40 साल की सेवा के बाद रिटायर होंगे एयर चीफ मार्शल एपी सिंह, आशुतोष दीक्षित बनेंगे नए वायुसेना प्रमुख
नई दिल्ली। भारतीय वायुसेना में शनिवार, 31 अक्टूबर को एक महत्वपूर्ण नेतृत्व परिवर्तन होने जा रहा है। निवर्तमान वायुसेना प्रमुख एयर चीफ मार्शल अमर प्रीत सिंह अपना 25 महीने का कार्यकाल पूरा करने के बाद सेवानिवृत्त हो रहे हैं। उनके स्थान पर एयर मार्शल आशुतोष दीक्षित भारतीय वायुसेना के 29वें प्रमुख का पदभार संभालेंगे। इस अवसर पर निवर्तमान वायुसेना प्रमुख ने शनिवार को नई दिल्ली स्थित नेशनल वॉर मेमोरियल पहुंचकर देश के शहीद सैनिकों को पुष्पचक्र अर्पित किया। उनके कार्यकाल के समापन के साथ ही वायुसेना में नई कमान की शुरुआत होगी।
एयर चीफ मार्शल एपी सिंह को उनके कार्यकाल के दौरान अब तक तीन आधिकारिक विदाई दी जा चुकी हैं। इनमें रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह की ओर से आयोजित विदाई कार्यक्रम भी शामिल है। शनिवार को उनकी अंतिम औपचारिक विदाई निर्धारित है, जहां उन्हें गार्ड ऑफ ऑनर देकर सम्मानित किया जाएगा। इसके साथ ही वह वायुसेना प्रमुख के पद से सेवानिवृत्त हो जाएंगे।
नेशनल वॉर मेमोरियल पर शहीदों को किया नमन
सेवानिवृत्ति से पहले एयर चीफ मार्शल अमर प्रीत सिंह ने शनिवार को नई दिल्ली स्थित नेशनल वॉर मेमोरियल पर पहुंचकर पुष्पचक्र अर्पित किया। इस दौरान उन्होंने देश की रक्षा में सर्वोच्च बलिदान देने वाले जवानों को श्रद्धांजलि दी। सैन्य परंपरा के अनुसार, शीर्ष सैन्य अधिकारियों के कार्यकाल के समापन पर शहीदों को नमन करना राष्ट्रीय जिम्मेदारी और सम्मान का महत्वपूर्ण प्रतीक माना जाता है।
एपी सिंह की यह विदाई ऐसे समय में हो रही है, जब भारतीय वायुसेना अपनी परिचालन क्षमता बढ़ाने, आधुनिक लड़ाकू विमानों को शामिल करने और स्वदेशी रक्षा तकनीक को मजबूत करने की दिशा में काम कर रही है।
रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने भी 26 अक्टूबर को एपी सिंह को आधिकारिक विदाई दी थी। इस दौरान उन्होंने वायुसेना प्रमुख की चार दशक से अधिक की विशिष्ट सेवा, नेतृत्व और वायुसेना की परिचालन क्षमताओं को मजबूत करने में उनके योगदान की सराहना की थी।
25 महीने तक संभाली वायुसेना की कमान
एयर चीफ मार्शल अमर प्रीत सिंह ने भारतीय वायुसेना प्रमुख के रूप में लगभग 25 महीने तक जिम्मेदारी निभाई। उनका सैन्य करियर चार दशक से अधिक का रहा है। उन्होंने अपने लंबे सेवाकाल में कई महत्वपूर्ण कमान और स्टाफ नियुक्तियों पर काम किया।
उनके कार्यकाल के दौरान भारतीय वायुसेना की परिचालन तैयारियों, वायु रक्षा व्यवस्था और सैन्य आधुनिकीकरण पर विशेष ध्यान दिया गया। मई 2025 में भारत और पाकिस्तान के बीच सैन्य तनाव के दौरान भी वायुसेना की भूमिका महत्वपूर्ण रही। ऑपरेशन सिंदूर के संदर्भ में एपी सिंह के नेतृत्व और वायुसेना की क्षमताओं का विशेष उल्लेख किया गया।
वायुसेना प्रमुख के तौर पर उन्होंने आधुनिक युद्ध की बदलती चुनौतियों के अनुरूप तकनीकी क्षमता, स्वदेशी रक्षा उत्पादन और सैन्य तैयारियों को मजबूत करने पर जोर दिया। उनके कार्यकाल के बाद अब इन प्राथमिकताओं को आगे बढ़ाने की जिम्मेदारी नए वायुसेना प्रमुख के कंधों पर होगी।
आशुतोष दीक्षित बनेंगे भारतीय वायुसेना के 29वें प्रमुख
केंद्र सरकार ने एयर मार्शल आशुतोष दीक्षित को भारतीय वायुसेना का अगला प्रमुख नियुक्त किया है। रक्षा मंत्रालय की ओर से 6 अक्टूबर 2026 को जारी आधिकारिक सूचना के मुताबिक, वह 31 अक्टूबर की दोपहर से एयर चीफ मार्शल के पद पर कार्यभार संभालेंगे। वह वायुसेना के 29वें प्रमुख होंगे।
