नई दिल्ली। एसोसिएशन ऑफ हेल्थकेयर प्रोवाइडर्स ऑफ इंडिया (AHPI) ने अस्पतालों में दवाओं और मेडिकल कंज्यूमेबल्स की कीमतों को लेकर चल रही चर्चा में संतुलित और सबूतों पर आधारित दृष्टिकोण अपनाने की अपील की है। संगठन का कहना है कि केवल दवाओं और इस्तेमाल होने वाली चिकित्सा सामग्री की कीमतों को अलग से देखने के बजाय अस्पतालों की पूरी स्वास्थ्य सेवा व्यवस्था, मरीजों की सुरक्षा और इलाज के नतीजों की जिम्मेदारी को भी ध्यान में रखा जाना चाहिए।
AHPI का कहना है कि अस्पताल सिर्फ दवाएं उपलब्ध कराने वाले केंद्र नहीं हैं, बल्कि वे चौबीसों घंटे व्यापक क्लिनिकल सेवाएं प्रदान करते हैं। इनमें मरीजों की निगरानी, दवाओं का सुरक्षित स्टॉक, दवा तैयार करने की प्रक्रिया, गुणवत्ता जांच, सही समय पर दवा उपलब्ध कराना और मरीज के उपचार को लगातार मॉनिटर करना शामिल है।
AHPI के डायरेक्टर जनरल डॉ. गिरधर ज्ञानी ने कहा कि अस्पतालों में उपलब्ध कराई जाने वाली दवाओं और कंज्यूमेबल्स को केवल बाजार में मिलने वाले उत्पादों के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए। अस्पतालों के भीतर इनका उपयोग एक पूरी क्लिनिकल प्रक्रिया का हिस्सा होता है, जिसकी जिम्मेदारी स्वास्थ्य संस्थान और उसके मेडिकल स्टाफ पर होती है।
डॉ. ज्ञानी ने कहा, “अस्पताल सिर्फ दवाएं नहीं बेचते, बल्कि वे चौबीसों घंटे व्यापक क्लिनिकल सेवाएं उपलब्ध कराते हैं। इसमें दवाओं का स्टॉक रखना, उन्हें तैयार करना, गुणवत्ता जांच करना और मरीजों को सुरक्षित तरीके से सही समय पर दवा देना शामिल होता है।”
उन्होंने कहा कि अस्पतालों का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना होता है कि हर मरीज को उसके इलाज की जरूरत के अनुसार उचित दवा और मेडिकल सामग्री समय पर उपलब्ध हो। इसलिए दवाओं और कंज्यूमेबल्स की कीमतों पर चर्चा करते समय उनसे जुड़ी पूरी व्यवस्था और जिम्मेदारियों को नजरअंदाज नहीं किया जाना चाहिए।
AHPI के अनुसार दवाएं और कंज्यूमेबल्स अस्पताल के कुल बिल का केवल एक हिस्सा होते हैं। अस्पताल में भर्ती मरीज के इलाज से जुड़ा खर्च कई अन्य महत्वपूर्ण सेवाओं पर भी निर्भर करता है। इनमें डॉक्टर और विशेषज्ञ क्लिनिकल स्टाफ, नर्सिंग सेवाएं, डायग्नोस्टिक जांच, मेडिकल उपकरण और उनकी देखरेख का खर्च शामिल है।
इसके अलावा अस्पतालों में इस्तेमाल होने वाली मशीनों और मेडिकल उपकरणों की लागत में समय के साथ होने वाला डेप्रिसिएशन भी शामिल होता है। आधुनिक चिकित्सा उपकरणों को खरीदना, उनका रखरखाव करना और नियमित रूप से उन्हें सही स्थिति में रखना अस्पतालों के खर्च का एक बड़ा हिस्सा माना जाता है।
