नई दिल्ली : 1 नवंबर 2026। दिल्ली के ऐतिहासिक रामलीला मैदान में आयोजित INDIA गठबंधन की रैली को लेकर देश की राजनीति गरमा गई है। केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने विपक्षी दलों पर तीखा हमला बोलते हुए कहा कि उन्हें विपक्ष में पांच साल और बिताने के लिए तैयार रहना चाहिए। शाह की इस टिप्पणी को कांग्रेस और उसके सहयोगी दलों पर राजनीतिक कटाक्ष के रूप में देखा जा रहा है। उन्होंने विपक्ष के कथित 'वोट चोरी' के आरोपों पर भी सवाल उठाए और राहुल गांधी तथा समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष अखिलेश यादव को संसद में इस मुद्दे पर बहस करने की चुनौती दी।रविवार को दिल्ली के रामलीला मैदान में कांग्रेस सहित INDIA गठबंधन के विभिन्न दलों ने चुनावी प्रक्रिया और मतदाता सूची में कथित अनियमितताओं के खिलाफ प्रदर्शन किया। इस रैली में कांग्रेस नेता राहुल गांधी, पार्टी अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे, समाजवादी पार्टी प्रमुख अखिलेश यादव और अन्य विपक्षी नेताओं की भागीदारी रही। विपक्ष ने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग उठाई और चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े किए।
अमित शाह ने विपक्ष के आरोपों को राजनीतिक मुद्दा बनाने की कोशिश करार दिया। उन्होंने कहा कि चुनावी हार के बाद लोकतांत्रिक संस्थाओं पर सवाल उठाने के बजाय विपक्षी नेताओं को जनता के बीच जाकर अपने राजनीतिक प्रदर्शन का मूल्यांकन करना चाहिए। शाह ने पहले लखनऊ में आयोजित एक कार्यक्रम के दौरान राहुल गांधी और अखिलेश यादव को चुनौती दी थी कि यदि उनके पास चुनावी अनियमितताओं के प्रमाण हैं, तो वे संसद में इस विषय पर चर्चा करें।गृह मंत्री के बयान के बाद भाजपा और विपक्ष के बीच राजनीतिक बयानबाजी तेज हो गई है। भाजपा का कहना है कि चुनाव आयोग जैसी संवैधानिक संस्था पर आरोप लगाते समय विपक्ष को तथ्यों और प्रमाणों के साथ अपनी बात रखनी चाहिए। दूसरी ओर, कांग्रेस और उसके सहयोगी दलों का आरोप है कि मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण यानी एसआईआर की प्रक्रिया में गंभीर खामियां हैं, जिनसे मतदाताओं के अधिकार प्रभावित हो सकते हैं।
रामलीला मैदान की रैली में विपक्षी नेताओं ने दावा किया कि उनका आंदोलन केवल किसी राजनीतिक दल के हितों तक सीमित नहीं है, बल्कि चुनावी पारदर्शिता और मताधिकार की रक्षा से जुड़ा हुआ है। विपक्षी दलों ने आरोप लगाया कि मतदाता सूची से बड़ी संख्या में नाम हटाए जाने के कारण पात्र नागरिकों को मतदान के अधिकार से वंचित होने का खतरा पैदा हुआ है। हालांकि, चुनाव आयोग ने राजनीतिक पक्षपात के आरोपों को खारिज किया है और कहा है कि मतदाता सूची में संशोधन का उद्देश्य गलत तथा अपात्र प्रविष्टियों को हटाना है।अमित शाह ने विपक्ष की विरोध-प्रदर्शन की रणनीति पर निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि झूठ फैलाना, अराजकता पैदा करना, नकारात्मक राजनीति करना और संसद की कार्यवाही बाधित करना विपक्ष की कार्यशैली बन गई है। उन्होंने कहा कि यदि विपक्ष इसी रास्ते पर चलता रहा तो उसे अगले पांच साल भी विपक्ष में बिताने के लिए तैयार रहना चाहिए। शाह का यह बयान विपक्षी गठबंधन की राजनीतिक रणनीति की आलोचना के रूप में सामने आया है।
