार और आधारभूत सुविधाओं को लेकर व्यापक स्तर पर काम करने की आवश्यकता बताई।

उन्होंने यह भी कहा कि आदिवासी समाज की संस्कृति और परंपराओं का संरक्षण करते हुए विकास की प्रक्रिया को आगे बढ़ाया जाना चाहिए। उनके अनुसार, विकास और स्थानीय अधिकारों के बीच संतुलन बनाए रखना जरूरी है।

गौरतलब है कि आदिवासी अधिकार, वन संसाधनों पर अधिकार और विकास से जुड़े मुद्दे देश में लंबे समय से चर्चा का विषय रहे हैं। विभिन्न राजनीतिक दल और सामाजिक संगठन समय-समय पर आदिवासी क्षेत्रों में सुविधाओं और अधिकारों को लेकर अपनी मांगें उठाते रहे हैं।

आशुतोष रांका के बयान के बाद आदिवासी क्षेत्रों में शिक्षा, स्वास्थ्य, रोजगार और इंफ्रास्ट्रक्चर जैसे मुद्दे फिर चर्चा में आ गए हैं। हालांकि, इन मुद्दों पर अलग-अलग राजनीतिक दलों और संगठनों के अपने-अपने विचार रहे हैं।

फिलहाल रांका के बयान को आदिवासी समुदाय से जुड़े सामाजिक और विकासात्मक मुद्दों को सामने रखने के तौर पर देखा जा रहा है। उनके द्वारा उठाए गए सवालों पर आगे राजनीतिक और सामाजिक स्तर पर चर्चा जारी रहने की संभावना है।

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