भारत-चीन सीमा विवाद पर 25वें दौर की विशेष प्रतिनिधि वार्ता, बीजिंग पहुंचेंगे अजीत डोभाल
नई दिल्ली। भारत और चीन के बीच लंबे समय से चले आ रहे सीमा विवाद को लेकर विशेष प्रतिनिधि स्तर की बातचीत का 25वां दौर मंगलवार को बीजिंग में होने जा रहा है। राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार (NSA) अजीत डोभाल सोमवार को चीन की राजधानी पहुंचेंगे। सरकारी सूत्रों के मुताबिक, इस दौरान वह अपने चीनी समकक्ष और विदेश मंत्री वांग यी के साथ सीमा विवाद सहित दोनों देशों से जुड़े महत्वपूर्ण मुद्दों पर चर्चा करेंगे।
भारत-चीन के बीच विशेष प्रतिनिधि (Special Representatives-SR) स्तर की वार्ता ऐसे समय हो रही है, जब दोनों देशों के संबंधों को सामान्य बनाने की कोशिशें जारी हैं। आगामी वार्ता को इसलिए भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है, क्योंकि यह चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग की प्रस्तावित भारत यात्रा से कुछ समय पहले हो रही है। शी जिनपिंग 12 और 13 सितंबर को नई दिल्ली में होने वाले ब्रिक्स शिखर सम्मेलन में शामिल होने के लिए भारत आ सकते हैं।
मंगलवार को होगी 25वें दौर की वार्ता
सरकारी सूत्रों के अनुसार, अजीत डोभाल और वांग यी मंगलवार को विशेष प्रतिनिधि वार्ता के 25वें दौर में हिस्सा लेंगे। दोनों अधिकारी भारत और चीन के बीच सीमा से जुड़े जटिल और संवेदनशील मुद्दों पर विचार-विमर्श करेंगे।
विशेष प्रतिनिधि वार्ता का उद्देश्य दोनों देशों के बीच करीब 3,488 किलोमीटर लंबी वास्तविक सीमा से जुड़े विवाद का राजनीतिक समाधान तलाशना है। सीमा का बड़ा हिस्सा अब भी दोनों देशों के बीच विवाद का विषय है। लंबे समय से चल रही बातचीत के बावजूद सीमा विवाद का पूर्ण समाधान नहीं हो सका है।
इसके बावजूद विशेष प्रतिनिधि स्तर की बातचीत को दोनों देशों के बीच संवाद बनाए रखने का एक महत्वपूर्ण माध्यम माना जाता है। सीमा पर तनाव की स्थिति पैदा होने के बाद भी बातचीत के इस तंत्र के जरिए दोनों पक्ष एक-दूसरे के साथ संवाद करते रहे हैं।
2003 में शुरू हुई थी प्रक्रिया
भारत और चीन के बीच सीमा विवाद को व्यापक राजनीतिक स्तर पर सुलझाने के लिए विशेष प्रतिनिधि वार्ता की प्रक्रिया वर्ष 2003 में शुरू की गई थी। इसका उद्देश्य दोनों देशों के बीच लंबे समय से चले आ रहे सीमा विवाद का स्थायी समाधान तलाशना था।
सीमा विवाद ऐतिहासिक, भौगोलिक और राजनीतिक रूप से बेहद जटिल है। दोनों देशों के बीच वास्तविक नियंत्रण रेखा (LAC) के कई हिस्सों को लेकर अलग-अलग दावे हैं। इसी वजह से सीमा पर समय-समय पर तनाव की स्थिति बनती रही है।
विशेष प्रतिनिधि प्रक्रिया शुरू होने के बाद दोनों देशों के वरिष्ठ अधिकारियों ने कई दौर की वार्ता की। हालांकि अभी तक विवाद का अंतिम समाधान नहीं निकल पाया है, लेकिन इस प्रक्रिया को दोनों पक्षों के बीच संवाद बनाए रखने के लिए महत्वपूर्ण माना जाता है।
तनाव कम करने में वार्ता की भूमिका
