नई दिल्ली। देश में हवाई यात्रा करने वाले यात्रियों के लिए महत्वपूर्ण खबर सामने आई है। केंद्र सरकार ने हवाई किराए और विमानन क्षेत्र से जुड़े नए नियम अधिसूचित कर दिए हैं। भारतीय वायुयान नियम, 2026 (Bharatiya Vayuyan Niyam, 2026) के तहत एयरलाइन कंपनियों को सामान्य परिस्थितियों में बाजार की मांग और परिचालन लागत के आधार पर टिकट का किराया निर्धारित करने की स्वतंत्रता मिलेगी। सरकार सामान्य तौर पर हवाई किराए में हस्तक्षेप नहीं करेगी। हालांकि, असाधारण परिस्थितियों में जनहित को ध्यान में रखते हुए केंद्र सरकार किराए से संबंधित निर्देश जारी कर सकेगी। नए नियम 1 जनवरी 2027 से लागू होंगे।
नागरिक उड्डयन मंत्रालय ने नए नियमों की अधिसूचना जारी की है। इन्हें 31 अक्टूबर 2026 को भारत के राजपत्र में प्रकाशित किया गया। नए नियम लगभग नौ दशक पुराने विमान नियम, 1937 का स्थान लेंगे। इनके दायरे में केवल हवाई किराया ही नहीं, बल्कि विमान पंजीकरण, सुरक्षा, रखरखाव, उड़ान संचालन, कर्मचारियों के लाइसेंस और हवाई अड्डों से संबंधित व्यवस्थाएं भी शामिल हैं।
नई व्यवस्था में एयरलाइन कंपनियां परिचालन लागत सहित विभिन्न कारकों को ध्यान में रखकर टिकट की कीमतें निर्धारित कर सकेंगी। इसका मतलब है कि किसी मार्ग पर यात्रियों की मांग बढ़ने या घटने, सीटों की उपलब्धता और अन्य व्यावसायिक परिस्थितियों के अनुसार किराए में बदलाव हो सकता है। हालांकि, यह व्यवस्था पूरी तरह नई नहीं है। भारत में एयरलाइंस को बाजार आधारित किराया तय करने की स्वतंत्रता पहले से प्राप्त है। नए नियम इस व्यवस्था को जारी रखते हुए सरकारी निगरानी और विशेष परिस्थितियों में हस्तक्षेप के प्रावधान निर्धारित करते हैं।
नए नियमों का सबसे महत्वपूर्ण पहलू यह है कि केंद्र सरकार ने सामान्य परिस्थितियों में हवाई टिकटों के लिए कोई स्थायी अधिकतम किराया सीमा निर्धारित नहीं की है। यानी एयरलाइन कंपनियों को प्रत्येक टिकट की कीमत तय करने से पहले सरकार की मंजूरी लेने की आवश्यकता नहीं होगी। इसके बावजूद कंपनियों को किराए से जुड़ी निर्धारित जानकारी नागरिक उड्डयन महानिदेशालय (DGCA) को उपलब्ध करानी होगी।
नियम 192 के अनुसार, यदि केंद्र सरकार को लगता है कि कोई असाधारण स्थिति उत्पन्न हो गई है और जनहित में हस्तक्षेप करना आवश्यक है, तो वह एयरलाइंस को लिखित निर्देश जारी कर सकती है। ऐसे निर्देश परिस्थितियों के अनुरूप होने चाहिए और केवल निर्धारित अवधि तक प्रभावी रहेंगे। हालांकि, अधिसूचना में असाधारण स्थिति की कोई निश्चित परिभाषा या किराया बढ़ोतरी की संख्यात्मक सीमा तय नहीं की गई है।
यह प्रावधान इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि कई बार विशेष परिस्थितियों में हवाई टिकटों की मांग अचानक बढ़ सकती है। प्राकृतिक आपदा, परिवहन सेवाओं में व्यवधान या अन्य आपात परिस्थितियों में बड़ी संख्या में लोग एक ही मार्ग पर यात्रा करने का प्रयास कर सकते हैं। ऐसी स्थिति में टिकटों की कीमतों में असामान्य बढ़ोतरी की आशंका रहती है। नए नियमों के तहत सरकार जरूरत पड़ने पर जनहित में हस्तक्षेप कर सकेगी।
