नई दिल्ली: ई-कॉमर्स कंपनी फ्लिपकार्ट ने कहा है कि उसके पास मजबूत कॉरपोरेट गवर्नेंस प्रक्रियाएं और नियंत्रण व्यवस्था है तथा वह ईमानदारी और नियमों के अनुपालन के उच्च मानकों के लिए प्रतिबद्ध है। कंपनी की यह प्रतिक्रिया उन खबरों के बाद आई है, जिनमें उसकी प्रमुख हिस्सेदार वॉलमार्ट द्वारा कर्मचारियों से जुड़े कथित अवैध कमीशन के आरोपों की जांच किए जाने की बात कही गई है। 
मनीकंट्रोल ने मामले की जानकारी रखने वाले चार लोगों के हवाले से बताया कि व्हिसलब्लोअर की शिकायतों के बाद जांच शुरू हुई। शिकायतों में आरोप लगाया गया है कि फ्लिपकार्ट के स्मार्टफोन तथा लगेज और ट्रैवल एक्सेसरीज विभागों के कर्मचारियों ने 150 करोड़ रुपये से अधिक का कथित अवैध कमीशन प्राप्त किया। ये आरोप हैं; इन्हें साबित हो चुका वित्तीय कदाचार नहीं माना जा सकता। 
इस तरह के कथित भुगतान को ‘किकबैक’ कहा जाता है। रिपोर्टों के अनुसार, आरोप विक्रेताओं से कर्मचारियों को भुगतान मिलने से जुड़े हैं। इन आरोपों के संदर्भ में फ्लिपकार्ट ने अपनी गवर्नेंस और अनुपालन व्यवस्था पर भरोसा जताया है। कंपनी ने 31 अक्टूबर को प्रकाशित प्रतिक्रिया में ईमानदारी के उच्च मानकों के प्रति अपनी प्रतिबद्धता दोहराई। 
वॉलमार्ट के पास फ्लिपकार्ट की 80 प्रतिशत से अधिक हिस्सेदारी है। मनीकंट्रोल की रिपोर्ट के मुताबिक, उसी ने शिकायतों के आधार पर मामले की जांच शुरू की है। उपलब्ध रिपोर्टों में कथित जांच का उल्लेख है, लेकिन उसके अंतिम निष्कर्ष सामने आने की पुष्टि नहीं है। इसलिए 150 करोड़ रुपये से अधिक की रकम को फिलहाल शिकायतों में बताई गई कथित राशि के रूप में ही देखा जाना चाहिए।
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