गृह मंत्री ने राहुल गांधी पर व्यक्तिगत राजनीतिक कटाक्ष करते हुए कहा कि सोनिया गांधी लंबे समय से अपने बेटे को प्रधानमंत्री बनते देखना चाहती हैं, लेकिन तीन लोकसभा चुनाव बीतने के बावजूद उनकी यह इच्छा पूरी नहीं हुई है। उन्होंने विपक्ष की प्रतीकात्मक संसद की अवधारणा पर भी टिप्पणी की। शाह ने कहा कि प्रधानमंत्री बनने की इच्छा रखने वाले राहुल गांधी प्रतीकात्मक संसद में ही अपनी भूमिका निभाते रह सकते हैं। उनके इस बयान के बाद राजनीतिक विवाद और गहरा गया है।अमित शाह ने महिला आरक्षण के मुद्दे पर भी कांग्रेस को घेरा। उन्होंने आरोप लगाया कि राहुल गांधी और विपक्ष संसदीय कार्यवाही में बाधा डाल रहे हैं। शाह ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व वाली केंद्र सरकार महिलाओं को 33 प्रतिशत आरक्षण देने के अपने संकल्प पर कायम है। उन्होंने महिला सशक्तीकरण को सरकार की प्राथमिकताओं में शामिल बताया। हालांकि, विपक्ष की ओर से संसदीय विरोध को लोकतांत्रिक अधिकार के रूप में प्रस्तुत किया जाता रहा है।
गृह मंत्री ने रामलीला मैदान की रैली के आयोजन की तारीख पर भी आपत्ति जताई। उन्होंने कहा कि त्योहारों के मौसम में दिल्ली के व्यापारियों ने विपक्षी नेताओं से रैली स्थगित करने की अपील की थी। शाह के मुताबिक, व्यापारियों ने प्रेस कॉन्फ्रेंस कीं और पत्र लिखकर अपनी चिंताएं व्यक्त कीं, लेकिन उनकी मांग पर ध्यान नहीं दिया गया। उन्होंने आरोप लगाया कि इस आयोजन से त्योहारों के दौरान कारोबार प्रभावित होने की आशंका थी।शाह ने 1 नवंबर को 1984 के सिख विरोधी दंगों की बरसी का मुद्दा भी उठाया। उन्होंने कांग्रेस पर निशाना साधते हुए कहा कि इसी तारीख को रैली आयोजित करना दंगा पीड़ितों की भावनाओं के प्रति संवेदनशीलता का सवाल खड़ा करता है। दूसरी ओर, विपक्षी गठबंधन ने अपने प्रदर्शन को चुनावी पारदर्शिता और लोकतांत्रिक अधिकारों से जुड़ा आंदोलन बताया है।
अमित शाह ने दिल्ली में कांग्रेस के पिछले चुनावी प्रदर्शन का उल्लेख करते हुए कहा कि पार्टी लगातार तीन विधानसभा चुनावों में एक भी सीट नहीं जीत सकी। उन्होंने दावा किया कि दिल्ली के छोटे व्यापारी आने वाले चुनावों में भी कांग्रेस का समर्थन नहीं करेंगे। हालांकि, यह शाह का राजनीतिक दावा है, भविष्य के चुनावी परिणामों के बारे में स्थापित तथ्य नहीं।गृह मंत्री ने अपने संबोधन में केंद्र सरकार की उपलब्धियों का भी जिक्र किया। उन्होंने अनुच्छेद 370 को हटाने और तीन तलाक से जुड़े कानून सहित विभिन्न फैसलों को सरकार की नीतियों का हिस्सा बताया। इसके साथ ही उन्होंने देश को नशे की समस्या से मुक्त करने का संकल्प दोहराया। शाह ने कहा कि सरकार का लक्ष्य 31 दिसंबर 2029 तक पंजाब सहित पूरे देश को नशे के खतरे से मुक्त करना है।उधर, रामलीला मैदान में जुटे विपक्षी नेताओं ने चुनाव आयोग की जवाबदेही सुनिश्चित करने की मांग दोहराई। राहुल गांधी और अन्य नेताओं ने आरोप लगाया कि मतदाता सूची में कथित गड़बड़ियां चुनावी प्रक्रिया की विश्वसनीयता पर सवाल खड़े करती हैं। कांग्रेस का कहना है कि इस मुद्दे पर उसका आंदोलन जारी रहेगा। विपक्ष ने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग को भी प्रमुखता से उठाया।
दिल्ली में रैली के मद्देनजर सुरक्षा के व्यापक इंतजाम किए गए। बड़ी संख्या में पुलिसकर्मियों की तैनाती के साथ निगरानी कैमरों और अन्य सुरक्षा व्यवस्थाओं का सहारा लिया गया। प्रदर्शनकारियों ने मिंटो रोड और कनॉट प्लेस क्षेत्र से रामलीला मैदान की ओर मार्च किया। इस दौरान विभिन्न विपक्षी दलों के कार्यकर्ता और समर्थक मौजूद रहे।रामलीला मैदान की रैली और अमित शाह की प्रतिक्रिया ने चुनाव आयोग, मतदाता सूची संशोधन तथा संसदीय विरोध के तरीकों को लेकर राजनीतिक बहस तेज कर दी है। एक ओर भाजपा विपक्ष के आरोपों को खारिज कर रही है, वहीं दूसरी ओर INDIA गठबंधन चुनावी प्रक्रिया की पारदर्शिता का मुद्दा उठा रहा है। दोनों पक्षों के बीच जारी इस टकराव में मतदाता सूची से जुड़े दावों की तथ्यात्मक जांच और संवैधानिक संस्थाओं की जवाबदेही प्रमुख विषय बने हुए हैं।
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