नई दिल्ली। देश में त्योहारों और शादी-ब्याह के सीजन से पहले व्यापारियों की मुश्किलें बढ़ गई हैं। राजनीतिक विरोध-प्रदर्शनों, यातायात प्रतिबंधों और भारी सुरक्षा व्यवस्था के कारण प्रमुख बाजारों में कारोबारी गतिविधियां प्रभावित हो रही हैं। दिल्ली के कनॉट प्लेस, खान मार्केट और अन्य व्यावसायिक क्षेत्रों में दुकानदारों का कहना है कि ग्राहकों की आवाजाही में भारी गिरावट आई है। इसका सीधा असर दुकानों, रेस्तरां और अन्य व्यावसायिक प्रतिष्ठानों की बिक्री पर पड़ रहा है। व्यापारिक संगठनों ने आर्थिक नुकसान पर चिंता जताते हुए सरकार और अदालतों से हस्तक्षेप की मांग की है।व्यापारियों के अनुसार, अक्टूबर से दिसंबर का समय कारोबार के लिहाज से बेहद महत्वपूर्ण होता है। नवरात्रि, धनतेरस, दिवाली और शादी-ब्याह के सीजन में बाजारों में सामान्य दिनों की तुलना में अधिक खरीदारी होती है। लेकिन इस बार विरोध-प्रदर्शनों और सुरक्षा संबंधी पाबंदियों के कारण कारोबार प्रभावित होने का दावा किया जा रहा है।
कनॉट प्लेस और खान मार्केट में ग्राहकों की संख्या घटी
दिल्ली के प्रमुख व्यावसायिक केंद्र कनॉट प्लेस और खान मार्केट में व्यापारियों ने ग्राहकों की संख्या कम होने की शिकायत की है।दुकानदारों का कहना है कि विरोध-प्रदर्शनों की आशंका, पुलिस बैरिकेडिंग और यातायात संबंधी प्रतिबंधों के कारण लोग बाजारों में आने से बच रहे हैं।कुछ प्रतिष्ठानों ने बताया कि कई दिनों से उनकी बिक्री प्रभावित हो रही है। बाजारों में सामान्य गतिविधियां कम होने से छोटे व्यापारियों और रेस्तरां संचालकों के सामने आर्थिक चुनौतियां बढ़ गई हैं।
प्रदर्शन के कारण करोड़ों रुपये के नुकसान का दावा
व्यापारी संगठनों ने राजधानी में जारी प्रदर्शनों से बड़े आर्थिक नुकसान का दावा किया है।दिल्ली हाईकोर्ट में दाखिल याचिका में व्यापारियों ने लगभग 2,000 करोड़ रुपये के कारोबारी नुकसान का मुद्दा उठाया है। याचिकाकर्ताओं का कहना है कि विरोध-प्रदर्शनों और उनके कारण लागू प्रतिबंधों से व्यावसायिक गतिविधियां बाधित हुई हैं।हालांकि, नुकसान की यह राशि व्यापारियों का दावा है। इसकी स्वतंत्र रूप से पुष्टि नहीं हुई है।याचिका में सार्वजनिक प्रदर्शनों के प्रबंधन के लिए स्पष्ट मानक संचालन प्रक्रिया तैयार करने की मांग भी की गई है।
रेस्तरां और फूड कारोबार पर भी असर
बाजारों में ग्राहकों की संख्या कम होने से रेस्तरां और खाद्य व्यवसाय से जुड़े प्रतिष्ठान भी प्रभावित हो रहे हैं।नेशनल रेस्टोरेंट एसोसिएशन ऑफ इंडिया के कोषाध्यक्ष मनप्रीत सिंह ने बताया कि प्रदर्शन की घोषणा होने पर भी लोग संबंधित इलाकों में जाने से बचते हैं।उनके अनुसार, कई ग्राहक प्रदर्शन या किसी अप्रिय स्थिति में फंसने की आशंका के कारण बाजारों का रुख नहीं करते।व्यापारियों ने कहा कि कुछ प्रतिष्ठानों में बिक्री बेहद कम हो गई है, जबकि कुछ दुकानों को विशेष परिस्थितियों में बंद भी रखना पड़ा।
प्रधानमंत्री से हस्तक्षेप की मांग
दिल्ली के व्यापारिक संगठनों ने आर्थिक नुकसान को लेकर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से भी हस्तक्षेप करने का अनुरोध किया है।ऑटोमोटिव पार्ट्स मर्चेंट्स एसोसिएशन ने अपनी शिकायत में कहा कि 10 अक्टूबर को प्रस्तावित प्रदर्शन के आसपास कई दिनों तक ग्राहकों की आवाजाही प्रभावित रही।संगठन ने दावा किया कि प्रदर्शन की घोषणा से पहले और उसके बाद भी चार से पांच दिनों तक कारोबार पर असर पड़ा।व्यापारियों ने नुकसान के लिए जिम्मेदार लोगों से मुआवजा दिलाने की मांग की है।
सुप्रीम कोर्ट तक पहुंचा व्यापारियों का मामला
राजधानी में विरोध-प्रदर्शनों से कारोबार प्रभावित होने का मुद्दा सुप्रीम कोर्ट तक भी पहुंच गया है।शीर्ष अदालत में व्यापारियों की ओर से दायर याचिका पर सुनवाई के दौरान न्यायमूर्ति जॉयमाल्य बागची ने कहा कि यदि यह साबित होता है कि गैरकानूनी तरीके से व्यापारिक गतिविधियां बाधित हुई हैं, तो मुआवजे के सवाल पर विचार किया जा सकता है।हालांकि, अदालत ने तत्काल मुआवजा देने का कोई आदेश नहीं दिया है।
कारोबार और प्रदर्शन के अधिकार के बीच संतुलन की जरूरत
व्यापारियों का कहना है कि शांतिपूर्ण प्रदर्शन लोकतांत्रिक अधिकार है, लेकिन इसके कारण बाजारों और आम नागरिकों की गतिविधियां लंबे समय तक प्रभावित नहीं होनी चाहिए।व्यापारी संगठनों ने मांग की है कि प्रदर्शन के लिए ऐसे स्थान निर्धारित किए जाएं, जहां सामान्य यातायात और व्यावसायिक गतिविधियां कम से कम प्रभावित हों।त्योहारी सीजन में कारोबार प्रभावित होने से दुकानदारों के साथ कर्मचारियों और छोटे व्यवसायों की आय पर भी असर पड़ने की आशंका जताई जा रही है।फिलहाल व्यापारिक संगठनों की मांग है कि प्रशासन सुरक्षा व्यवस्था बनाए रखने के साथ बाजारों तक ग्राहकों की पहुंच सुनिश्चित करे, ताकि त्योहारों के महत्वपूर्ण कारोबारी समय में आर्थिक गतिविधियां सामान्य रूप से संचालित हो सकें।
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