नई दिल्ली। पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव और होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) में संभावित बाधाओं ने दुनिया की ऊर्जा सुरक्षा को लेकर चिंता बढ़ा दी है। भारत समेत कई एशियाई देशों की कच्चे तेल की सप्लाई काफी हद तक इसी समुद्री रास्ते पर निर्भर है। ऐसे में खाड़ी देशों ने तेल आपूर्ति के लिए नए रास्ते तैयार करने की रणनीति तेज कर दी है।
खाड़ी देश अब ऐसे बड़े ऑयल पाइपलाइन और बंदरगाह प्रोजेक्ट पर काम कर रहे हैं, जिनके जरिए तेल को होर्मुज स्ट्रेट से गुजारे बिना दुनिया के बाजारों तक पहुंचाया जा सके। इन परियोजनाओं के पूरा होने के बाद वैश्विक तेल आपूर्ति नेटवर्क में बड़ा बदलाव देखने को मिल सकता है।
गोल्डमैन सैक्स के विश्लेषकों के अनुसार, खाड़ी क्षेत्र में कई पाइपलाइन और एक्सपोर्ट इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट तैयार किए जा रहे हैं। इनमें से कुछ परियोजनाएं निर्माणाधीन हैं, जबकि कुछ की योजना बनाई जा रही है। अनुमान है कि वर्ष 2027 के अंत तक इन प्रोजेक्ट्स के जरिए खाड़ी देशों के 45 प्रतिशत से अधिक तेल निर्यात को होर्मुज से जुड़े जोखिमों से बचाया जा सकेगा। वहीं 2028 तक यह क्षमता 60 प्रतिशत से ज्यादा हो सकती है।
इनमें सबसे अहम परियोजनाओं में संयुक्त अरब अमीरात (UAE) की फुजैराह पाइपलाइन शामिल है। यह पाइपलाइन अबू धाबी के तेल क्षेत्रों को फुजैराह बंदरगाह से जोड़ेगी। फुजैराह अरब सागर के किनारे स्थित है, जिससे तेल को सीधे अंतरराष्ट्रीय बाजारों तक भेजा जा सकेगा और होर्मुज स्ट्रेट से गुजरने की जरूरत कम होगी। इस परियोजना को 2027 तक पूरी तरह विकसित करने की योजना है।
वहीं, सऊदी अरब की ईस्ट-वेस्ट पाइपलाइन जिसे पेट्रोलाइन के नाम से भी जाना जाता है, पहले से ही तेल आपूर्ति के लिए वैकल्पिक रास्ता उपलब्ध करा रही है। यह पाइपलाइन सऊदी अरब के पूर्वी हिस्से के तेल क्षेत्रों को लाल सागर के तट से जोड़ती है। इसके जरिए तेल को पश्चिमी दिशा में भेजा जा सकता है और होर्मुज मार्ग पर निर्भरता कम की जा सकती है।
इसके अलावा इराक, ओमान और अन्य खाड़ी देशों में भी तेल निर्यात के वैकल्पिक रास्तों पर काम चल रहा है। इन परियोजनाओं का उद्देश्य केवल तेल परिवहन को आसान बनाना नहीं है, बल्कि किसी भी भू-राजनीतिक संकट के दौरान ऊर्जा आपूर्ति को बनाए रखना भी है।
भारत के लिए भी इन परियोजनाओं का महत्व काफी अधिक है। भारत दुनिया के सबसे बड़े तेल आयातकों में शामिल है और खाड़ी देशों से बड़ी मात्रा में कच्चा तेल खरीदता है। अगर तेल आपूर्ति के नए रास्ते विकसित होते हैं तो भविष्य में सप्लाई बाधित होने का खतरा कम हो सकता है।
होर्मुज स्ट्रेट दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण तेल मार्गों में से एक है। दुनिया के कुल समुद्री तेल व्यापार का एक बड़ा हिस्सा इसी रास्ते से गुजरता है। किसी भी तनाव या रुकावट की स्थिति में इसका सीधा असर तेल की कीमतों और वैश्विक अर्थव्यवस्था पर पड़ता है।
ऐसे में खाड़ी देशों की नई पाइपलाइन परियोजनाएं ऊर्जा सुरक्षा के लिहाज से महत्वपूर्ण मानी जा रही हैं। आने वाले वर्षों में ये प्रोजेक्ट न केवल तेल व्यापार के रास्ते बदल सकते हैं, बल्कि वैश्विक ऊर्जा राजनीति में भी नए समीकरण पैदा कर सकते हैं।