जय सिंह रोड स्थित दिल्ली पुलिस मुख्यालय में कई पुलिसकर्मियों के विरोध-प्रदर्शन के एक दिन बाद, मंगलवार को गृह मंत्रालय (MHA) ने प्रदर्शन का चेहरा रहीं असिस्टेंट कमिश्नर ऑफ पुलिस (ACP) मनस्वी वशिष्ठ को तत्काल प्रभाव से सस्पेंड कर दिया। 2 नवंबर के एक आदेश के अनुसार, "मनस्वी वशिष्ठ, DANIPS (2019), एंट्री ग्रेड के खिलाफ विभागीय कार्यवाही करने पर विचार किया जा रहा है; इसलिए, सक्षम प्राधिकारी ने CCS (CCA) नियम, 1965 के नियम 10 के तहत मिली शक्तियों का इस्तेमाल करते हुए, उन्हें तत्काल प्रभाव से सस्पेंड कर दिया है।" आदेश में आगे कहा गया है कि सस्पेंशन की अवधि के दौरान, वशिष्ठ का मुख्यालय दिल्ली होगा और वह सक्षम प्राधिकारी की पूर्व अनुमति के बिना मुख्यालय से बाहर नहीं जा सकेंगी।
हालांकि, सस्पेंशन की अवधि के दौरान, वशिष्ठ को 'निर्वाह भत्ता' (subsistence allowance) पाने का अधिकार होगा। यह भत्ता उस 'लीव सैलरी' (छुट्टी के वेतन) के बराबर होगा, जो उन्हें 'हाफ-एवरेज पे' या 'हाफ पे' (आधी तनख्वाह) पर छुट्टी लेने की स्थिति में मिलती। इसके साथ ही, उन्हें महंगाई भत्ता (DA) भी मिलेगा, अगर वह इस तरह की लीव सैलरी के आधार पर देय हो। आदेश में यह भी कहा गया है कि इसके लिए उन्हें एक प्रमाण पत्र देना होगा, जिसमें यह लिखा हो कि वह लाभ, पारिश्रमिक या वेतन के लिए किसी अन्य व्यवसाय, पेशे या काम में शामिल नहीं हैं।
यह विवाद 23 अक्टूबर को एक पुलिस स्टेशन में हुई घटना के बाद शुरू हुआ, जिसमें कथित तौर पर मारपीट के दौरान वकील ललित बंसल के सिर में गंभीर चोट लग गई थी। वकीलों का आरोप है कि जब वकीलों का एक समूह इस मामले में कार्रवाई की मांग को लेकर पुलिस स्टेशन पहुंचा, तो ACP वशिष्ठ ने अपनी सर्विस रिवॉल्वर दिखाकर उन्हें धमकाया। इसके विरोध में, दिल्ली की विभिन्न जिला अदालतों के वकीलों ने संबंधित अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई की मांग करते हुए अनिश्चितकालीन हड़ताल शुरू कर दी।
28 अक्टूबर को, वशिष्ठ का तबादला गांधी नगर सब-डिवीजन से 'स्पेशल पुलिस यूनिट फॉर विमेन एंड चिल्ड्रन' (SPUWAC) में कर दिया गया, जबकि शाहदरा के SHO अरुण कुमार को सिक्योरिटी यूनिट में भेज दिया गया। इन तबादलों के बाद वकीलों ने अपनी हड़ताल वापस ले ली। इस बीच, दिल्ली पुलिस कमिश्नर अनुराग कुमार ने सोमवार को पुलिस मुख्यालय में वरिष्ठ अधिकारियों के साथ एक 'संपर्क सभा' ​​आयोजित की, ताकि सभी रैंक के पुलिसकर्मियों की शिकायतों को सुना जा सके। कमिश्नर ने उन्हें भरोसा दिलाया कि उनकी जायज चिंताओं पर तुरंत कार्रवाई की जाएगी। इनमें प्रमोशन, मॉडिफाइड एश्योर्ड करियर प्रोग्रेशन (MACP), आवास और सेवा शर्तों से जुड़े मुद्दे शामिल हैं। जिला और यूनिट प्रमुखों को निर्देश दिया गया है कि वे नियमित बैठकें करें और शिकायतों का तय समय के भीतर समाधान सुनिश्चित करें। इसके अलावा, पुलिसकर्मियों को अपनी ड्यूटी के दौरान आने वाली समस्याओं के समाधान के लिए एक संयुक्त समन्वय समिति (जॉइंट कोऑर्डिनेशन कमिटी) भी बनाई जाएगी, जिसमें दिल्ली बार काउंसिल और विभिन्न बार एसोसिएशनों के प्रतिनिधि शामिल होंगे।
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