LPG और नेफ्था की मांग में भारी कमी, कुल खपत घटी

पेट्रोलियम उत्पादों की खपत

Update: 2026-06-10 13:07 GMT

Business बिजनेस : भारत में पेट्रोलियम उत्पादों की खपत में मई 2026 के दौरान बड़ी गिरावट दर्ज की गई है। सरकारी आंकड़ों के अनुसार, देश की कुल ईंधन खपत सालाना आधार पर 6.5 प्रतिशत घटकर 19.93 मिलियन टन रह गई है, जबकि मई 2025 में यह 21.3 मिलियन टन थी।

इस गिरावट के पीछे कई वैश्विक और घरेलू कारण बताए जा रहे हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि पश्चिम एशिया में जारी तनाव, कच्चे तेल की बढ़ती कीमतें और वैश्विक सप्लाई चेन में आई दिक्कतों का सीधा असर भारतीय ईंधन बाजार पर पड़ा है। इन परिस्थितियों ने पेट्रोलियम उत्पादों की कुल मांग को प्रभावित किया है।

हालांकि कुल खपत में गिरावट के बावजूद पेट्रोल और डीजल की मांग में हल्की बढ़ोतरी देखने को मिली है। इससे संकेत मिलता है कि परिवहन और लॉजिस्टिक्स सेक्टर में गतिविधियां बनी हुई हैं, लेकिन अन्य ईंधन श्रेणियों में कमजोरी ने समग्र खपत को नीचे खींच दिया।

रिपोर्ट के अनुसार, एलपीजी (LPG), नेफ्था और बिटुमेन की मांग में भारी गिरावट दर्ज की गई है। एलपीजी की खपत में कमी घरेलू और औद्योगिक उपयोग में बदलाव का संकेत देती है, जबकि नेफ्था और बिटुमेन की गिरावट औद्योगिक उत्पादन और निर्माण गतिविधियों में सुस्ती को दर्शाती है।

विशेषज्ञों का कहना है कि अंतरराष्ट्रीय बाजार में तेल की कीमतों में उतार-चढ़ाव और आपूर्ति की अनिश्चितता के कारण कंपनियां और उपभोक्ता दोनों ही सावधानी बरत रहे हैं। इससे पेट्रोलियम उत्पादों की मांग पर दबाव बना हुआ है।

इसके अलावा, कुछ विश्लेषकों का यह भी मानना है कि ऊर्जा खपत के पैटर्न में बदलाव भी इस गिरावट का एक कारण हो सकता है। धीरे-धीरे स्वच्छ ऊर्जा और वैकल्पिक ईंधन की ओर बढ़ते रुझान का असर पारंपरिक पेट्रोलियम उत्पादों पर दिखने लगा है।

कुल मिलाकर, मई 2026 में भारत की कुल पेट्रोलियम खपत में 6.5 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई है। जहां पेट्रोल और डीजल की मांग में मामूली बढ़त देखी गई, वहीं LPG, नेफ्था और बिटुमेन की गिरावट ने पूरे सेक्टर की तस्वीर बदल दी है। आने वाले महीनों में वैश्विक तेल बाजार और घरेलू मांग की स्थिति इस रुझान को तय करेगी।

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