बसन्त पर कविता

रायपुर। मोखला निवासी जनता से रिश्ता के पाठक रोशन साहू ने बसन्त पर कविता लिखी है.      // बसन्त आना // ओ राजा बसन्त इधर भी तो आना, मेरी सँकरी गली ,नेम निभा जाना। याद न जाती बरखा रानी की चुनर, रख कण्ठ में हँसी,आना मुस्काना।। पगले आम तो देखो बौराये हुए ये, बिन …

Update: 2024-02-13 04:10 GMT

रायपुर। मोखला निवासी जनता से रिश्ता के पाठक रोशन साहू ने बसन्त पर कविता लिखी है.

// बसन्त आना //
ओ राजा बसन्त इधर भी तो आना,
मेरी सँकरी गली ,नेम निभा जाना।
याद न जाती बरखा रानी की चुनर,
रख कण्ठ में हँसी,आना मुस्काना।।
पगले आम तो देखो बौराये हुए ये,
बिन निमन्त्रण पाती के आये हुए ये।
महुआ माते पलाश पगलाए हुए ये ,
नाचे बेगानी शादी में, होके दीवाना।।
ओढ़ पीली चुनर वो इठलाती चली,
घूंघट सरकाती पवन बासन्ती चली।
माथ दमके चंदा लजाई सी पगली,
रूप अनुप्रास उपमा,उत्प्रेक्षा मस्ताना।।
बासन्ती रंगे,रंग मन गहन प्राण की,
नीरस है जीवन बिन सुधा ज्ञान की।
काव्य सौंदर्य को मिली नई बानगी
कलम थामे हाथों,नित नया नजराना ।।

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