AHPI ने कहा कि अस्पतालों के संचालन में इंफ्रास्ट्रक्चर और यूटिलिटीज का खर्च भी महत्वपूर्ण होता है। अस्पतालों को 24 घंटे बिजली, पानी, ऑक्सीजन सपोर्ट, इमरजेंसी सेवाएं और अन्य जरूरी सुविधाएं उपलब्ध रखनी होती हैं। गंभीर मरीजों के इलाज के लिए कई विशेष व्यवस्थाओं को हमेशा तैयार रखना पड़ता है।
मरीजों की सुरक्षा के लिए इन्फेक्शन कंट्रोल व्यवस्था भी अस्पतालों की बड़ी जिम्मेदारी है। अस्पतालों को संक्रमण के खतरे को कम करने के लिए लगातार सफाई, सैनिटाइजेशन और अन्य सुरक्षा उपायों पर खर्च करना पड़ता है। इसके अलावा विभिन्न क्लिनिकल सपोर्ट सेवाओं को भी इलाज की प्रक्रिया का महत्वपूर्ण हिस्सा माना जाता है।
AHPI का कहना है कि किसी भी मरीज के अस्पताल में भर्ती होने के बाद केवल दवा देना ही इलाज नहीं होता। मरीज की स्थिति की लगातार निगरानी, डॉक्टरों और नर्सिंग स्टाफ की उपलब्धता, समय-समय पर जांच और उपचार में जरूरत के अनुसार बदलाव करना भी आवश्यक होता है।
संगठन ने कहा कि अस्पतालों में इस्तेमाल होने वाली दवाओं और कंज्यूमेबल्स की कीमतों पर चर्चा जरूरी है, लेकिन इस चर्चा में पूरी हेल्थकेयर डिलीवरी व्यवस्था को शामिल किया जाना चाहिए। कीमतों को केवल खरीद और बिक्री के अंतर के आधार पर देखना वास्तविक स्थिति को पूरी तरह नहीं दर्शाता।
AHPI ने इस बात पर जोर दिया कि स्वास्थ्य सेवाओं से जुड़े किसी भी नीतिगत निर्णय में मरीजों की सुरक्षा और इलाज के परिणाम सर्वोच्च प्राथमिकता होनी चाहिए। अगर कीमतों को नियंत्रित करने के उपाय किए जाते हैं तो उनके प्रभाव का आकलन अस्पतालों की सेवा गुणवत्ता और मरीजों के इलाज पर भी किया जाना जरूरी है।
डॉ. ज्ञानी के अनुसार अस्पतालों में दवाओं और कंज्यूमेबल्स के प्रबंधन में कई स्तरों पर जिम्मेदारी होती है। इसमें उनकी खरीद, स्टोरेज, गुणवत्ता जांच, सही तरीके से वितरण और मरीज को निर्धारित समय पर उपलब्ध कराना शामिल है। इन सभी प्रक्रियाओं में प्रशिक्षित कर्मचारियों और मजबूत व्यवस्था की जरूरत होती है।
AHPI ने कहा कि हेल्थकेयर सिस्टम में पारदर्शिता और मरीजों के हितों की रक्षा बेहद जरूरी है। इसके साथ ही अस्पतालों को सुरक्षित और गुणवत्ता वाली चिकित्सा सेवा देने के लिए जिन संसाधनों की आवश्यकता होती है, उन्हें भी समझना जरूरी है।
संगठन ने अपील की है कि दवाओं और कंज्यूमेबल्स की कीमतों पर होने वाली किसी भी चर्चा में अस्पतालों की वास्तविक संचालन लागत, क्लिनिकल जिम्मेदारियों और मरीजों की सुरक्षा से जुड़े पहलुओं का संतुलित तरीके से मूल्यांकन किया जाए।
AHPI का कहना है कि उद्देश्य ऐसा स्वास्थ्य तंत्र बनाना होना चाहिए, जिसमें मरीजों को उचित कीमत पर गुणवत्तापूर्ण इलाज मिले और अस्पताल भी सुरक्षित, प्रभावी तथा लगातार स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध कराने में सक्षम बने रहें।