भारत और चीन के संबंधों में सीमा विवाद सबसे प्रमुख मुद्दों में से एक है। सीमा पर तनाव का सीधा प्रभाव दोनों देशों के द्विपक्षीय संबंधों पर पड़ता है। ऐसे में विशेष प्रतिनिधि स्तर की बातचीत दोनों देशों के बीच तनाव कम करने और संवेदनशील मुद्दों पर राजनीतिक संवाद बनाए रखने में भूमिका निभाती है।
अधिकारियों का मानना है कि इस तरह की वार्ता से सीमा से जुड़े मतभेदों को बातचीत के माध्यम से प्रबंधित करने में मदद मिलती है। भले ही सीमा विवाद का अंतिम समाधान अभी दूर हो, लेकिन नियमित संवाद दोनों पक्षों के लिए महत्वपूर्ण है।
आगामी बैठक में भी दोनों पक्ष सीमा से जुड़े मुद्दों के साथ-साथ द्विपक्षीय संबंधों में स्थिरता बनाए रखने के उपायों पर चर्चा कर सकते हैं। हालांकि वार्ता के एजेंडे को लेकर आधिकारिक स्तर पर विस्तृत जानकारी सामने नहीं आई है।
शी जिनपिंग की भारत यात्रा से पहले अहम बैठक
विशेष प्रतिनिधि वार्ता का 25वां दौर चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग की प्रस्तावित भारत यात्रा से पहले हो रहा है। शी जिनपिंग 12-13 सितंबर को नई दिल्ली में होने वाले ब्रिक्स शिखर सम्मेलन में हिस्सा लेने के लिए भारत आने वाले हैं।
ऐसे में डोभाल और वांग यी के बीच होने वाली बैठक को दोनों देशों के संबंधों के व्यापक संदर्भ में महत्वपूर्ण माना जा रहा है। सीमा पर शांति और स्थिरता भारत-चीन संबंधों को सामान्य बनाने की दिशा में अहम पहलू है।
भारत लगातार यह रुख रखता रहा है कि सीमा पर शांति और स्थिरता दोनों देशों के बीच सामान्य एवं बेहतर संबंधों के लिए आवश्यक है। वहीं चीन के साथ विभिन्न स्तरों पर बातचीत के जरिए सीमा से जुड़े मतभेदों को नियंत्रित करने की कोशिश की जाती रही है।
डोभाल और वांग के बीच लगातार संवाद
अजीत डोभाल और वांग यी पहले भी भारत-चीन संबंधों तथा सीमा से जुड़े मुद्दों पर विभिन्न मौकों पर बातचीत कर चुके हैं। दोनों देशों के विशेष प्रतिनिधि के तौर पर उनकी भूमिका बेहद महत्वपूर्ण है।
विशेष प्रतिनिधि स्तर की वार्ता सामान्य राजनयिक बातचीत से अलग राजनीतिक स्तर का एक विशेष तंत्र है। इसमें दोनों पक्ष सीमा विवाद के व्यापक समाधान और दीर्घकालिक व्यवस्था को लेकर विचार करते हैं।
25वें दौर की बैठक में दोनों पक्ष पुराने मुद्दों की समीक्षा करने के साथ आगे की बातचीत के लिए दिशा तय कर सकते हैं। हालांकि किसी बड़े समझौते या निर्णायक प्रगति को लेकर अभी कोई आधिकारिक संकेत नहीं दिया गया है।
भारत और चीन के बीच सीमा विवाद का समाधान बेहद जटिल है और इसमें कई स्तरों पर बातचीत की आवश्यकता है। ऐसे में बीजिंग में होने वाली यह बैठक तत्काल समाधान से अधिक दोनों देशों के बीच संवाद की निरंतरता के लिहाज से महत्वपूर्ण मानी जा रही है।
डोभाल सोमवार को बीजिंग पहुंचेंगे और मंगलवार को वांग यी के साथ विशेष प्रतिनिधि वार्ता में हिस्सा लेंगे। अब सभी की नजरें इस बैठक के नतीजों पर रहेंगी कि सीमा विवाद और द्विपक्षीय संबंधों को लेकर दोनों पक्ष किस तरह आगे बढ़ने पर सहमत होते हैं।