आशुतोष दीक्षित वर्तमान में वायुसेना के उप प्रमुख (Vice Chief of the Air Staff) के पद पर कार्यरत हैं। इससे पहले वह चीफ ऑफ इंटीग्रेटेड डिफेंस स्टाफ और सेंट्रल एयर कमांड के एयर ऑफिसर कमांडिंग-इन-चीफ की जिम्मेदारी संभाल चुके हैं।
उनकी नियुक्ति ऐसे समय में हुई है, जब भारतीय वायुसेना स्वदेशी लड़ाकू विमानों, आधुनिक हथियार प्रणालियों और भविष्य की युद्ध तकनीकों को मजबूत करने की दिशा में तेजी से काम कर रही है।
तेजस और स्वदेशी रक्षा परियोजनाओं में निभाई अहम भूमिका
एयर मार्शल आशुतोष दीक्षित का सैन्य करियर करीब चार दशक का है। उनका जन्म 9 दिसंबर 1966 को हुआ था। उन्होंने 6 दिसंबर 1986 को भारतीय वायुसेना की फाइटर स्ट्रीम में कमीशन प्राप्त किया था।
अपने करियर के दौरान उन्होंने मिराज-2000, मिग सीरीज के विभिन्न विमानों, जगुआर, किरण, हॉक और तेजस जैसे विमानों पर उड़ान भरी है। वह अनुभवी पायलट होने के साथ-साथ एक्सपेरिमेंटल टेस्ट पायलट और क्वालिफाइड फ्लाइंग इंस्ट्रक्टर भी रहे हैं। उनके पास 3,500 घंटे से अधिक उड़ान का अनुभव है।
उन्होंने वायुसेना में कई महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां निभाई हैं। इनमें मिराज-2000 स्क्वाड्रन की कमान, फाइटर एयरबेस का नेतृत्व और विभिन्न प्रशिक्षण संस्थानों में जिम्मेदारियां शामिल हैं। उन्होंने स्वदेशी हल्के लड़ाकू विमान तेजस सहित भारतीय रक्षा विमानन परियोजनाओं को आगे बढ़ाने में भी भूमिका निभाई है।
उनकी विशिष्ट सेवाओं के लिए उन्हें परम विशिष्ट सेवा पदक, अति विशिष्ट सेवा पदक, विशिष्ट सेवा पदक और वायु सेना पदक से सम्मानित किया जा चुका है।
नई कमान के सामने होंगी कई बड़ी चुनौतियां
आशुतोष दीक्षित ऐसे समय में वायुसेना की कमान संभाल रहे हैं, जब भारतीय सुरक्षा वातावरण में तेजी से बदलाव हो रहे हैं। आधुनिक युद्ध में ड्रोन, मिसाइल, इलेक्ट्रॉनिक वॉरफेयर और अंतरिक्ष आधारित निगरानी प्रणालियों का महत्व लगातार बढ़ रहा है। ऐसे में वायुसेना के सामने अपनी तकनीकी और परिचालन क्षमता को लगातार मजबूत करने की चुनौती है।
इसके अलावा वायुसेना में लड़ाकू विमानों की उपलब्धता बढ़ाना, पुराने विमानों को चरणबद्ध तरीके से बदलना, स्वदेशी तेजस कार्यक्रम को आगे बढ़ाना और आधुनिक हथियार प्रणालियों को शामिल करना भी महत्वपूर्ण प्राथमिकताएं होंगी।
भारतीय वायुसेना की मारक क्षमता और तैयारियों के लिए राफेल, सुखोई-30 एमकेआई और तेजस जैसे लड़ाकू विमान महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं। भविष्य में स्वदेशी रक्षा उपकरणों और आधुनिक तकनीक के इस्तेमाल को बढ़ाना भी नए प्रमुख की प्राथमिकताओं में शामिल रहेगा।
शनिवार को एपी सिंह की अंतिम विदाई, रविवार को दीक्षित का गार्ड ऑफ ऑनर
भारतीय वायुसेना में नेतृत्व परिवर्तन के दौरान सैन्य परंपराओं का भी पालन किया जाएगा। एयर चीफ मार्शल अमर प्रीत सिंह को शनिवार को औपचारिक गार्ड ऑफ ऑनर दिया जाएगा। वहीं, उनके उत्तराधिकारी एयर चीफ मार्शल आशुतोष दीक्षित के सम्मान में रविवार को अलग से गार्ड ऑफ ऑनर समारोह निर्धारित किया गया है।
इस तरह 31 अक्टूबर भारतीय वायुसेना के लिए एक महत्वपूर्ण दिन बन गया है। एक ओर चार दशक से अधिक की सेवा देने वाले एपी सिंह अपनी जिम्मेदारी पूरी कर रहे हैं, वहीं दूसरी ओर आशुतोष दीक्षित नए नेतृत्व के साथ वायुसेना की कमान संभाल रहे हैं।
यह बदलाव केवल एक पद पर नियुक्ति नहीं, बल्कि भारतीय वायुसेना की भविष्य की रणनीति, आधुनिकीकरण और सुरक्षा तैयारियों के लिहाज से भी महत्वपूर्ण है। अब सभी की नजरें नए वायुसेना प्रमुख के नेतृत्व में आगे बढ़ने वाली योजनाओं और फैसलों पर रहेंगी।