नई दिल्ली। नेपाल में आई भीषण बाढ़ और प्राकृतिक आपदा के बाद करीब 290 भारतीय नागरिकों से अभी तक संपर्क नहीं हो पाया है। विदेश मंत्रालय (MEA) ने गुरुवार को यह जानकारी दी। मंत्रालय के अनुसार, लापता या संपर्क से बाहर भारतीयों में पनबिजली परियोजनाओं में काम करने वाले कर्मचारी, पर्यटकों के समूह और विभिन्न राज्यों से नेपाल गए तीर्थयात्री शामिल हैं।

इस बीच, कैलाश-मानसरोवर यात्रा पर गए करीब 200 भारतीय यात्रियों ने सुरक्षित निकाले जाने के लिए मदद मांगी है। नेपाल में खराब मौसम, बाढ़ और भूस्खलन के कारण कई क्षेत्रों में संपर्क और यातायात व्यवस्था प्रभावित हुई है, जिससे वहां मौजूद भारतीयों तक पहुंचने में दिक्कतें आ रही हैं।

विदेश मंत्रालय ने दी स्थिति की जानकारी

विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने बताया कि नेपाल में फंसे भारतीयों की सुरक्षा को लेकर लगातार प्रयास किए जा रहे हैं। उन्होंने कहा कि जिन भारतीय नागरिकों से संपर्क नहीं हो पाया है, उनकी जानकारी जुटाई जा रही है और उन्हें सुरक्षित निकालने के लिए नेपाल सरकार तथा अन्य संबंधित एजेंसियों के साथ समन्वय किया जा रहा है।

उन्होंने बताया कि संपर्क से बाहर लोगों में नेपाल की विभिन्न परियोजनाओं में काम कर रहे कर्मचारी और यात्रा के लिए पहुंचे भारतीय नागरिक शामिल हैं।

त्रिशूली-1 परियोजना के कर्मचारियों को बचाया गया

विदेश मंत्रालय के अनुसार, नेपाल की त्रिशूली-1 पनबिजली परियोजना में काम कर रहे 63 भारतीय कर्मचारियों को सुरक्षित निकाल लिया गया है। इसके अलावा तमिलनाडु के 21 भारतीय नागरिकों को भी बचाया जा चुका है।

हालांकि, अभी भी कई भारतीय नागरिकों की जानकारी जुटाने का काम जारी है। अधिकारियों का कहना है कि प्रभावित इलाकों में पहुंचने और संपर्क स्थापित करने के लिए लगातार प्रयास किए जा रहे हैं।

कैलाश-मानसरोवर यात्रियों की बढ़ी चिंता

नेपाल के रास्ते कैलाश-मानसरोवर यात्रा पर गए बड़ी संख्या में भारतीय यात्री भी बाढ़ और खराब मौसम के कारण प्रभावित हुए हैं। विदेश मंत्रालय के मुताबिक, करीब 200 भारतीय यात्रियों ने सुरक्षित निकासी के लिए सहायता मांगी है।

कैलाश-मानसरोवर यात्रा मार्ग पहाड़ी और दुर्गम क्षेत्रों से होकर गुजरता है। ऐसे में भारी बारिश, बाढ़ और भूस्खलन के कारण यात्रियों की आवाजाही प्रभावित हुई है।

मंत्रालय ने बताया कि यात्रा पर गए भारतीयों की सुरक्षा को प्राथमिकता दी जा रही है और उनकी स्थिति का पता लगाने के लिए संबंधित अधिकारियों से संपर्क किया जा रहा है।

ईशा फाउंडेशन के समूह से भी संपर्क नहीं

विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता ने बताया कि सद्गुरु के ईशा फाउंडेशन से जुड़े एक बड़े समूह से भी अभी संपर्क स्थापित नहीं हो पाया है।

अधिकारियों के अनुसार, प्रभावित लोगों की सूची लगातार अपडेट की जा रही है और सभी संभावित माध्यमों से उनसे संपर्क करने की कोशिश की जा रही है।

कई राज्यों के लोग प्रभावित

विदेश मंत्रालय के अनुसार, संपर्क से बाहर भारतीयों में तमिलनाडु, पश्चिम बंगाल और केरल समेत कई राज्यों के लोग शामिल हैं। इनमें कुछ लोग धार्मिक यात्रा के लिए नेपाल गए थे, जबकि कुछ रोजगार और अन्य कार्यों से वहां मौजूद थे।

भारतीय अधिकारी राज्य सरकारों, नेपाल प्रशासन, टूर ऑपरेटरों और यात्रा आयोजकों के साथ लगातार संपर्क में हैं ताकि प्रभावित नागरिकों की जानकारी मिल सके।

भारत-नेपाल प्रशासन के बीच तालमेल

भारतीय दूतावास और संबंधित अधिकारी नेपाल सरकार के साथ मिलकर राहत और बचाव कार्यों में सहयोग कर रहे हैं। प्रभावित क्षेत्रों में सड़क संपर्क बाधित होने और नेटवर्क की समस्या के कारण राहत कार्यों में चुनौतियां आ रही हैं।

अधिकारियों का कहना है कि जैसे-जैसे संपर्क स्थापित हो रहा है, प्रभावित भारतीयों की स्थिति की जानकारी मिल रही है।

परिवारों में चिंता का माहौल

नेपाल में फंसे भारतीय नागरिकों के परिवारों में चिंता का माहौल है। कई परिवार अपने परिजनों की जानकारी के लिए प्रशासन और विदेश मंत्रालय से संपर्क कर रहे हैं।

सरकार की ओर से लोगों को भरोसा दिलाया गया है कि प्रभावित भारतीयों की सुरक्षित वापसी के लिए हरसंभव प्रयास किए जा रहे हैं।

राहत और बचाव अभियान जारी

नेपाल में आई बाढ़ ने कई क्षेत्रों में भारी नुकसान पहुंचाया है। कई जगहों पर सड़कें टूट गई हैं और संचार व्यवस्था प्रभावित हुई है। इसके बावजूद भारतीय एजेंसियां स्थानीय प्रशासन के साथ मिलकर राहत और बचाव कार्यों को आगे बढ़ा रही हैं।

विदेश मंत्रालय ने कहा है कि स्थिति पर लगातार नजर रखी जा रही है और संपर्क से बाहर भारतीय नागरिकों का पता लगाने के लिए सभी जरूरी कदम उठाए जा रहे हैं।

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