नई दिल्ली। देश में लगातार बढ़ती यात्री संख्या और रेल सेवाओं की भारी मांग के बीच भारतीय रेलवे ने ट्रेनों की समयबद्धता में सुधार का दावा किया है। रेलवे के अनुसार, बेहतर निगरानी, आधुनिक तकनीक, समय-सारणी में बदलाव और बुनियादी ढांचे के विकास से ट्रेनों के संचालन में सुधार हुआ है। बुधवार, 21 अक्टूबर 2026 को रेलवे की ओर से जारी जानकारी के मुताबिक, वित्त वर्ष 2018-19 में ट्रेनों की समयबद्धता 69.2 प्रतिशत थी, जो 2025-26 में बढ़कर 77.43 प्रतिशत हो गई। वहीं, चालू वित्त वर्ष 2026-27 में अब तक यह आंकड़ा 77.11 प्रतिशत दर्ज किया गया है। रेलवे ने सोशल मीडिया पर समयबद्धता को लेकर प्रसारित कुछ आंकड़ों को भ्रामक बताते हुए कहा कि कोविड काल के असामान्य परिचालन की तुलना सामान्य वर्षों से करना उचित नहीं है।
सात वर्षों में समयबद्धता में बड़ा सुधार
भारतीय रेलवे ने बताया कि ट्रेनों को निर्धारित समय पर चलाने के लिए लगातार प्रयास किए जा रहे हैं। समयबद्धता के आंकड़ों में पिछले कुछ वर्षों के दौरान सुधार दिखाई दिया है।रेलवे के अनुसार, वित्त वर्ष 2023-24 में ट्रेनों की समयबद्धता 73.62 प्रतिशत थी। इसके बाद 2024-25 में यह बढ़कर 77.12 प्रतिशत हो गई।वित्त वर्ष 2025-26 में समयबद्धता 77.43 प्रतिशत दर्ज की गई। वहीं, 2026-27 में अब तक यह 77.11 प्रतिशत बनी हुई है।इस प्रकार पिछले तीन वित्त वर्षों में ट्रेनों की समयबद्धता 77 प्रतिशत से अधिक दर्ज की गई है। रेलवे ने इसे परिचालन क्षमता में सुधार का संकेत बताया है।
रेलवे की समयबद्धता के प्रमुख आंकड़े
| वित्त वर्ष | समयबद्धता |
| 2018-19 | 69.20%
| 2023-24 | 73.62%
| 2024-25 | 77.12%
| 2025-26 | 77.43%
| 2026-27 (अब तक) | 77.11%
आंकड़े रेलवे के बताए गए समयबद्धता प्रदर्शन पर आधारित हैं। चालू वित्त वर्ष का आंकड़ा अंतिम नहीं है।
सोशल मीडिया पर चल रहे आंकड़ों को बताया भ्रामक
भारतीय रेलवे ने समयबद्धता को लेकर सोशल मीडिया पर प्रसारित कुछ तुलनात्मक आंकड़ों पर भी प्रतिक्रिया दी है।रेलवे का कहना है कि कोविड-19 महामारी के दौरान ट्रेनों का परिचालन सामान्य वर्षों के मुकाबले काफी कम था।उस समय सीमित संख्या में ट्रेनें चल रही थीं और यात्री यातायात का दबाव भी सामान्य परिस्थितियों जैसा नहीं था। ऐसे में कोविड काल की समयबद्धता की तुलना वर्तमान परिचालन से करना सही तस्वीर प्रस्तुत नहीं करता।रेलवे के मुताबिक, सामान्य सेवाएं बहाल होने के बाद परिचालन का दबाव बढ़ा है। इसके बावजूद समयबद्धता को बेहतर बनाए रखने के प्रयास जारी हैं।
आधुनिक तकनीक से हो रही ट्रेनों की निगरानी
रेलवे ने बताया कि ट्रेनों के समय पर संचालन के लिए आधुनिक डिजिटल तकनीकों का इस्तेमाल बढ़ाया गया है।रेलवे बोर्ड, जोनल और मंडल स्तर पर यात्री ट्रेनों की आवाजाही की नियमित निगरानी की जा रही है।इसके अलावा इंटीग्रेटेड कोचिंग मैनेजमेंट सिस्टम, कंट्रोल ऑफिस एप्लीकेशन और नेशनल ट्रेन इंक्वायरी सिस्टम जैसी डिजिटल प्रणालियों का उपयोग किया जा रहा है।इनकी मदद से ट्रेनों की वास्तविक स्थिति, देरी के कारणों और परिचालन संबंधी समस्याओं की जानकारी प्राप्त होती है।रेलवे का दावा है कि तकनीकी निगरानी से समस्याओं की पहचान कर समय रहते सुधारात्मक कदम उठाने में मदद मिल रही है।
ट्रैक और सिग्नलिंग व्यवस्था में हो रहा सुधार
भारतीय रेलवे के अनुसार, ट्रेनों की समयबद्धता सुधारने के लिए पटरियों, सिग्नलिंग सिस्टम और बिजली आपूर्ति से जुड़े उपकरणों के रखरखाव पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है।इसके तहत पुराने उपकरणों को बदलने, ट्रैक के रखरखाव और परिचालन में बाधा बनने वाली समस्याओं को दूर करने का काम किया जा रहा है।रेलवे ने समय-सारणी को अधिक व्यावहारिक बनाने के लिए भी कदम उठाए हैं।इसके अलावा रेलवे ने बताया कि बेहतर रखरखाव और अवसंरचना विकास से ट्रेनों की विश्वसनीयता बढ़ाने का प्रयास किया जा रहा है।
मौसम और अन्य कारणों से प्रभावित होता है संचालन
रेलवे के अनुसार, ट्रेनों की देरी के पीछे कई ऐसे कारण होते हैं, जिन पर पूरी तरह नियंत्रण करना मुश्किल होता है।इनमें घना कोहरा, खराब मौसम, रेलवे ट्रैक पर क्षमता संबंधी बाधाएं, पशुओं के ट्रेन की चपेट में आने की घटनाएं और अनधिकृत चेन पुलिंग शामिल हैं।इसके अलावा रेलवे ट्रैक की मरम्मत, सिग्नलिंग संबंधी समस्याएं और विभिन्न प्रकार की ट्रेनों का एक ही मार्ग पर संचालन भी समयबद्धता को प्रभावित कर सकता है।रेलवे का कहना है कि इन चुनौतियों के बावजूद सुरक्षित परिचालन को प्राथमिकता दी जा रही है।
यात्रियों को बेहतर सुविधाएं देने पर जोर
भारतीय रेलवे ने स्पष्ट किया कि उसका उद्देश्य केवल ट्रेनों को समय पर चलाना नहीं, बल्कि यात्रियों को सुरक्षित और आरामदायक यात्रा उपलब्ध कराना भी है।रेलवे नेटवर्क के आधुनिकीकरण, बेहतर रखरखाव और परिचालन दक्षता बढ़ाने के लिए लगातार काम किए जा रहे हैं।रेलवे का कहना है कि भविष्य में तकनीक और बुनियादी ढांचे में सुधार से ट्रेनों की देरी कम करने तथा यात्री सुविधाओं को बेहतर बनाने में मदद मिलेगी।हालांकि, उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार अभी भी करीब 23 प्रतिशत ट्रेनें निर्धारित समयबद्धता मानक को पूरा नहीं कर पा रही हैं। ऐसे में रेलवे के सामने समय पर ट्रेन संचालन और यात्रियों की सुविधा को और बेहतर बनाने की चुनौती बनी हुई है।