यात्रियों के लिए एक अन्य महत्वपूर्ण बदलाव टिकट की कीमतों में पारदर्शिता से जुड़ा है। एयरलाइन कंपनियों को बुकिंग के समय यात्रियों को कुल भुगतान राशि स्पष्ट रूप से बतानी होगी। इसके साथ ही मूल किराया, टैक्स, अन्य शुल्क, टिकट रद्द करने का शुल्क और रिफंड की शर्तें अलग-अलग प्रदर्शित करनी होंगी। टिकट पर भी भुगतान संबंधी जानकारी उपलब्ध कराना आवश्यक होगा।
इस व्यवस्था से यात्रियों को यह समझने में मदद मिलेगी कि टिकट के लिए उनसे किस मद में कितनी राशि ली जा रही है। कई बार ऑनलाइन टिकट बुकिंग के दौरान शुरुआत में दिखाई गई कीमत और अंतिम भुगतान राशि में अंतर होता है। शुल्कों का स्पष्ट विवरण मिलने से यात्रियों के लिए विभिन्न एयरलाइंस के टिकटों की तुलना करना आसान हो सकता है।
एयरलाइन कंपनियों को अपने निर्धारित किराए की जानकारी वेबसाइट या अन्य डिजिटल माध्यमों पर भी प्रकाशित करनी होगी। इससे यात्रियों को किराए से संबंधित जानकारी उपलब्ध हो सकेगी। डीजीसीए को भी निर्धारित प्रक्रिया और समयसीमा के अनुसार किराए का विवरण देना होगा, ताकि नियामक संस्था इसकी निगरानी कर सके।
नए नियमों का असर विमानन कंपनियों की व्यावसायिक रणनीति पर भी पड़ सकता है। एयरलाइंस यात्रियों की मांग, परिचालन खर्च और उपलब्ध सीटों के आधार पर अलग-अलग किराया श्रेणियां निर्धारित करती हैं। नए ढांचे में भी यह व्यवस्था जारी रहेगी। हालांकि, बाजार आधारित किराया निर्धारण का मतलब यह नहीं है कि एयरलाइंस अन्य लागू कानूनों और नियामकीय जिम्मेदारियों से मुक्त हो जाएंगी।
हवाई यात्रियों के सामने सबसे बड़ा सवाल यह है कि नए नियम लागू होने के बाद टिकट सस्ते होंगे या महंगे। फिलहाल इसका कोई निश्चित जवाब नहीं है। किसी मार्ग पर प्रतिस्पर्धा और सीटों की उपलब्धता अधिक होने पर किराए कम रह सकते हैं, जबकि अधिक मांग वाले समय में टिकट महंगे हो सकते हैं। नए नियम अपने आप सभी हवाई टिकटों की कीमतों में बढ़ोतरी या कमी सुनिश्चित नहीं करते।
सरकार की ओर से अधिसूचित नया ढांचा सुप्रीम कोर्ट में अत्यधिक और कथित मनमाने हवाई किराए से संबंधित कार्यवाही के बीच सामने आया है। अक्टूबर में केंद्र सरकार ने अदालत को बताया था कि नए नियमों को प्रशासनिक मंजूरी मिल चुकी है। इसके बाद नियमों की अधिसूचना जारी की गई।
नए नियम विमानन क्षेत्र में सुरक्षा और संचालन से जुड़े कई प्रावधानों को भी समाहित करते हैं। इनमें विमान रखरखाव, उड़ान संचालन, पायलट और केबिन क्रू की ड्यूटी तथा आराम की अवधि से संबंधित व्यवस्थाएं शामिल हैं। इन प्रावधानों का उद्देश्य विमानन क्षेत्र के संचालन के लिए एक समेकित नियामकीय ढांचा उपलब्ध कराना है।
फिलहाल यात्रियों के लिए सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि 1 जनवरी 2027 से लागू होने वाले नियमों में किराया निर्धारण की बाजार आधारित व्यवस्था जारी रहेगी, लेकिन सरकार असाधारण परिस्थितियों में जनहित के लिए हस्तक्षेप कर सकेगी। इसके साथ ही टिकट की कुल कीमत और विभिन्न शुल्कों की जानकारी स्पष्ट रूप से देना एयरलाइन कंपनियों की जिम्मेदारी होगी।